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एंग्जायटी से बाहर आने के लिए क्या करें? | What to do to get out of Anxiety?

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एंग्जायटी

एंग्जाइटी का नाम आपने कई बार सुना होगा लेकिन हम समझ नहीं पाते हैं कि आखिर ये हमारे अंदर कैसे प्रवेश कर जाता है। दरअसल हम सभी को कई बार घबराहट, डर या फिर बेचैनी जैसा फील होता है तो हम सभी इसे इग्नौर कर देते हैं जबकि यह व्यक्ति के अंदर एंग्जायटी या फिर चिंता के लक्षण को दर्शाता है। आज का समय टेंशन से भरा है ऐसे में कई लोग मानसिक रूप से चिंतित होते हैं, हालांकि कुछ लोगों को जरा सी बात के कारण भी चिंतित हो जाते हैं तो कुछ लोग ज्यादा समस्या होने पर भी नहीं होते।

सच तो यह है कि एंग्जायटी डिसऑर्डर उस व्यक्ति को पहले होता है जो खुद में नियंत्रण नहीं रख पाता है। जिसकी वजह से व्यक्ति के अंदर कुछ लक्षण जैसे कि दिल की धड़कन का तेज होना, शरीर में कंपन होना, पसीना आना, शरीर में झटके लगना आदि हो सकता है। किसी भी व्यक्ति के लिए चिंता यानि की एंग्जायटी से निपटना आसान नहीं होता है। किसी भी चीज से छुटकारा पाने के लिए सबसे पहले उसके बारे में विस्तृत रूप से जानना बेहद जरूरी है। तो आइए जानते हैं

मनोचिकित्सक से करें संपर्क

मानसिक समस्या ऐसी होती है कि इनपर ध्यान नहीं दिया जाए तो ये आपको कई तरह से परेशान करती है। इसलिए आवश्यकता है कि समय रहते अपने विकारों को समझें और एक अनुभवी मनोचिकित्सक से मिलें। Spark.live पर मौजूद नैदानिक मनोचिकित्सक डॉ हर्षल राउत आपकी मानसिक समस्या का इलाज करेंगे। डॉ हर्षल राउत मनोचिकित्सा, माइंडफुलनेस, और ध्यान के लिए अवसाद, चिंता, तनाव, मधुमेह और पीसीओएस की समस्या से निजात दिलाते हैं।

एंग्जायटी के लक्षण?

चिंता या एंग्जायटी के कारण शरीर में कई तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं जैसे- डर, घबराहट, बेचैनी, हार्ट रेट बढ़ना, पसीना आना और शरीर में कंपन, कमजोरी लगना, ध्यान लगाने में समस्या।

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एंग्जायटी से बाहर आने के उपाय

मनोचिकित्सकों की मानें तो कुछ टेक्नीक ऐसे हैं जिनकी मदद से आप अपने अवचेतन मन को शांत कर सकते हैं। जिसके बाद बड़ी समस्या भी आपको परेशान नहीं करेगी। यही नहीं मन में आने वाले विचारों को अगर नियत्रिंत कर लिया जाए तो मन को शांत किया जा सकता है। तो आइए जानते हैं कि एंग्जायटी से कैसे बाहर आ सकते हैं ?

डर की वजह जानें

सबसे पहले तो ये सोचे कि आखिर हम किसी भी बात की चिंता क्यों होती है? मन में ये सवाल हमेशा रहता है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो क्या होगा या फिर लोग क्या कहेंगे आदि। जिसकी वजह से हमारा मन अशांत हो जाता है ऐसे में आपको ये सोचना होगा कि मैं भले ही नर्वस हूं लेकिन मैं प्रिपेयर भी हूं। अगर आप अपने डर के बारे में बार-बार सोचेंगे तो हो सकता है कि आपको समस्या का समाधान भी मिल जाए।

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प्रकृति से जुड़ें

आज का समय टेक्नोलॉजी का है। लोगों का ज्यादातर समय या तो लैपटॉप पर व्यतीत होता है या फिर फोन पर। लोग खुद को प्रकृति से जोड़ने का काम नहीं कर पाते हैं। आप सोच कर देखिए कि कब आखिरी बार आप खुली हवा में बगीचे में एकांत में बैठे हो। आपको चिंता से राहत के लिए प्रकृति से जुड़ाव करना होगा। आप चाहे तो रोजाना पार्क में टहलने के लिए भी जा सकते हैं। ऐसा करने से आपको शांति का अनुभव होगा। अगर आपको दोस्तों और परिवार का साथ मिल जाए तो ये भी बहुत ही अच्छी बात है। एक-दूसरे से अपनी मन की बात करके भी चिंता से मुक्ति पाई जा सकती है।

पर्याप्त नींद, पोषण और व्यायाम है जरूरी

एंग्जाइटी से निजात पाने के लिए कम से कम 6 घंटे की पर्याप्त नींद लेनी चाहिए। अच्छे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए पूरी नींद लेना बहुत जरूरी है। साथ ही आपको खान-पान का भी पूरा ख्याल रखना चाहिए। वहीं बात करें खाने की तो इसमें फल, सब्जियां और साबुत अनाज को जरूर शामिल करें जो पोषण से भरपूर हों और आपके शरीर को ऊर्जा प्रदान करें।

थ्री मिनट ब्रीथिंग एक्सरसाइज

अगर आप एंग्जायटी से बाहर आना चाहते हैं, तो थ्री मिनट ब्रीथिंग स्पेस एक्सरसाइज जरूर करें। ऐसा करने से आप बेहद जल्द एंग्जायटी से बाहर आ जाएंगे। ऐसे में आपको इस बात पर ध्यान देना है कि आप सांस कैसे ले रहे हैं ? अब आप सांस शरीर के अन्य हिस्सों में ध्यान केंद्रित करें।

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