क्या आप जानते हैं कान्हा को बांसुरी किसने दी?

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जब कभी भी बाँसुरी का नाम आता है तो स्वत: ही मन में श्री कृष्ण की स्मृति उभर आती है. तब चाहें गोपियों को अपनी मधुर धुन से रिझाना हो. या फिर गायों को पास बुलाना इसमें कोई दो राय नही है कि श्री कृष्ण का बाँसुरी प्रेम राधा के प्रेम जितना ही पवित्र है. पर क्या आपको पता हैं श्री कृष्ण को यह अमूल्य उपहार किसी और ने नही बल्कि भगवान भोलेनाथ ने भेंट स्वरूप दिया था. पौराणिक कथा अनुसार द्वापर युग में जब भगवान श्री हरि विष्णू इस धरती पर भगवान श्री कृष्ण के रुप में अवतरित हुए तो उनके सुंदर बाल गोपाल रूप के दर्शन करने के लिए सभी देवी देवता वेश बदलकर समय-समय पर उनसे मिलने आने लगे। भगवान शिव में भी नन्हे गोपाल श्री कृष्ण के दर्शन करने की इच्छा हुई. पर भोले बाबा के मन में यह विचार आया कि वह श्री कृष्ण से मिलने धरती पर जा रहें तो क्यों ना अपने साथ कुछ उपहार भी ले चलें. पर भोलेनाथ के सामने दुविधा यह थी कि कौन सा उपहार अपने साथ ले जाए जो भगवान श्री कृष्ण को प्रिय भी लगे और वह हमेशा अपने साथ भी रखे. तव महादेव को याद आया कि उनके पास ऋषि दधीचि की महाशक्तिशाली हड्डी पड़ी है। आपको बता दूं ऋषि दधीचि वो महान ऋषि हैं, जिन्होंने धर्म के लिए अपने शरीर को त्याग दिया था। साथ ही अपने शक्तिशाली शरीर की सभी हड्डियां दान कर दी थीं। उनके द्वारा दान की गई इन हड्डियों की सहायता से भगवान श्री विश्वकर्मा ने तीन धनुष पिनाक, गाण्डीव, शारंग तथा इंद्र के लिए व्रज का निर्माण किया था। तब महादेव ने ऋषि दधीचि की एक हड्डी को घिसकर एक सुंदर व मनोहर बांसुरी का निर्माण किया। जब भोले बाबा भगवान श्री कृष्ण से मिलने गोकुल पंहुचे, तो उन्होंने श्री कृष्ण को भेंट स्वरूप वह बांसुरी प्रदान कर आशीर्वाद दिया। तभी से भगवान श्री कृष्ण उस बांसुरी को सदैव अपने पास रखते हैं।

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