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अस्थि विसर्जन गंगा में क्यों है जरूरी? छिपा है धार्मिक व वैज्ञानिक महत्व ( Why bone immersion is important in Ganga)

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अस्थि विसर्जन

हमारे हिंदू धर्म में कई सारी परंपराएं व मान्यताएं हैं जिनका अनुसरण हम वर्षों से करते आ रहे हैं लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हमें इसके पीछे की वजह नहीं मालूम होती है। अगर हम इसके बारे में किसी से पूछते भी हैं तो वो हमें सही जानकारी नहीं दे पाता है। आज हम आपको एक ऐसे ही मान्यता के बारे बताएंगे जिसे सभी हिंदूओं को मानना पड़ता है और वो है अस्थि विसर्जन। जी हां अस्थि विसर्जन मनुष्य के जीवन के अंतिम संस्कार सबसे आखिरी पड़ाव होता है। लेकिन ये भी सच है कि अस्थि विसर्जन गंगा में ही किया जाता है अब आप सोच रहे होंगे कि भला ऐसा क्यों? कई बार आपके मन में ये सवाल आया होगा कि आखिर गंगा में ही क्यों अस्थि विसर्जन किया जाता है? तो इसके पीछे कुछ महत्वपूर्ण धार्मिक व वैज्ञानिक दोनों ही कारण छिपे हुए हैं ..

गंगा में अस्थि विसर्जन का क्या है धार्मिक कनेक्शन

सबसे पहले तो ये जान लें कि शास्त्रों में गंगा को बाकी नदियों की अपेक्षा सबसे ऊपर का दर्जा दिया गया है। गंगा को मोक्षदायिनी कहा जाता है, यानी मोक्ष प्रदान करने वाली। यह भी मान्यता है कि माँ गंगा की एक धारा पृथ्वी पर बहती है, एक आकाश में तथा एक पाताल लोक में। यानी इस पूरे ब्रह्मांड पर माँ गंगा का वर्चस्व है, यही वजह है कि कोई भी शुभ काम बिना मां गंगा की उपस्थिति के हमारे यहां संभव नहीं है।

वैसे तो कुछ लोग अन्य नदियों में भी अस्थि विसर्जन कर देते हैं लेकिन बात करें गंगा में विसर्जन होने के धार्मिक कारण की तो गंगा को पूजनीय मानने के पीछे का कारण बताया जाता है कि मां गंगा का उद्गम भगवान विष्णु के चरणों से हुआ था, जिसके बाद से वो भगवान शिव की जटाओं में रहती थीं फिर वो धरती पर आई।

यही कारण है कि शास्त्रों में कई जगहों पर गंगा को स्वर्ग की नदी भी कहा गया है, इसके साथ ही गंगा को देव नदी भी कहा जाता है यानी देवताओं की नदी। इसलिए कहा जाता है कि जिस व्यक्ति का निधन गंगा किनारे हो जाये वो हर पाप से मुक्त हो जाता है, और उसका भगवान विष्णु के धाम बैकुंठ जाने का मार्ग प्राप्त होता है।

सनातन धर्म की माने तो अगर अस्थियों को गंगा में प्रवाहित किया जाएगा तो उनके प्रियजन की आत्मा को शांति मिलेगी। वहीं मोक्ष दायनी माँ गंगा के स्पर्श से मृतक के लिए स्वर्ग के दरवाज़े खुल जाते हैं। भले ही गंगा पृथ्वी पर प्रवाहित हो रही हों लेकिन इनका निवास स्थान स्वर्ग ही बताया गया है।

अस्थि विसर्जन का वैज्ञानिक कनेक्शन

गंगा में अस्थि विसर्जन को लेकर वैज्ञानिक कारण भी है, दरअसल इंसान की अस्थियों एवं नदी को वैज्ञानिक रूप से भी जोड़कर देखा जाता है। अस्थियों (हड्डियां) में कैल्शियम और फास्फोरस अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है, जो खाद रुप में भूमि को ऊपजाऊ बनाने में सहायक है। साथ ही यह जलीय जीवों के लिए एक पौष्टिक आहार है। माना जाता है नदी में प्रवाहित मनुष्य की अस्थियां समय-समय पर अपना आकार बदलती रहती हैं, जो कहीं ना कहीं उस नदी से जुड़े स्थान को उपजाऊ बनाती हैं। गंगा के जल की उर्वरा शक्ति क्षीण न हो, इसके बचाव के लिए अस्थियां प्रवाहित करने की परंपरा रखी गई है।

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