जानिए कैसे द्वारकाधीश श्रीकृष्ण ने तोड़ा सत्यभामा, सुदर्शन चक्र औ

Video Description

दोस्तों आज मैं आपको नटखट कृष्ण की एक बेहद ही प्यारी कथा सुनाती हूँ. एक बार द्वारकाधीश हमारे प्यारे कृष्ण द्वारका में रानी सत्यभामा के साथ सिंहासन पर विराजमान थे। निकट ही गरूड़ और सुदर्शन चक्र भी थे। अचानक वार्तालाप करते-करते सत्यभामा, गरूड़ और सुदर्शन चक्र अपने अपने गुनो पर अभिमान करने लगे. सत्यभामा पूछती हैं, हे प्रभु! आपने त्रेतायुग में राम के रूप में अवतार लिया था, सीता आपकी पत्नी थीं। क्या वे मुझसे भी ज्यादा सुंदर थीं? वहीं गरूड़ पूछते है कि हे भगवान क्या दुनिया में भला मुझसे तेज गति से कोई उड़ सकता है? और अभिमान में चूर सुदर्शन चक्र कहते हैं कि प्रभु मैंने बड़े-बड़े युद्धों में आपको विजयश्री दिलवाई है, क्या संसार में मुझसे भी शक्तिशाली कोई है? प्यारे श्री कृष्ण समझ गये कि आज इन तीनो प्रिय का अभिमान ख़त्म करने का उचित समय आ गया है, तब श्री कृष्ण ने तीनो को एक एक कार्य सौपा. श्री कृष्ण ने गरूण से बोला आप जाइए और हनुमान जी को बुला लाइए, आप उनसे कहिएगा कि आपकी प्रतीक्षा माता सीता और श्री राम कर रहे हैं, वहीं सत्यभामा से कहा कि ' देवी! आप सीता के रूप में तैयार हो जाएं 'और स्वयं द्वारकाधीश श्री कृष्ण ने राम का रूप धारण कर लिया। और सुदर्शन चक्र को आदेश दिया की किसी को अंदर मत आने देना. गरूड़ जी ने हनुमान के पास पहुंचकर कहा कि हे! वानरराज भगवान राम, माता सीता के साथ द्वारका में आपसे मिलने के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं। आप मेरे साथ चलें। मैं आपको अपनी पीठ पर बैठाकर शीघ्र ही वहां ले जाऊंगा। हनुमान ने विनयपूर्वक गरूड़ से कहा, आप चलिए, मैं आता हूं। गरूड़ ने सोचा, पता नहीं यह बूढ़ा वानर कब पहुंचेगा? खैर मैं भगवान के पास चलता हूं।गरूड़ द्वारका की ओर उड़े.पर यह क्या? महल में पहुंचकर गरूड़ देखते हैं कि हनुमान तो उनसे पहले ही महल में प्रभु के सामने बैठे हैं। तब श्रीराम ने हनुमान से कहा कि पवनपुत्र! तुम बिना आज्ञा के महल में कैसे प्रवेश कर गए? क्या तुम्हें किसी ने प्रवेश द्वार पर रोका नहीं? हनुमानजी ने हाथ जोड़ते हुए सिर झुकाकर अपने मुंह से सुदर्शन चक्र को निकालकर प्रभु के सामने रख दिया. भगवान मन ही मन मुस्कुराने लगे।हनुमान ने हाथ जोड़ते हुए श्रीराम से प्रश्न किया- हे प्रभु! आज आपने माता सीता के स्थान पर किस दासी को इतना सम्मान दे दिया कि वह आपके साथ सिंहासन पर विराजमान है? अब रानी सत्यभामा का अहंकार भंग होने की बारी थी। उन्हें सुंदरता का अहंकार था, जो पलभर में चूर हो गया था। रानी सत्यभामा, सुदर्शन चक्र व गरूड़जी तीनों का गर्व चूर-चूर हो गया था। सच में प्रभु श्रीकृष्ण की लीला सबसे निराली है.

Join more than 1 million learners

On Spark.Live, you can learn from Top Trainers right from the comfort of your home, on Live Video. Discover Live Interactive Learning, now.