जानिए क्यों हुआ श्री कृष्ण और अर्जुन में युद्ध

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हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार श्री कृष्ण और अर्जुन को दो शरीर और एक आत्मा माना गया है। लेकिन क्या आपको पता है श्री कृष्ण और अर्जुन बिच कुछ ऐसा हुआ कि युद्ध की नौबत आ गई थी. कथा अनुसार एक बार ऋषि गालव ध्यान पर बैठे हुए थे तभी आकाश से जा रहे चित्रसेन की थूक ऋषि पर गिरी| गालव ऋषि बहुत क्रोधित हुए परन्तु वे उसे श्राप न दे सके क्योंकि इस से उनका तप भंग हो सकता था| वे श्रीकृष्ण के पास गए और सारी कहानी उनके सामने रखी| कृष्ण ने चित्रसेन को 24 घंटे में मारने की प्रतिज्ञा ली| नारद जी को जब इस बात का पता चला तब वे सीधा चित्रसेन के पास पहुंचे और उसे संकेत दे दिया कि उसकी मृत्यु समीप है| नारद जी ने चित्रसेन को बताया की श्रीकृष्ण ने उसे मरने की प्रतिज्ञा ली है| वह ये सुनकर घबरा गया और मदद की गुहार लगाने लगा| तब नारद जी ने इस आपदा से निकालने के लिए चितरसेन को एक युक्ति सुझाई . उन्होंने उसे सुभद्रा की शरण में जाकर प्राण बचाने की विधि बताई। इस विधि के तहत चित्रसेन को यमुना तट पर जाना था और सुभद्रा के सामने तब तक रोना था जब तक सुबद्रा उनके कष्ट डोर करने की प्रतिगया ना ले ले. चित्रसेन ने इस युक्ति से सुभद्रा जी से वचन ले लिया कि वह उसके प्राणों की रक्षा करेंगी जिसके बाद सुभद्रा जी के वचन की रक्षा के लिए अर्जुन तत्पर हो उठे। युधिष्ठिर ने अर्जुन को समझाया कि श्रीकृष्ण से विरोध उचित नहीं, पर अर्जुन ने कहा, मैं शरणागत को दिए वचन से हटने का पाप मोल नहीं ले सकता। अंततः श्रीकृष्ण और अर्जुन आमने-सामने आ डटे। युद्ध का भयंकर दृश्य उपस्थित हो गया। अर्जुन ने भगवान शंकर से मदद की गुहार लगाई। महादेव प्रकट हुए। उन्होंने श्रीकृष्ण से प्रार्थना करते हुए कहा, अर्जुन आपका परम भक्त है। भक्तों के आगे अपनी प्रतिज्ञा को भूल जाना तो आपका सहज गुण है। अर्जुन के प्राणों की रक्षा में ही आपका गौरव है। श्रीकृष्ण भगवान शंकर की ओर देखकर मुस्कराए और अर्जुन को गले से लगा लिया। साथियों इस तरह श्रीकृष्ण और उनके प्रिय सखा और परम भक्त अर्जुन में युद्ध की नौबत आ गयी थी जिसे महादेव ने आ कर रोक दिया.

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