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मानसिक स्वास्थ्य : अकेलेपन से जूझ रही हैं 3 में से 1 महिला, लॉकडाउन में तेज़ी से बढ़ा आंकड़ा

मानसिक स्वास्थ्य

कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए भारत समेत पूरी दुनिया में लॉकडाउन घोषित किया गया, जिसके कुछ सकारात्मक पहलू सामने आए, तो कुछ नकारात्मक पहलू भी देखने को मिल रहा है। दरअसल, लॉकडाउन होने की वजह से लोगों की सोशल लाइफ पूरी तरह से खत्म होती हुई नजर आई। इसके अलावा, लॉकडाउन में नौकरी, कामकाज और रिश्तों में तनाव आदि का भी लोगों पर नकारात्मक असर देखने को मिला, जिसकी वजह से कई लोग अवसाद के शिकार हो गए। दरअसल, शोध के मुताबिक, लॉकडाउन में मानसिक रोग में बढ़ोत्तरी देखने को मिली है, जिसकी वजह से मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा करना बेहद ज़रूरी हो गया है।

लॉकडाउन के दौरान दुनियाभर में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर यूनिवर्सिटी ऑफ एसेक्स के शोधकर्ताओं ने शोध किया, जिसमें एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जी हां, यूनिवर्सिटी ऑफ एसेक्स के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक शोध के अनुसार, तीन में से एक महिला लॉकडाउन में अकेलापन महसूस कर रही हैं, जिनकी मानसिक स्थिति पहले के मुकाबले बिगड़ गई है। इतना ही नहीं, इस रिपोर्ट में कहा गया कि पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा अकेलापन महसूस कर रही हैं। 

महामारी के दौरान बढ़ रही हैं मानसिक समस्याएं

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शोधकर्ताओं ने अपने शोध में बताया कि कोरोना वायरस के दौरान मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत करने वालों की संख्या 7 फीसदी से बढ़कर 18 फीसदी हो गई, जो बेहद चिंताजनक है। शोध में यह भी दावा किया गया है कि महिलाओं में यह दर 11 फीसदी से बढ़कर 27 फीसदी हो गई है, जो अपने आप में ही चौंकाने वाली बात है। बता दें कि भारत में आज भी लोग मानसिक स्वास्थ्य पर बात करने से कतराते हैं, जिसकी वजह से न जाने कितने लोग अब तक अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं।

महिलाओं पर है ज्यादा दबाव

शोधकर्ताओं ने अपने शोध में दावा किया कि दिनों दिन महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की बढ़ोत्तरी हो रही है, जिसके पीछे की वजह घर में कामकाज और बच्चों की जिम्मेदारियां बताई जा रही है। दरअसल, महिलाओं के ऊपर न सिर्फ घर की ज़िम्मेदारी का दबाव होता है, बल्कि उन्हें ऑफिस का भी कामकाज देखना होता है, ऐसे में दिनों दिन उनके दिमाग पर दबाव बढ़ता ही जा रहा है।

कोरोना से पहले कैसे थे हालात?

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अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि आखिर कोरोना से पहले के हालात कैसे थे, तो आपकी जानकारी लिए बता दें कि उस समय सिर्फ 18 फीसदी महिलाएं ही खुद को अकेला महसूस करती थी, जबकि 22 फीसदी पुरुषों अकेलेपन के शिकार थे। ऑनलाइन कम्युनिटी वुमेन इंटरेक्टिव द्वारा कराए गए एक सर्वे खुलासा हुआ कि महामारी के दौरान 55 फीसदी पुरुषों की तुलना में 61 फीसदी महिलाओं ने अकेलापन महसूस किया है, जिसका असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा देखने को मिला है।

महिलाओं पर क्यों है ज्यादा दबाव?

माना जा रहा है कि लिंग भेद की वजह से महिलाओं में अकेलेपन की समस्या बढ़ रही है। इसके अलावा, घर के कामकाज और बच्चों समेत बुजुर्गों की देखभाल करने की वजह से भी उनका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। इतना ही नहीं, घरेलू कामकाज में मदद न मिलने की वजह से महिलाओं के अकेलेपन में 229 फीसदी की वृद्धि हुई है।

मानसिक स्वास्थ्य को कैसे रख सकते हैं स्वस्थ?

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कई बार परिवार या दोस्तों से सहयोग नहीं मिलने पर हम अकेलेपन के शिकार हो जाते हैं और फिर ज़िंदगी खत्म सी लगने लगती है। ऐसे में यदि आप भी इस स्थिति से गुजर रहे हैं, तो आपको निम्नलिखित उपायों का आज़माना चाहिए- 

  • छोटी-छोटी बातों का बुरा न मानें
  • परिवार या दोस्तों से खुलकर बात करें।
  • सकारात्मक रहने की कोशिश करें।
  • माहौल बदलने के लिए घर की बालकनी या छत पर जाएं।
  • सूरज की रोशनी लें।
  • यदि दोस्त और परिवार वाले दूर हैं, तो उनसे वीडियो कॉल पर संपर्क करें।
  • अपनी पसंदीदा चीज़ें करें।
  • प्रियजनों के साथ अच्छा समय व्यतीत करें।

अगर आप भी खुद को अकेला या फिर मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से परेशान हैं, तो हमारे विशेषज्ञ नीतिन मेहरा से घर बैठे संपर्क कर सकते हैं।

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