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सात्विक, तामसिक व राजसिक भोजन में क्या है अंतर, इसके फायदे व नुकसान? | Difference between Satvik, Tamasic and Rajasic food

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भोजन

हममें से कई लोग ऐसे हैं जो अपने भोजन को लेकर लापरवाही करते हैं, व उतना ध्यान नहीं दे पाते जितना देना चाहिए। ऐसे में अगर बात करें शास्त्रों व आयुर्वेद की तो प्राचीन काल से ही हम जिन आहार का सेवन करते हैं उन्हें तीन भागों में बांटा गया हैं सात्विक, राजसिक और तामसिक। हालांकि बेहद कम लोग हैं जो इसके बारे में विस्तृत रूप से जानते होंगे इसलिए आज हम इस लेख में आपको इन तीनों आहार के बारे में विस्तृत जानकारी देने जा रहे हैं व इससे होने वाले फायदों के बारे में भी बताने जा रहे हैं।

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सात्विक, राजसिक और तामसिक भोजन

राजसिक भोजन

राजसिक भोजन तो उसे कहा जाता था जो प्राचीन समय में राजा-महाराओं के घर में बनता था यानी घी, तेल-मसालों का अधिक इस्तेमाल होता है। इनके अलावा इसमें कड़वी और सूखी चीजें भी आती हैं। ऐसा खान-पान मनुष्य के दिमाग को उत्तेजित करते हैं।

तामसिक भोजन

वहीं बात करें तामसिक भोजन की तो इसमें मांस-मछली, लहसुन-प्याज आदि आते हैं। माना जाता है कि ऐसा भोजन करने से शरीर में सुस्ती आती है और व्यक्ति का किसी काम में मन नहीं लगता। उसका मन भटकने लगता है और मानसिक शांति और शारीरिक ऊर्जा बिल्कुल नहीं रहती।

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तामसिक भोजन के नुकसान

वैसे देखा जाए तो आयुर्वेद में तामसिक आहार को शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना गया है। इसके पीछे कई कारण हैं

पहला कारण तो ये है कि ऐसे भोजन बनाने में तेल मसाले का अधिक प्रयोग किया जाता है इसलिए इसका सेवन करने से लंबे समय तक पेट में जलन, एसिडिटी जैसी समस्याएं होती है। ऐसा भोजन आसानी से पचता भी नहीं है।

विशेषज्ञों की मानें तो सात्विक से जहां शरीर को ऊर्जा मिलती है, वहीं तामसिक आहार के सेवन से शरीर आलस व सुस्ती आता है।

वहीं ये भी कहा जाता है कि बासी और बहुत देर का बना बेस्वाद खाना भी तामसिक माना जाता है, इसके अलावा अधिक तेल मसाले वाला और मीठा भोजन करने से सेहत बिगड़ सकती है।

शराब जैसी नशीली चीज़ों को भी तामसिक प्रवृत्ति का माना जाता है, विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे भोजन के सेवन से गुस्सा और तनाव बढ़ जाता है।

सात्विक भोजन

आयुर्वेद और योग शास्त्र के अनुसार सात्विक भोजन को सबसे अच्छा और शुद्ध माना गया है। ये ज्यादातर साधु-संतो के साधारण भोजन में आता है, यह शरीर को पोषण देता है और दिमाग की शांति बनाए रखता है। ऐसाभोजन करने से कार्य करने की क्षमता का विकास होता है। आहार विशेषज्ञों की मानें तो यदि आप शुद्ध तरीके से खाना बनाकर 2-3 घंटे के अंदर खाते हैं, तो यह भी सात्विक भोजन है। इसके अलावा इसमें इन चीज़ों को शामिल किया जा सकता है- साबूत अनाज, फल और सब्जियां, फलों का जूस, दूध, घी, मक्खन, मेवे, शहद, बिना प्याज़-लहसुन वाली दाल-सब्ज़ियां आदि।

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सात्विक के फायदे

जैसा कि हमने अभी उपर बताया कि तामसिक भोजन से क्या-क्या नुकसान होते हैं तो वहीं सात्विक भोजन के कई सारे फायदे भी हैं। तो आइए जानते हैं

आहार विशेषज्ञों की मानें तो सात्विक कि एक खासियत यह होती है कि ये आपके पेट को आराम देता है और इसे खाने से आपको ताजगी का एहसास होता है, मन भी शांत रहता है, क्योंकि ऐसाआहार करने वालों को कभी भी पेट संबंधी बीमारी नहीं होती है।

आयुर्वेद की मानें तो सात्विक भोजन करने से मानसिक शांति मिलती है। इससे न सिर्फ शरीर की थकान दूर होती है, बल्कि व्यक्ति को शांति और खुशी का भी एहसास होता है।

सात्विक भोजन पूरी तरह से स्वस्थ और शुद्ध होता है इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा आहार करने से आपकी त्वचा और बाल खूबसूरत बनते हैं।

सात्विक आहार ज़्यादातर सिर्फ उबालकर ही बनाया जाता है या इसमें ताज़े फल और सब्ज़ियों का सेवन किया जाता है, इसलिए यह पौष्टिक तत्वों से भरपूर होते हैं।

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