मिसाइल मैन की १० ख़ास बातें

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कलाम २००२ से २००७ तक देश के ११ वें राष्‍ट्रपति रहे। उन्‍हें १९८१ में पद्म भूषण और १९९० में पद्म विभूषण सम्‍मान मिला। उन्‍हें १९९७ में देश के सर्वोच्‍च सम्‍मान भारत रत्‍न से नवाजा गया था। उन्‍होंने फिजिक्‍स और एयरोस्‍पेस इंजीनियंरिंग में डिग्री हासिल की थी। उनका उड़ने का सपना था और उन्‍होंने फाइटर पायलट बनने का फैसला किया। लेकिन इसमें वह १ रैंक से पीछे रह गए और इसीलिए उन्होंने वैज्ञानिक बनने की ठान ली। एपीजे के नेतृत्‍व में ही भारत ने ११ मई १९९८ को पोखरण में दूसरा परमाणु परीक्षण किया था। इस परीक्षण ने भारत को परमाणु ताकत बनाया। अमेरिका की खुफिया सेटेलाइट के लगातार नज़र रखने के बावजूद उन्‍हें इस मिशन की जानकारी नहीं लग पायी। वर्ष २००६ में कलाम का फाइटर जेट में उड़ान भरने का वर्षों पुराना सपना सच हुआ था। उन्‍होंने सुखोई फाइटर जेट में करीब ४० मिनट की उड़ान भरी थी। वह विमान को काबू करने की कोशिश में इस कदर खोए रहे कि डरने के लिए समय ही नहीं मिला। जिस वक्‍त उन्‍होंने ये कारनामा किया उस वक्‍त उनकी उम्र ७४ वर्ष की थी।

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