सदगुरु प्रवचन: "कुछ लोगों को जीवन में कई चीज़ें हासिल हो जाती हैं,

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परमपूज्य सदगुरु से प्रश्न काल में एक बार एक व्यक्ति ने प्रश्न किया: कभी कभी कुछ लोगों को जीवन में कई चीज़ें हासिल हो जाती हैं, लेकिन दूसरों को वो सब हासिल नहीं होता। क्या वजह होती है इसकी, क्या यह सब किस्मत का खेल है? सदगुरु: अगर यह किस्मत है तो आप शिकायत क्यों कर रहे हैं? अगर यही किस्मत है तो इसे ऊपर बैठ कर किसी ने तय किया होगा। आपको पता है ऐसा क्यों महसूस होता है? क्योंकि आम का मौसम न होने पर भी आप आम खाना चाहते हैं।कई बार आप किसी रईस इंसान को देखते हैं और सोचते हैं कि अरे इसके पास तो सब कुछ है, लेकिन आपको उसके जीवन को भी देखना चाहिए। आप दोपहर का खाना खाने के बाद दो घंटे सो लेते हैं, शाम के पांच बजते ही ऑफिस से घर निकल जाते हैं और परिवार के साथ वक्त बिताते हैं। एक दूसरा शख्स है जो लगातार अपने कामों में लगा है और जब वह एक खास मुकाम हासिल कर लेता है तो आपको लगता है कि अरे यह तो जिंदगी के मजे ले रहा है। ‘इनसाइट’ कार्यक्रम में मैं एक कहानी सुना रहा था। आपको भी यह अच्छी लगेगी। एक दिन एक पेड़ पर एक उल्लू बैठा था। आपने कभी उल्लू को बैठे देखा है? देश के कई हिस्सों में बेवकूफ के लिए उल्लू शब्द का प्रयोग किया जाता है, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि दुनिया के कई हिस्सों में उल्लू का मतलब बुद्धिमान भी होता है। उल्लुओं को मैं अच्छी तरह समझता हूं, क्योंकि मैंने उल्लू पाले हैं। वैसे उन्हें अपशगुन माना जाता है। कोई नहीं चाहता कि वे आपके घर के आसपास रहें, लेकिन मैंने उन्हें रखा। मेरे घर की छत पर कई उल्लू रहते थे। मैंने उन्हें बड़े गौर से देखा है। वे दूसरे पक्षियों की तरह नहीं थे। वे पूरी तरह से भावरहित होते हैं। अगर कोई दिलचस्प चीज हो रही है तो वे अपनी आंखें बायें दांयें घुमाते हैं, बस। वह मुड़कर चीजों को नहीं देखेंगे। तो एक उल्लू बैठा हुआ था। वहीं एक खरगोश आया जो एक जगह टिककर बैठ ही नहीं सकता। वह कूदता फांदता आया और उल्लू को देखकर मन में सोचने लगा, देखो मुझे चीजों के लिए इधर उधर भागना पड़ता है, और एक यह उल्लू है, आराम से बैठा है। उसने पूछा - क्या मैं भी तुम्हारी तरह आराम से बैठ सकता हूं? उल्लू ने इशारा करके कहा - क्यों नहीं, बिल्कुल बैठ सकते हो। बस खरगोश भी पेड़ के नीचे आकर बैठ गया। वह पूरी तरह शांत बैठा रहा। उसने कुछ भी नहीं किया। वहीं एक लोमड़ी जा रही थी। उसे बिना कुछ किए अपना नाश्ता मिल गया। यह कहानी हमें यही बताती है कि अगर आप बस ऐसे ही बैठे रहना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको वैसी ऊंचाई हासिल करनी होगी। आप यहां बैठ जाएं और ऐसे ही आराम से बैठे रहें, तो क्या होगा? आपको कोई कुचल कर चला जाएगा।

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