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हमारे देश को ‘भारत’ व ‘इंडिया’ नाम किसने दिया? (Who gave the name India and Bharat)

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भारत

आजादी के 70 साल पूरे होने को हैं, ऐसे में कोरोना से जूझ रहा हमारे देश में स्वतंत्रता दिवस जो कि हर साल धूमधाम से मनाया जाता था इसकी रौनक भी फीकी पड़ गई है। यह तो आपको भी पता ही होगा कि भारत को विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता का एक देश माना जाता है, यहां पर वर्षों से कई प्रजातीय समूह एक साथ रहते हैं। भारत विविध सभ्यताओं का देश है जहाँ लोग अपने मन के अनुसार धर्म भाषाओं का अनुसरण करते हैं। इस देश में लगभग 1650 भाषाएँ बोली जाती हैं। इतनी सारी विभिन्न संस्कृति, परंपरा, धर्म और भाषा होने के बाद भी यहां लोग एक दूसरे का सम्मान करते हैं।

हालांकि प्राचीन काल से ही हमारे देश को भारत (संस्कृत का शब्द है) के नाम से पुकारा जाता है। वैसे हम अपने देश को भारत व इंडिया के नाम से जानते हैं। अब आप सोचेंगे कि हमारे देश को ये नाम आखिर किसने दिया ? कैसे पड़ें ये नाम ?

भारत नाम के पीछे हैं कई कहानियां

हमारे देश के नामकरण के पीछे विभिन्न इतिहासकारों ने विभिन्न तर्क दिए हैं, आइए जानते हैं

भौगोलिक इतिहास के अनुसार

कहा जाता है कि ऋग्वेद में ‘दशराजन’ युद्ध का वर्णन किया गया है जिसमें बताया गया है कि दस राजाओं के महासंघ और भरत जनजाति के त्र्त्सू राजवंश के राजा सुदास के बीच लड़ाई हुआ था जो कि पंजाब में रावी नदी पर हुआ था। इस युद्ध में राजा सुदास ने दस राजाओं के महासंघ पर विजय पाई थी। इस विजय ने राजा सुदास की प्रसिद्धि को कई गुना बढ़ा दिया था और अंतत: लोग खुद को भरत जनजाति के सदस्यों के रूप में जानने लगे थे इसीलिए, भरत नाम लोगों के मुंह पर रहने लगा और फिर आगे चलकर लोग ‘भारतवर्ष’ के नाम से बुलाने लगे।

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सम्राट भरत के नाम पर पड़ा भारत

महाभारत के अनुसार इंडिया को भारतवर्ष नाम, राजा भरत चक्रवर्ती के नाम पर दिया गया था। भारत को ‘इंडिया’ कहे जाने के पीछे की कहानी में बताया गया है कि प्राचीन समय में भगवान राम के पूर्वज सम्राट भरत, जो कि चक्रवर्ती सम्राट हुआ करते थें। इनका साम्राज्य कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैला हुआ था। उनके नाम पर ही देश का नाम भारतवर्ष पड़ गया। जिसे लोग बाद में भारत भी कहने लगे।

कहा जाता है कि जब भरत के पिता ने अपना पूरा राजपाट अपने पुत्र को सौंप दिया और खुद सन्यासी बनकर जंगल में चले गए तभी से इंडिया को भारतवर्ष कहा जाने लगा। सम्राट भरत चक्रवर्ती जो कि जैन धर्म के पहले तीर्थंकर के सबसे बड़े पुत्र थे। इसलिए यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि भारत का असली नाम, जैन धर्म की ही देन है।

इंडिया नाम के पीछे हैं कई कहानियां

सिंधु नदी के नामकरण हुआ इंडिया

बताया जाता है कि प्राचीन ‘सिंधु घाटी सभ्यता’ और ‘सिंधु नदी’ आधार रहे हैं इंडिया नामकरण होने का। दरअसल सिंधु नदी दुनिया की बड़ी नदियों में से एक है जो कि पाकिस्तान, चीन व भारत में बहती है, इस नदी को संस्कृत में ‘सिंधु’ और अंग्रेज़ी में ‘इंडस’ कहा जाता है। इसी ‘इंडस’ शब्द से ‘इंडिया’ शब्द बना है। जिसके आधार पर भारत को इंडिया कहा जाने लगा।

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अंग्रेज़ों को इंडिया शब्द पसंद आया

यही नहीं इसके पीछे एक वजह यह भी थीं कि अंग्रेज़ों को इंडिया शब्द अच्छा लगता था तो उन्होंने भारत को ‘इंडिया’ कहना शुरू कर दिया। इसके बाद ब्रिटिशकाल में ‘इंडिया’ नाम काफ़ी प्रसिद्ध हो गया। दुनिया के लगभग सभी देश भारत को ‘इंडिया’ के नाम से जानने लगे थे इस तरह से भारत का नाम ‘इंडिया’ पड़ा। ‘इंडिया’ को पूरी मान्यता भारत की आज़ादी के बाद मिली। जब देश आज़ाद हुआ तो भारत को संविधान ने भी इस नाम को स्वीकार कर लिया था। इसके बाद भारत के लोग भारत को ‘इंडिया’ और ख़ुद को ‘इंडियन’ कहने लगे थे।

एक इतिहासकार की मानें तो जब अलेक्जैंडर (सिकन्दर) भारत आया था तो उसने अंग्रेज़ी में ‘HINDU’ का ‘H’ हटाकर देश को ‘INDU’ नाम से बुलवाना शुरू कर दिया, जो बाद में इंडिया बन गया। वैसे देखा जाए तो संविधान में आज भी हमारे देश का नाम ‘भारतवर्ष’ ही है।

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