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सौरभ नंदा बताएँगे कौन सा करियर आपके लिए होगा बेहतर ?

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करियर काउंसलर

जमाना बदल रहा है लेकिन अफसोस तो इस बात का है कि कुछ लोग अभी अपने पुराने तरीकों को ही अपनाते चले आ रहे हैं और आज के इस आधुनिक युग में कई सारी सुविधाएं होने के बावजूद भी लोगों को करियर संबंधी फैसले लेने में समस्याएं आती हैं। आज करियर काउंसलिंग या करियर कोचिंग जैसी बातों पर ध्यान नहीं देते हैं तो यह आपकी भूल है क्योंकि इसे गंभीरता से लेने से आपके बच्चे का भविष्य निखरेगा। क्योंकि करियर काउंसलिंग से आपको उन नई संभावनाओं के बारे में पता चलता है।

अगर यह पता चल जाए कि आपकी क्षमता व योग्यता क्या है और उसके अनुसार कोई सुझाव दे कि आपको क्या करना चाहिए, तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। आज हमने मशहूर करियर काउंसलर सौरभ नंदा के साथ साक्षात्कार किया जिसमें उन्होने हमारे द्वारा पूछे गए कई सवालों का जवाब दिया। आप इस साक्षात्कार को पढ़ने के बाद यह जरूर समझ जाएंगे कि एक छात्र के जीवन में करियर काउंसलिंग की महत्वत्ता क्या होती है? और जो लोग अपने भविष्य के निर्माण के लिए करियर काउंसलर से सलाह नहीं लेते हैं वो कितनी बड़ी भूल करते हैं ।

आइए एक नजर डालते हैं मशहूर करियर काउंसलर सौरभ नंदा के साथ हुए साक्षात्कार पर…

प्रश्न : भविष्य निर्माण में करियर काउंसलर की भूमिका अहम क्यों है ?

उत्तर: सौरभ ने इसे बेहद ही सरल अंदाज में समझाते हुए कहा कि आज तेजी से बदल रही तकनीक की वजह से पिछले दशक से हमारे करियर में भी काफी बदलाव आ रहे हैं। पहले जो नौकरियां मौजूद थीं वो अब नहीं हैं। किसी भी करियर विकल्प की परिभाषा जो आमतौर पर इंजीनियर, डॉक्टर, वकील या ज्योतिषी आदि हुआ करती थी वो अब लगातार बदल रही है। मैं इसे कैरियर और शिक्षा के विकल्पों पर अस्थिर, अनिश्चित, जटिल और अस्पष्ट प्रभाव कहना ज्यादा पसंद करता हूं। इसकी वजह कोरोना महासंकट है। ऐसे में इस संकट के समय में आप क्या कर सकते हैं? आप विशेषज्ञों से मार्गदर्शन करने की सोचेंगे, या फिर कोई नौकरी खोजने की सोच रहे होंगे या फिर विश्वविद्यालयों के नए पाठ्यक्रमों, छात्रवृत्ति या अन्य चीजों के बारे में सर्च करेंगे।

यह समझने के लिए अपने आप को समझना जरूरी ताकि आप समझ सके आपके लिए कौन से अवसर बेहतर हैं? या फिर आप किसी अनुभवी काउंसलर की मदद ले सकते हैं जो आपको कुछ ही घंटों में आपके लिए सबसे बेहतर करियर की राह बताएगा। करियर काउंसलर शिक्षक होते हैं और मनोविज्ञान के प्रैक्टिशनर भी होते हैं, जो जानते हैं कि हमारे आस-पास होने वाली हर क्षेत्र का विकास कितना हुआ है और फिर उस ज्ञान का उपयोग करके आपको एक बेहतरीन भविष्य का मार्गदर्शन कर सकते हैं। सभी माता-पिता अपने बच्चों के लिए खुशी चाहते हैं, और वे ऐसा करने के लिए अपनी हर क्षमता लगा देते हैं। इसलिए जब भी कभी करियर से सम्बंधित फैसलों की बात आये, तो अपने पड़ोसी या रिश्तेदार की बजाय एक बेहतर और पेशेवर करियर काउंसलर से सलाह लें।

प्रश्न : छात्रों के भविष्य निर्माण के दौरान किस मोड़ पर पड़ती है करियर काउंसलर की सबसे ज्यादा आवश्यकता ?

