मंदिर जो बद्रीनाथ मंदिर का एक हिस्सा है

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इस मंदिर को बद्रीनाथ मंदिर का एक हिस्सा माना जाता है और यह मान्यता है की तीर्थयात्रियों को यहाँ बद्रीनाथ मंदिर जैसा ही आशीर्वाद मिलता है। लाइब्रेरी बस स्टैंड से १८.५ किलोमीटर की दूरी पर भद्रराज मंदिर मसूरी के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित है। यह ट्रेकिंग के लिए एक आदर्श स्थान है और मसूरी में दूध वाले की पगड़ी के रूप में जाना जाता है। भद्रराज मंदिर भगवान बालकृष्ण के भाई बालभद्र को समर्पित है। यह मंदिर एक पहाड़ी के उपर स्थित है और यहां से धूल घाटी, चकारा पर्वत माला और हिमालय के जोंसार बावर्क क्षेत्र का अविस्मरणीय दृश्य दिखाई देता है। हर साल भद्रराज मंदिर में १५ से १७ अगस्त तक एक मेले का आयोजन किया जाता है। जो हज़ारों भक्तों को आकर्षित करता है। जो यहां आकर भगवान भद्रराज से आशीर्वाद लेते हैं। भक्त देवता के मूर्ति को दूध और मक्खन चढ़ाते हैं। बादलों के छोर से भद्रराज मंदिर तक ११ किलोमीटर ट्रेक द्वारा पोहुंचा जा सकता है। पगडंडी दूधली गांव से होकर गुजरती है जहां से मंदिर तक ८ किलोमीटर का ट्रेक है। शिखर की करीब का इलाका बलूत के पेड़ों के घने जंगल से ढका हुआ है। दूधली गांव से मंदिर तक पहुंचने के लिए कई रास्ते है। भद्रराज मंदिर जानेका सही मौसम है बारिश का समय। इस स्थान पर बारिश में एक दिन कि यात्रा पर भी जा सकते हैं।

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