पौराणिक कथा: जानिए कैसे हुआ नारियल का जन्म?

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नारियल से जुडी एक पौराणिक कथा काफ़ी प्रचलित है जिसके अनुसार नारियल का इस धरती पर अवतरण ऋषि विश्वामित्र द्वारा किया गया था।तो आइए नारियल के जन्म से जुडी कथा को सुनते हैं. सत्यव्रत एक बेहद धार्मिक और प्रतापी राजा थे उनकी मनोकामना थी कि वे किसी भी प्रकार पृथ्वीलोक से स्वर्गलोक जा सकें। इसी काल अवधि में ऋषि विश्वामित्र लंबे समय अवधि के लिए तपस्या करने घर से काफी दूर निकल गए जिस कारण उनका परिवार भूखा-प्यासा भटकने लगा. तब राजा सत्यव्रत ने उनके परिवार की ज़िम्मेदारी ली और देखभाल करने लगे. जब ऋषि विश्वामित्र तपस्या करके वापस लौटे तो उन्हें राजा की भलाई और अच्छाई के बारे में पता चला. तब ऋषि विश्वामित्र राजा का आभार व्यक्त करने के लिए उनके दरबार पहुंचे और उनका धन्यवाद किया। शुक्रिया के रूप में राजा ने ऋषि विश्वामित्र द्वारा उन्हें एक वर देने के लिए निवेदन किया। ऋषि विश्वामित्र ने बिना संकोच राजा को वर मानने की आज्ञा दे दी. तब राजा ने स्वर्गलोक जाने की अपनी मनोकामना बताई. और विश्वामित्र ऋषि से उनके लिए स्वर्ग जाने का मार्ग बनाने का आग्रह किया. तब अपने परिवार की सहायता का उपकार मानते हुए ऋषि विश्वामित्र ने अपनी शक्तियों से राजा के लिए ऐसा मार्ग तैयार किया जो सीधा स्वर्गलोक तक पहुचता था. राजा सत्यव्रत खुश हो गए और उस मार्ग पर चलते हुए जैसे ही स्वर्गलोक के पास पहुंचे ही थे, कि स्वर्गलोक के देवता इन्द्र ने उन्हें नीचे की ओर धकेल दिया। धरती पर गिरते ही राजा ऋषि विश्वामित्र के पास पहुंचे और सारी बात बताई. ऋषि विश्वामित्र भी क्रोधित हो गए. तब उन्होने देवताओ से मिलकर पृथ्विलोक और स्वारग्लोक के मध्य में एक नये स्वर्ग लोक के निर्माण की बात सुझाई. पर ऋषि विश्वामित्र को अभी भी एक शंका थी. उनको डार था कि कहीं हवा के ज़ोर से यह नया स्वर्गलोक डगमगा ना जाए। इसका हल निकालते हुए ऋषि विश्वामित्र ने नए स्वर्गलोक के ठीक नीचे एक खम्बे का निर्माण किया, जिससे यह नया स्वर्ग लोक टीका रहे. माना जाता है की यही खम्बा समय आने पर एक पेड़ के मोटे तने के रूप में बदल गया जिसे आज नारियल के पेड़ कहते हैं.

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