उत्तर: सौरभ नंदा कहते हैं यह बहुत ही अच्छा सवाल है। मनोविज्ञान के अनुसार, एक बच्चे को अगर अच्छी परवरिश मिलती है, तो वह 14-15 साल की उम्र तक अपनी स्वाभाविक योग्यता का विकास कर लेता है। फिर करियर के ज्यादातर निर्णय उसकी रूचि, व्यक्तित्व और प्रयासों पर निर्भर करते हैं। इसलिए मेरा मानना यह है कि छात्र उस उम्र में ही मार्गदर्शन प्राप्त करने के बारे में सोचना शुरू कर दें यानी कि कक्षा 9 या 10 से ही।

सौरभ के अनुसार इस प्रश्न का और उत्तर हो सकता है जिसमें वो बताते हैं कि जब किसी छात्र व माता-पिता को अब तक के करियर के फैसलों के बारे में संदेह महसूस होना शुरू हो जाता है वहीं उनके करियर मार्गदर्शन का सही वक्त होता है। यह 10 वीं से पहले, 11 वीं के बीच, 12 वीं के अंत या फिर 12 वीं के बाद के परिणाम के दौरान हो सकता है। जब आपके मन में संदेह है, तो इसका मतलब है कि मार्गदर्शन प्राप्त करने के आपके सभी स्रोत जैसे दोस्तों, परिवार, शिक्षक, आदि अब आपके काम नहीं आ रहे हैं तब आपको एक पेशेवर काउंसलर की आवश्यकता होती है।

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प्रश्न : करियर की प्लानिंग करने में आप छात्रों की किस स्तर पर मदद करते हैं ?

उत्तर: इस सवाल का जवाब सौरभ नंदा देते हुए कहते हैं ” हर स्तर पर!” भारत में, आमतौर पर मार्गदर्शन 11 वीं से पहले शुरू होता है जब करियर का पहला बड़ा फैसला लेना होता है कि कौन सा स्ट्रीम चुनें। इसलिए सौरभ वैज्ञानिक आकलन के बाद सही स्ट्रीम चुनने में उनकी मदद करते हैं। फिर छात्र अपने अवसरों को बढ़ाने के लिए स्कूल में अपने अगले 2 वर्षों का उपयोग कैसे करते हैं। इसलिए सौरभ छात्रों और माता-पिता को एक ब्लूप्रिंट बनाने में मदद करते हैं, जहां वे यह तय करते हैं कि हमें कौन से कॉलेज के पाठ्यक्रमों पर केन्द्रित करना चाहिए, कौन से विश्वविद्यालय, कौन सी प्रवेश-परीक्षा, बैकअप विकल्प, भारत और विदेश में अध्ययन के विकल्प, सह-पाठयक्रम गतिविधियां, परियोजनाएं, प्रतियोगिताएं आदि। फिर 12वीं में सौरभ छात्रों को उनकी रूपरेखा बनाने और भारत तथा विदेशों में विश्वविद्यालयों के लिए आवेदन करने में मदद करते हैं।

सौरभ नंदा उन्हें आवेदन पत्र भरने में भी मदद करते हैं। 12वीं के बाद कौन सा कोर्स चुनना है, वीज़ा/वित्त परामर्श जैसी सेवाएं हैं जो वे खुद प्रदान करते हैं। फिर कॉलेज के दौरान यही प्रक्रिया एक बार फिर से दोहराई जाती है। कुछ ऐसे भी सवाल होते हैं जिनका उत्तर सौरभ खुद देते हैं – जैसे, एक मजबूत प्रोफ़ाइल कैसे बनाएं, विश्वविद्यालय, पाठ्यक्रम, छात्रवृत्ति चयन, किस विशेषज्ञता के लिए जाना चाहिए, कौन सी प्रवेश परीक्षा या फेलोशिप के लिए आगे बढ़ें; अंडरग्रेजुएशन के बाद पोस्टग्रेजुएशन में दोबारा से इसी प्रक्रिया को दोहराया जाता है। फिर नौकरी पाने के बाद, अपने लिए एक बेहतर कैरियर-मार्ग कैसे बनाया जाए यह भी एक बड़ा सवाल है जिसका भी सौरभ देते हैं और यह प्रक्रिया चलती रहती है।

प्रश्न : क्या आपके सलाह से छात्रों ने वो मुकाम पाया है जिसकी काबिलियत उनमें थीं ?

