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जन्माष्टमी कब है, यहां मिलेगी सटीक जानकारी (When krishna janmashtami will be celebrated)

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जन्माष्टमी

हिंदू धर्म में त्योहार की कमी नहीं है हर माह कोई न कोई त्योहार पड़ता ही रहता है, हर त्योहार का अपना अलग ही महत्व होता है। वहीं आपको बताते चलें कि इन दिनों जन्माष्टमी को लेकर हर तरफ चर्चा हो रही है क्योंकि हर बार की तरह इस बार भी जन्माष्टमी तिथि को लेकर लोग असंमजस में है। देश के अलग अलग हिस्सों में जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है लेकिन कुछ जगहों पर यह बेहद धूमधाम से मनाया जाता है जैसे जगह-जगह पर झांकिया सजाई जाती हैं तो महाराष्ट्र में दही-हांडी के खेल का आयोजन किया जाता है।

पर इस बार कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते मंदिरो में हो हमेशा की तरह रौनक नहीं दिखाई देगी लेकिन लोग घरों में खास अंदाज में कृष्ष जन्मोत्सव मनाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि कृष्ण जन्म को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं और इस त्यौहार को पूरे देश में जोर-शोर से मनाया जाता है। भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव को जहां साधु-संत अपने तरीके मनाते हैं तो आम जनता इसको दूसरी तरह से मनाती है।

हालांकि आपको ये बता दें कि इस बार श्रीकृष्णजन्माष्टमी का पर्व और भी ज्यादा खास है, क्योंकि 27 साल बाद एक बेहद अद्भुत संयोग बन रहा है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि ज्योतिषियों की मानें तो साल 1993 के बाद श्रीकृष्णजन्माष्टमी पर पहली बार बुधाष्टमी और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है इससे सबसे ज्यादा लाभ तुला, मकर और मीन राशि वालों को हो सकता है।

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जन्माष्टमी कब है

हर साल की तरह इस बार भी जन्माष्टमी पर असमंजस है ऐसे में अगर आपने गौर किया होगा तो ज्यादातर पंचांगों में 11 और 12 अगस्त को जन्माष्टमी है। इस बार श्रीकृष्णजन्माष्टमी पर एक विशेष योग बन रहा है। ज्योतिषियों का कहना है कि 12 अगस्त पर कृतिका नक्षत्र लगेगा। इतना ही नहीं चंद्रमा मेष राशि और सूर्य कर्क राशि में रहेंगे। कृतिका नक्षत्र और राशियों की इस स्थिति वृद्धि योग बना रही है। ऐसे में अगर बुधवार की रात को बताए गए मुहूर्त में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाए तो उससे दोगुना फल प्राप्त होगा।

कुछ जगहो पर तो ऋषिकेश और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में 13 अगस्त को भी जन्माष्टमी मनाने की तैयारी है।वैष्णव मत के मुताबिक 12 अगस्त को जन्माष्टमी मनाना श्रेष्ठ है। इसलिए मथुरा और द्वारिका दोनों जगहों पर 12 अगस्त को ही जन्मोत्सव मनेगा। जगन्नाथपुरी में 11 अगस्त की रात को कृष्ण जन्म होगा। वहीं काशी और उज्जौन जैसे शहरों में भी 11 को ही जन्माष्टमी मनाई जाएगी।

जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त

बात करें शुभ मुहूर्त की तो अष्टमी तिथि 11 अगस्त मंगलवार सुबह 9:06 बजे से शुरू हो जाएगी। यह तिथि 12 अगस्त सुबह 11:16 मिनट तक रहेगी। वहीं दूसरी ओर वैष्णव जन्माष्टमी के लिए 12 अगस्त का शुभ मुहूर्त बताया जा रहा है जिसमें बुधवार के रात 12.05 बजे से 12.47 बजे तक बाल-गोपाल की पूजा-अर्चना की जा सकती है।

बता दें कि इस वर्ष कृष्ण जन्म की तिथि और नक्षत्र एक साथ नहीं मिल रहे हैं। 11 अगस्त 2020 को सूर्योदय के बाद ही अष्टमी तिथि शुरू होगी। इस दिन यह तिथि पूरे दिन और रात में रहेगी। भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। ऐसे में नक्षत्र और तिथि का यह संयोग इस बार एक दिन पर नहीं बन रहा है।

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण का बचपन व्यतीत हुआ था। ब्रज के मंदिरों में श्रीकृष्णजन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाए जाने के बावजूद कोरोना वायरस संकट के चलते इसे इस बार सार्वजनिक रूप नहीं दिया जाएगा। न ही इस अवसर पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान आदि मंदिरों में भक्तों को विशेष प्रसाद का वितरण किया जाएगा। नन्दगांव में सैकड़ों वर्षों से चली आ रही ‘खुशी के लड्डू’ बांटे जाने की परम्परा भी नहीं निभाई जाएगी। ब्रज के सभी मंदिरों में उत्सव की तैयारी शुरू हो गई है और मंदिरों को सजाया-संवारा जा रहा है। श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान में श्री कृष्ण जन्मस्थान पर जन्माष्टमी 12 अगस्त को मनाई जाएगी।

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