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World Coconut Day: पूजा से लेकर भोजन तक में है नारियल का महत्व (Coconut is important in everything from worship to food)

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आज दुनियाभर में World Coconut Day मनाया जा रहा है, नारियल का उपयोग हम सभी सामान्य तौर पर अपने आहार के रूप में करते हैं लेकिन ये बेहद कम लोग ही जानते होंगे कि नारियल के लिए पूरी दुनिया में एक विशेष दिन भी रखा गया है। जैसे कि आज यानि की 2 सितंबर वर्ल्ड कोकोनट डे World Coconut Day के रूप मनाया जाता है। हालांकि आपको ये भी पता होगा कि ये पूरा सप्ताह भारत में न्यूट्रिशियन वीक के रूप में मनाया जाता है, लेकिन इसी बीच आज के दिन यानि की 2 सितंबर को विश्वभर में नारियल दिवस मनाया जा रहा है।

क्यों खास है नारियल| Why is coconut special

नारियल की खासियत की बात जितनी करें कम है, नारियल के पेड़ से लेकर इसका हर भाग बहुउपयोगी होता है। मुख्य रूप से इसका फल खाने में और तेल का प्रयोग खाद्य पदार्थ व औषधीय के रूप में किया जाता है। वहीं बात करें इसके रेशे, पत्तों की तो उससे झाड़ु चटाई, रस्सी, छत, सोफे, कुर्सी की गद्दे, ब्रश आदि भी बनाए जाते हैं। यही कारण है कि इसका फल हमारी संस्कृति का प्रतीक माना जाता है। नारियल का हमारे जीवन में बेहद महत्व है, चाहे पूजा-पाठ से लेकर सम्मान हो या अभिनंदन इन सभी में श्रीफल भेंट करने की परंपरा है जो कि वैदिककाल से चली आ रही है। इसे संस्कृत में श्रीफल, गुजराती में नारियर, बांग्ला में नारिकेल, मराठी में नारल और कश्मीरी में खूपर भी कहते हैं।

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शास्त्रों में भी है इसका वर्णन

बात करें पौराणिक कथाओं की तो उसमें भी नारियल का जिक्र किया गया है, जिसमें साफ साफ बताया गया है कि एक बार जब देवताओं से नाराज होकर राजर्षि से ब्रह्मर्षि बने विश्वामित्र ने स्वयं सृष्टि की रचना प्रारंभ कर दी थी। उनका बनाया सिर ही नारियल है। यही नहीं ये भी बताया जाता है कि ब्रह्मा की सृष्टि में इंसानों की दो आंखें होती हैं, जबकि विश्वामित्र ने अपनी मानव रचना में तीन आंखें बनाई थीं। इसीलिए नारियल में आंखों के आकार के तीन प्रतीक देखने को मिलते हैं। यही कारण है कि नारियल को त्रिनेत्र के रूप में भी देखा जाता है।

पूजा से लेकर भोजन तक महत्वपूर्ण है नारियल | World Coconut Day

नारियल का बाहरी कवच मोटा तथा रेशेदार होता है, जो एक कठोर आवरण से ढका हुआ रहता है। वहीं बात करें नारियल के कच्चे फल की तो उसे ‘डाभ’ कहा जाता है। जिसे काटने पर इससे मीठा पानी निकलता है यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होता है। वहीं इसकी कच्ची गरी भी खाई जाती है। यह तो आप भी जानते होंगे कि पके नारियल के अंदर मौजूद गरी को हवन-पूजन से लेकर पंच मेवों में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। गरी का तेल सिर को ठंडक प्रदान करता है तथा बालों को भी हेल्दी रखता है। इसका तेल वनस्पति तेल की तरह विभिन्न खाद्य पदार्थों में प्रयोग होता है। मिठाई, चॉकलेट, पुडिंग, चटनी, केक, पेस्ट्री आदि बनाने भी यह काम आता है।

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गुणों से भरपूर है नारियल | World Coconut Day

औषधीय गुणों से भरपूर नारियल का तेल त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इसकी मालिश त्वचा को कांतिमान बनाती है और बालों में इसके प्रयोग से रूसी व फंगस की समस्या दूर हो जाती है वहीं बुखार के कारण बार-बार लगने वाली प्यास में सामान्य पानी पीने के लिए मना किया जाता है। तटवर्ती इलाकों में लोग सालों से नारियल का इस्तेमाल खानपान और सौंदर्य निखारने के लिए करते आए हैं। नारियल का हर हिस्सा किसी न किसी तरह से फायदेमंद ही होता है, लेकिन नारियल पानी में कुछ ऐसे तत्व होते हैं, जिनकी शरीर को सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

शरीर में पानी की कमी होने या रक्त की तरलता कम होने पर तटवर्ती लोग नारियल पानी को घरेलू औषधि के तौर पर अपनाते हैं। डायरिया, उल्टी या दस्त होने पर चिकित्सक भी ओआरएस का घोल और नारियल पानी पीने की सलाह देते हैं। वहीं बुखार के दौरान नारियल की जटाओं को जलाकर गर्म पानी में डालकर रख दें। जब यह पानी ठंडा हो जाए तो छानकर रोगी को पिलाएं। यह बुखार में नुकसान नहीं करता और प्यास भी बुझाता है।

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