उत्तर: इस सवाल पर सौरभ काफी उत्सुकता से कहते हैं, ‘पूर्ण रूप से।’ सौरभ बताते हैं कि वो अभी भी सोशल मीडिया के माध्यम से अपने बहुत से छात्रों के संपर्क में हैं और जो आगे भी मार्गदर्शन के लिए मेरे पास आते रहते हैं। सौरभ के अनुसार उनके बहुत से छात्र दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों और उच्च भुगतान वाले करियर तक पहुँच चुके हैं। उनके तमाम छात्र अपने खुद के उद्यम भी बना रहे हैं।सौरभ यह भी कहते हैं कि उनके कई ऐसे पुराने क्लाइंट्स हैं जिन्होंने उनके मार्गदर्शन में अपना करियर बदला, और अब वो अपने नए चुने हुए राह में बहुत अच्छा कर रहे हैं। इन सभी में सामान्य बात यह है कि वे सभी खुश हैं! वे अपने फैसलों से खुश हैं, उन्हीने खुद को बेहतर तरीके से समझा और खुद को एक पेशेवर और बेहतर इंसान साबित करके दिखाया।

हर कोई अलग है, खास है यह तो हम सभी जानते हैं लेकिन फिर भी हम उन्हें एक ही करियर विकल्पों के माध्यम से आगे बढ़ाते रहते हैं। यह हमारी शिक्षा प्रणालियों की सबसे विडंबनापूर्ण स्थिति है। सौरभ ने कई छात्रों को उनकी विशेषता पहचानने में मदद की है जिससे वो अपना बेहतर भविष्य बना सकें। यदि आप ये समझ जाते हैं कि आप कौन हैं, तो निश्चित रूप से आप अपने निर्णय लेने के लिए सशक्त हैं, अन्यथा आप भेड़ चाल में फंसे रह जाते हैं।

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प्रश्न : आप छात्रों के अंदर छिपे गुणों कैसे पहचानते हैं ?

उत्तर: सौरभ इसका बहुत ही संक्षिप्त में जवाब देते हैं – विज्ञान और अनुभव। सौरभ बताते हैं, मैं पहले मूल्यांकन करता हूं ताकि छात्र पहले खुद को समझें और फिर मैं उसका साक्षात्कार करता हूँ ताकि मैं उन सभी चीजों की व्याख्या कर सकूं जो वे नहीं समझ पाए हैं। यह अनुभव भारत और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हजारों छात्रों, माता-पिता और पेशेवरों के साथ बातचीत करने के बाद आता है। अगर मनोविज्ञान पूरी तरह से मनुष्यों और उनकी पसंद को समझ सकता है, तो हम काफी ज्यादा तरक्की कर चुके होते। सौरभ ने इसे एक उदाहरण देते हुए समझाया, जैसे – एक रक्त परीक्षण आपको अपने रक्त की संरचना के बारे में बता सकता है, लेकिन आपको यह देखने के लिए एक अनुभवी चिकित्सक की आवश्यकता है जो रिपोर्ट का सही से अवलोकन कर सके और उसका अर्थ बता सके।

करियर काउंसलर के साथ भी कुछ ऐसा ही होता है। सौरभ नंदा कहते हैं कि मैं आपके साइकोमेट्रिक परिणाम देख सकता हूं और फिर अपने अनुभव का उपयोग करके आपको बता सकता हूं कि आपके लिए क्या अच्छा है या क्या नहीं। मैं उन सभी छोटी-छोटी चीजों को देख सकता हूं जो छात्र कह रहे हैं या कर रहे हैं और देखता हूँ कि उस छात्र के लिए किस तरह का करियर अच्छा होगा।

प्रश्न : आपके सलाह से जिन छात्रों का भविष्य संवरा है उनके बारे में बताएं ?

