जब भारतीय सेना ने किया था पाकिस्तान के बर्की पर कब्ज़ा।

Video Description

1965 की भारत पाकिस्तान लड़ाई को आज 54 साल हो गए। जब भारत ने जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने के लिए पाकिस्तान के ऑपरेशन जिब्राल्टर को नाकाम कर दिया था। 17 दिन तक चले इस युद्ध में दोनों ओर से हजारों लोग मारे गए थे, जिसके बाद भी युद्ध जारी रहता अगर तत्कालीन सोवियत संघ और अमेरिका ने तय करके युद्ध विराम की कोशिश नहीं की होती। इस युद्ध में विभिन्न स्थानों पर लड़ाई लड़ी गई। जिसमें सबसे असामान्य थी राजस्थान में तनोट पोस्ट की लड़ाई थी, जो ऊंटों पर घुड़सवार मुट्ठी भर भारतीय सैनिकों द्वारा संचालित की गयी थी। वे 13 ग्रेनेडियर्स और 4 राजस्थान सशस्त्र सीमा जो बाद में सीमा सुरक्षा बल की 13 वीं बटालियन थी उनके घुड़सवार दस्तों ने यह लड़ाई लड़ी थी। इस छोटी पोस्ट पर पाकिस्तानी सेना द्वारा लगभग 3,000 गोलों के साथ उन पर बमबारी की गई थी, लेकिन सहायता आने तक भारतोय सेना ने उनका सामना किया। इस युद्ध में सियालकोट सेक्टर में लड़ी गई फिलोरा की लड़ाई को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी टैंक लड़ाई माना जाता है। भारतीय सैनिकों ने 11 सितंबर को फिलोरा पर कब्जा कर लिया और लड़ाई अगले दिन समाप्त हो गई जब पाकिस्तानी सेना पीछे हट गई। असाल उत्तर की लड़ाई, 8-10 सितम्बर तक लड़ी गई। तीन दिनों की लड़ाई के बाद, भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी सैनिकों को पीछे धकेल दिया और खेम करण का नियंत्रण वापस ले लिया। भारत ने लगभग 100 पाकिस्तानी टैंकों को पकड़ा या नष्ट कर दिया जिसमें भारत के 10 टैंक नष्ट हो गए थे। पकड़े गए पाकिस्तानी टैंकों में ज्यादातर पैटन वाले टैंक थे, उन्हें भारत के विभिन्न सैन्य स्टेशनों पर एक युद्ध स्मृति चिन्ह के रूप में रख दिया गया। बर्की की लड़ाई पाकिस्तान के लाहौर से दक्षिण-पूर्व में बमुश्किल 10 किलोमीटर दूर एक रणनीतिक स्थान बर्की शहर पर लड़ी गई थी। भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ कर बर्की पर कब्ज़ा कर लिया। कब्जा किए गए क्षेत्रों को ताशकंद घोषणा के अनुसार वापस कर दिया गया जिसने युद्ध के अंत का संकेत दिया।

Join more than 1 million learners

On Spark.Live, you can learn from Top Trainers right from the comfort of your home, on Live Video. Discover Live Interactive Learning, now.