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जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है योग

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योग बढ़ाता है जीवन की गुणवत्ता

अंग्रेजी में एक कहावत है, हेल्थ इज़ वेल्थ यानी स्वास्थ्य ही धन है। अगर स्वास्थ्य अच्छा हो तो धन कभी भी कमाया जा सकता है। मगर आज के ज़माने में हम अपने स्वास्थ्य को दरकिनार कर सिर्फ पैसा कमाने की होड़ में लगे रहते हैं। स्वास्थ्य और मन अच्छा हो तो ज़िंदगी आसान हो जाती है। ज़िंदगी को बेहतर ढंग से जीने के लिए ज़रूरी है कि हम मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ रहें।

वैसे हमारे दैनिक जीवन में योग कितना जरूरी है ये तो अब तक हर कोई जान गया है। लेकिन क्या आपको पता है कि योग करने से न सिर्फ हम स्वस्थ रहते हैं बल्कि हमारे जीवन की गुणवत्ता भी योग के जरिए बढ़ जाती है। ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि आप खुद भी इस बात का अनुभव कर सकते हैं। यही कारण है कि दुनियाभर में योग का प्रचलन बढ़ गया है।

योग को अवसाद और चिंता विकार वाले लोगों के लिए काफी प्रभावशाली पाया गया है। सिज़ोफ्रेनिया के इलाज के रूप में भी इसका काफी अच्छा इस्तेमाल और परीक्षण किया गया है। योग तनाव, चिंता और अवसाद को प्रबंधित करने और कम करने का एक प्रभावी व बेहतरीन तरीका माना जाता है यह कई सर्वे में मूड से संबंधित विकारों पर योग की प्रभावकारिता को प्रदर्शित करते हैं।

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योग, मन-शरीर व्यायाम का एक रूप है, जो कि एक व्यापक चिकित्सा भी बन गया है। इसका प्रयोग कल्याण को बनाए रखने के लिए किया जाता है और कई स्वास्थ्य समस्याओं और बीमारियों को दूर करता है। योग को तनाव, चिंता, अवसाद और अन्य मनोदशा विकारों के उपचार में चिकित्सा उपचार के लिए एक पूरक चिकित्सा या वैकल्पिक पद्धति के रूप में माना जाना चाहिए क्योंकि यह भलाई की एक बड़ी भावना पैदा करने, विश्राम की भावनाओं को बढ़ाने, स्वयं को बेहतर बनाने के लिए दिखाया गया है।

जीवन की क्षमता व गुणवत्ता में योग है बेहद जरूरी

योग को ‘चित्त की वृत्तियों के निरोध’ के रूप में परिभाषित किया है। योगसूत्र में उन्होंने पूर्ण कल्याण तथा शारीरिक, मानसिक और आत्मिक शुद्धि के लिए आठ अंगों वाले योग का एक मार्ग विस्तार से बताया है। अष्टांग, आठ अंगों वाले, योग को आठ अलग-अलग चरणों वाला मार्ग नहीं समझना चाहिए; यह आठ आयामों वाला मार्ग है जिसमें आठों आयामों का अभ्यास एक साथ किया जाता है।

योग के जरिए शारीरिक, मानसिक विकारों को दूर करने के साथ ही साथ आत्मविश्वास और शरीर की छवि, दक्षता में सुधार, व्यवहार में बदलाव, कम चिड़चिड़ापन करने की क्षमता भी होती है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि योग हमारे जीवन की गुणवत्ता को निखारता है। आज की इस आधुनिक चिकित्सा वाली दुनिया में कई बार ऐसा देखा गया है कि शारीरिक रोगों को ठीक करने के लिए मनोवैज्ञानिक विकारों को कम करना जरूरी होता है।

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ऐसा इसलिए है क्योंकि माना जाता है कि मनुष्य की इकाई की भावनात्मक, बौद्धिक और व्यक्तित्व परतों को ठीक करने में एक विशुद्ध रूप से चिकित्सा दृष्टिकोण बहुत कम प्रभावी है। एक व्यक्ति के समग्र शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के बीच एक निर्विवाद संबंध मौजूद है और आंतरिक शांति और कल्याण योग को उसी के अनुरूप तैयार किया गया है। योग मन के उतार-चढ़ाव को रोकता है और सचेत रूप से कार्य करके, हम बेहतर जीते हैं और कम पीड़ित होते हैं।

योग का उद्देश्य सभी जीवात्म विशेषकर मानवों को पूरी तरह स्वस्थ रखना है, जिससे आत्मा को परमात्मा से मिलाया जा सके। इसका अभ्यास करने की कला किसी भी व्यक्ति के मन, शरीर और आत्मा को नियंत्रित करने में मदद करती है। साथ ही बुरी आदतों से छुटकारा भी दिलाती है। इन सभी बातों से ये तो साफ साफ तय होता है कि अगर आपके जीवन में मानसिक व शारीरिक विकार दूर हो जाते हैं तो जीवन जीने की क्षमता और ज्यादा बढ़ जाती है।

आप अपने जीवन में बदलाव चाहते हैं? , हर रोज ऊर्जावान महसूस करना चाहते हैं ?, मानसिक व शारीरिक विकारों से दूर रहने के लिए योग बेहद जरूरी है, योग के जरिए आपके जीवन की गुणवत्ता व प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है इसलिए आपको इसे अपने दैनिक जीवन में शामिल कर लेना चाहिए। इसके लिए आपको घर बैठे हमारे नेटवर्क पर मौजूद योग विशेषज्ञ विभोर गौड़ से संपर्क कर सकते हैं, जो आपको इस लॉकडाउन में भी फिट रहने में आपकी मदद करेंगे। जो योग के तमाम फायदों के बारे में आपको बताएंगे। 

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