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ऑनलाइन दुर्गा सप्तशती पाठ करने की क्या है सही विधि | Right way to do Online Durga Saptashati path

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दुर्गा सप्तशती

नवरात्रि की शुरूआत हो चुकी है ऐसे में हर तरफ माता के भक्तजन मां को खुश करने में लगने हुए है। हालांकि इस बार कोरोना के कारण पंडालों की रौनक कम हो गई है पर भक्ति भाव नहीं। दुर्गा सप्तशती के बारे में तो आप सभी जानते ही होंगे नवरात्रि के दौरान इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मान्यता है कि नवरात्रि के दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ चमत्कारिक लाभ देने वाला माना गया है।

इतना ही नहीं कहते हैं कि अगर नवरात्रि के दिनों में नियम और पूरी निष्ठा के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से मनचाही मुराद भी पूरी हो जाती है। इसलिए लोग विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। पर समस्या ये है कि कोरोना काल में लोग बाहर से पंडित को बुलाने में डर रहे हैं।

आपकी इस समस्या का समाधान भी Spark.live लेकर आए है, यहां मौजूद पंडित व ज्योतिष डॉ. विजय द्विवेदी ऑनलाइन पूजा कराने में माहिर है। डॉ. विजय द्विवेदी इस नए युग के ज्योतिषी हैं, जो आधुनिक चीजों को साथ लेकर अपने अनुभव के जरिए लोगों की मदद करते हैं। पंडित जी को ज्योतिष और मनोगत विज्ञान के बारे में बहुत ज्ञान होने के कारण, वह जटिल से जटिल समस्याओं का भी सटीक समाधान दे सकते हैं।

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ऑनलाइन दुर्गा सप्तशती पाठ करने की विधि | Online ways of Durga Saptashati path

सबसे पहले तो ये बता दें कि दुर्गासप्तशती पाठ नवरात्रि में केवल अष्टमी तिथि के दिन पूर्ण करके भी आप मां की कृपा के पात्र बन सकता हैं। दुर्गा सप्तशती का पाठ 13 अध्यायों में बंटा हुआ है। इस पूरे पाठ में मां दुर्गा के अवतरण और राक्षसो के संहार के बारे में वृतांत है। एक दिन में दुर्गा सप्तशती का पूर्ण पाठ करना हो तो निम्न विधि से किया जाना चाहिए-
  1. प्रोक्षण
  2. आचमन
  3. संकल्प
  4. उत्कीलन
  5. शापोद्धार
  6. कवच
  7. अर्गलास्त्रोत
  8. कीलक
  9. सप्तशती के 13 अध्यायों का पाठ
  10. मूर्ति रहस्य
  11. सिद्ध कुंजीका स्त्रोत
  12. क्षमा प्रार्थना

सबसे पहले तो आपको ये बता दें कि अगर एक दिन में दुर्गा सप्तशती का संपूर्ण पाठ नहीं संभव हो पाए तो ऐसे में पहले दिन केवल मध्यम चरित्र का पाठ करना चाहिए। फिर अगले दिन बचे हुए दो चरित्रों का पाठ करना चाहिए। ऑनलाइन दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के लिए भी यही प्रक्रिया फॉलोव की जाती है।

वैसे एक और तरीका है जिसमें ये किया जा सकता है कि पहले दिन प्रथम अध्याय का एक पाठ, दूसरे दिन द्विती अध्याय का दो आवृति पाठ और तृतीय अध्याय का पाठ, तीसरे दिन चौथे अध्याय का एक आवृति पाठ, चौथे दिन पंचम, षष्ठ, सप्तम और अष्टम अध्याय का पाठ, पांचवें दिन नवम और दशम अध्याय का पाठ, छठे दिन ग्यारहवां अध्याय का पाठ, सातवें दिन 12वें और 13वें अध्याय का पाठ। इसके बाद एक आवृति पाठ दुर्गा सप्तशती की करनी चाहिए।

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हालांकि इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से पहले और बाद में नवारण मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाये विच्चे” का पाठ करना आवश्यक माना गया है। इस मंत्र में सरस्वती, लक्ष्मी और काली के बीज मंत्र का संग्रह है। दुर्गा सप्तशती पाठ के बाद क्षमापन स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए ताकि नवरात्रि में हुए किसी भी प्रकार के अपराध से छुटकारा मिल जाए। ऑनलाइन दुर्गा सप्तशती पाठ में भी इन सभी बातों का ध्यान रखकर ही पूजा कराया जाएगा।

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