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केंद्र सरकार की इस नई शिक्षा नीति में आखिर क्या है नया ? (What’s New in New Education Policy)

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नई शिक्षा नीति

29 जुलाई 2020 यानि की कल केंद्र सरकार ने एक फैसला लिया जिसके बाद से ही हर तरफ चर्चा होनी शुरू हो गई। हो भी क्यों न भला दरअसल ये फैसला छात्रों को लेकर था। एक तरफ जहां लॉकडाउन में सभी छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं वहीं दूसरी ओर सरकार की ओर से जब ये फैसला आया तो सबकी कौतुहलता बढ़ गई। दरअसल हम बात कर रहे हैं केंद्र सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति 2020 की जिसे कल मंजूरी दे दी गई। ऐसे में कई लोगों के मन में ये सवाल है कि आखिर इस नई शिक्षा नीति में क्या शामिल हैं ? और इसमें शिक्षा को लेकर क्या बदलाव किए गए हैं? ये नीति बदलाव छात्रों के भविष्य कितना प्रभावित करेगी ? ऐसे तमाम सवाल है जिसकी चर्चा लगातार हो रही है।

नई शिक्षा नीति में हुए ये अहम बदलाव

मानव संसाधन मंत्रालय का बदला नाम

दरअसल इस नीति के अंतर्गत सबसे पहला व अहम बदलाव तो ये हुआ कि अब मानव संसाधन मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय रख दिया गया हैं, कहा जा रहा हैं कि आजादी के बाद से ही इस विभाग का नाम शिक्षा मंत्रालय था लेकिन 1985 में राजीव गांधी ने इसे बदल कर मानव संसाधन मंत्रालय कर दिया गया था, इसके अलावा अब इस विभाग के मुखिया को शिक्षित मंत्री के नाम से जाना जाएगा।

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बदल गया 10+2 वाला शिक्षा फॉर्मेट

अभी तक जो अब तक शिक्षा नीति में 10+2 का फॉर्मेट था लेकिन नई शिक्षा नीति में 5+3+3+4 फॉर्मेट को लाया गया हैं, इसके अनुसार स्कूल के शुरुआती 5 सालों को फाउंडेशन स्टेज बनाया गया हैं जिसमें शुरू के तीन साल प्री-प्राइमरी और उसके बाद कक्षा 1 और कक्षा 2 इस स्टेज में शामिल होंगे। उसके बाद अगले तीन सालों को कक्षा 3 से कक्षा 5 की तैयारी वाले चरण में विभाजित किया गया हैं। फिर कक्षा 6 से कक्षा 8 तक की पढ़ाई को मध्य चरण में बांटा गया हैं और उसके बाद रखा गया कक्षा 9 से कक्षा 12 तक की शिक्षा को, जिसे माध्यमिक चरण का नाम दिया गया हैं। ऐसे में अब छात्रों के लिए एक अच्छी बात ये हुई कि स्कूलों में ही उन्हें कला, वाणिज्य और विज्ञान स्ट्रीम लेना उनकी इच्छा पर निर्भर रहेगा और कोई भी उन्हें इस बारे में बाध्य नहीं कर सकता।

उच्च शिक्षा में भी हुए बदलाव

इस नीति के अंतर्गत एक और बदलाव ये हुआ जिसमें बताया कि अब उच्च शिक्षा को लेकर भी मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम में पहले साल के बाद सर्टिफिकेट, दूसरे साल के बाद डिप्लोमा और तीन या चार साल के बाद डिग्री मिलेगी। PhD को लेकर ये कहा गया कि इसमें 4 साल के डिग्री प्रोग्राम के बाद M.A और उसके बाद बिना M.Phil के PhD की जा सकती हैं।

यही नहीं इसके अलावा विद्यार्थियों की सुविधा के लिए क्षेत्रीय भाषा में ई-कोर्स शुरू किए जाएंगे। जिसकी वजह से देश में वर्चुअल लैब्स को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा, इस समय देश मे 45000 कॉलेज हैं उनके लिए एक नेशनल एजुकेशनल साइंटिफिक फोरम भी शुरू किया जाएगा। वहीं इन सबके अलावा आने वाले समय मे ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली पर अधिक जोर दिया जाएगा, अभी डीम्ड यूनिवर्सिटी, सेंट्रल यूनिवर्सिटी और स्टैण्डअलोन कॉलेज के नियम अलग-अलग हैं लेकिन नई शिक्षा नीति में सबके लिए नियम एक जैसे रहेंगे।

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इस नई शिक्षा नीति में और क्या है खास ?

इन सबके अलावा नई शिक्षा नीति में कुछ और भी बदलाव किए गए, जो छात्रों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा।

इस नई शिक्षा नीति में बताया गया है पांचवी कक्षा तक सभी छात्रों की पढ़ाई स्थानीय भाषा में होगी।

वहीं वोकेशनल कोर्स की शुरुआत छठी कक्षा के बाद होगी।

कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेंस एग्जाम लिए जाएंगे।

मेडिकल और लीगल कॉलेज के अलावा सभी कॉलेज का संचालन सिंगल रेग्युलेटर के द्वारा किया जाएगा।

सभी शिक्षण संस्थानों के लिए समान नियम रहेंगे।

नई शिक्षा नीति को लेकर या फिर अपने भविष्य को लेकर आप भी चिंतित है तो हमारे नेटवर्क पर मौजूद करियर काउंसलर आपकी मदद कर सकते हैं। निकिता कुक्कड़ आपके लिए एक बेहतरीन करियर काउंसलर साबित हो सकती हैं।

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