साउथ अफ्रीका के इस फील्डर ने बदला फील्डिंग का अंदाज़

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साउथ अफ्रीका के ये खिलाड़ी है फील्डिंग के बादशाह. 22 साल का एक लढा साउथ अफ्रीका नेशनल टीम के लिए सेलेक्ट हुआ. मौका था 1992 में हुए वर्ल्ड कप का, लोगों के मन में एक ही सवाल था, टीम में टिक पायेगा ये? फील्डिंग कर लेता है, लेकिन बैटिंग का क्या? और दूसरी तरफ़ उस लड़के के मन में टेस्ट प्लेयर बनने का सपना बसा हुआ था. जॉन्टी रोड्स वो प्लेयर जो अपने करियर को एक गोल्डन एंड तो नहीं दिलवा सका. लेकिन हां, क्रिकेट के खेल को, जिसे उसने अपनी पूरी ज़िन्दगी दी, उसने एक गोल्डन शुरुआत ज़रूर दी. वो शुरुआत जिसकी वजह से ये गेम आज वहां पहुंच गया है, जहां खिलाड़ियों ने अपने से डेढ़ गुनी लम्बी परिधि के अन्दर से गेंद न जाने की परम्परा शुरू की. क्रिकेट में बल्लेबाजी के लिए अगर सचिन, गेंदबाजी में वॉर्न, एक पैमाना बने हुए हैं तो फ़ील्डिंग में जॉन्टी रोड्स बने हुए हैं. और वो इंज़माम को सुपरमैन बन रन-आउट कर देने वाली तस्वीर अमर हो चुकी है. दिन बदल चुका था. साल बदल चुके थे. क्रिकेट सफ़ेद कपड़ों से रंगीन में आ चुका था. गेंद रंगीन से सफ़ेद हो चुकी थी. 8 मार्च 1992. ब्रिस्बेन का मैदान गाबा. भरे हुए स्टैंड्स. जब साउथ अफ़्रीका का इंटरनेशनल क्रिकेट में हुक्का पानी बंद किया गया था तो वन-डे मैच खेले भी नहीं जाते थे. आज वो मात्र 5 मैच खेलने के बाद वर्ल्ड कप में खेल रही थी.

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