उत्तर: इसपर सौरभ बीते वर्षों में उनके पास आये कुछ छात्रों के उदाहरण देते हुए बताते है जिनमे एक स्मार्ट आईआईटीयन शामिल था जो यह नहीं समझ पा रहा था कि उसे अपने साक्षात्कार की तैयारी के लिए क्या करना चाहिए। जब उसे अपने ड्रीम कॉलेज IIMA से फोन आया तब वो मेरे मार्गदर्शन के साथ, अगले 2 महीनों में, अपने उत्तरों के साथ पूरी तरह से तैयार हो चुका था। आपको यह जानकर काफी हैरान होगी कि IIMA में उसके साक्षात्कार में पूछे गए 10 सवालों में से 6 वही प्रश्न थे, जिनके बारे में मैंने उनसे तैयारी करने के लिए कहा था।

इसके अलावा सौरभ 11वीं कक्षा के एक छात्र का अभी उदाहरण देते हुए बताते हैं कि वह अच्छा छात्र क्रिकेटर बनना चाहता है और काफी अच्छा खेलता भी था। चूँकि उसके माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं, इसलिए निश्चित रूप से छात्र पर विज्ञान विषय चुनने का दबाव था जबकि वो अपने माता-पिता से कॉमर्स विषय से आगे बढ़ने की बात करता था।

उसके माता पिता भी भी उसके इस फैसले से काफी हैरान थे मगर मेरे मार्गदर्शन के बाद, अब उसने कॉमर्स लिया है, और अब वो दिल्ली की यूनिवर्सिटी क्रिकेट टीम में आने के लिए अच्छी तैयारी करने जा रहा हैं। उसके बाद वह अपने एमबीए में टैलेंट मैनेजमेंट के साथ हॉस्पिटल मैनेजमेंट करने जा रहा है ताकि अगर वह क्रिकेट में असफल हो जाए, तो वह अपने माता-पिता की मदद कर सके और अपने नर्सिंग होम का प्रबंधन कर सके। या फिर वह एक प्रबंधक के रूप में क्रिकेटरों का प्रतिनिधित्व करना शुरू कर सकता है। ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ पर सौरभ नंदा के सफल मार्गदर्शन से छात्रों को लाभ मिला है और आज की तारीख में उनमे से कई ने अपना सफल करियर बना लिया है और कई प्रगति पर हैं। सौरभ बताते हैं कि करियर परामर्श छात्र, उसके परिवार तथा उसकी आकांक्षाओं को समझने से शुरू होता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि छात्र स्मार्ट है या प्रतिभाशाली है या फिर नहीं। प्रत्येक छात्र अपने आप में खास है और उसके लिए एक अलग कैरियर मार्ग मौजूद है।

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प्रश्न : अक्सर छात्र अपने करियर को चुनते समय क्या गलतियां कर देते हैं?

उत्तर: सौरभ बताते हैं कि शिक्षा के विकल्प चुनने के लिए आमतौर पर छात्र देखा-देखी वाली मानसिकता को ज्यादा तवज्जो देते हैं या फिर विश्वविद्यालयों या कॉलेजों पर समझौता भी कर लेते हैं की ये नजदीक है या फिर सस्ता है या यहाँ पर मेरे ज्यादातर दोस्त हैं तो यहीं पर एडमिशन लेना है, योजना की कमी, और सबसे महत्वपूर्ण बात कि स्वयं को समझने में विफलता जैसी कुछ गलतियां हैं कर बैठते हैं। सौरभ आगे बताते हैं कि ये गलतियाँ बहुत स्वाभाविक हैं क्योंकि हमारे छात्रों को परिवार, स्कूल और दोस्तों के दबाव का सामना करना पड़ता है। छात्र इस नतीजे पर पहुँच जाते हैं कि “अगर उसने दूसरों के लिए काम किया है, तो यह विकल्प मेरे लिए भी काम करेगा।”

सौरभ नंदा जो कि एक बेहतरीन और सफल करियर काउंसलर हैं उन्होंने अपने एक दोस्त का वाकया साझा करते हुए बताया कि उसने ने बॉलीवुड में अपने सपनों को आगे बढ़ाने के लिए 7 साल भारतीय सेना में सेवा देने के बाद नौकरी छोड़ दी। वह फिल्म “छीछोरे” में सहायक अभिनेता थे। उन्होंने 13 साल की उम्र से सेना के लिए पढ़ाई की थी। इससे आप सोच सकते हैं कि यह कितना मुश्किल हो सकता है। बहुत सारे भारतीय युवा, छात्र गलत करियर में फंस जाते हैं और उनमें से बहुत से लोगों के जीवन में बाद में उन करियर से बाहर आने की हिम्मत नहीं होती है। वही गलतियाँ आप न करें।

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