जानें भगवान भैरव ने क्यों काटा था ब्रह्मा जी का सिर

Video Description

जानें भगवान भैरव ने क्यों काटा था ब्रह्मा जी का सिर शिव महापुराण में भैरव को परमात्मा शंकर का पूर्ण रूप बताया गया है। पौराणिक कथा के अनुसार एक बार देवताओं ने ब्रह्मा और विष्णु जी से बारी-बारी से पूछा कि जगत में सबसे श्रेष्ठ कौन है तो स्वाभाविक ही दोनो ने अपने को ही श्रेष्ठ बताया। प्रश्न का उत्तर ना मिलने पर देवताओं ने फिर वेदशास्त्रों से पूछा तो उत्तर आया कि जिनके भीतर चराचर जगत, भूत, भविष्य और वर्तमान समाया हुआ है, अनादि अंनत और अविनाशी तो भगवान रूद्र ही हैं। वेद शास्त्रों से शिव के बारे में यह सब सुनकर ब्रह्मा ने अपने पांचवें मुख से शिव के बारे में भला-बुरा कहना शुरू कर दिया इससे वेद बेहद दुखी हो गये. ब्रह्मा के इस आचरण पर शिव को भयानक क्रोध आया और उन्होंने भैरव को उत्पन्न करके कहा हे भैरव तुम ब्रह्मा पर शासन करो। उन दिव्य शक्ति संपन्न भैरव ने अपने बाएं हाथ की सबसे छोटी अंगुली के नाख़ून से शिव के प्रति अपमान जनक शब्द कहने वाले ब्रह्मा के पांचवे सर को ही काट दिया। इसके बाद शिव के कहने पर भैरव काशी प्रस्थान किये जहां ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिली। यही नही शिव ने भैरव को काशी का कोतवाल भी नियुक्त किया। यही वजह है की आज भी काल भैरव काशी के कोतवाल के रूप में पूजे जाते हैं। और ऐसी मान्यता है की बिना काल भैरव के दर्शन किये काशी विश्वनाथ का दर्शन अधूरा है।

Join more than 1 million learners

On Spark.Live, you can learn from Top Trainers right from the comfort of your home, on Live Video. Discover Live Interactive Learning, now.