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पोषण और मानसिक स्वास्थ्य|Nutrition and Mental health

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पोषण और मानसिक स्वास्थ्य

हम सभी ये तो जानते हैं कि पौष्टिक आहार हमारे स्वस्थ शरीर के विकास के लिए कितना आवश्यक है लेकिन क्या आपको पता है कि पोषण तत्व मानसिक स्वास्थ के लिए भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। आज हम विशेष रूप से बात करेंगे पोषण और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में। जानेंगे कि आखिर इनका संबंध क्या है ? क्यों मानसिक स्वास्थ के लिए पोषण जरूरी है। पोषक तत्व हमारे जीवन में शारीरिक व मानसिक दोनों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए अगर हम अपने आहार में पोषण तत्व को शामिल करते हैं तो हम स्वस्थ रहेंगे।

पोषण वो होता है जिसकी आवश्यकता शरीर को होती है जिससे ऊर्जा की मदद से दैनिक गतिविधियों को किया जा सके। भारत में आहार का सांस्कृति महत्व भी है, अनेक उत्सव व त्योहार होते हैं जब स्वादिष्ट और विशिष्ट आहार बनाए जाते हैं इसके अलावा कुछ ऐसे भी त्योहार होते हैं जिसमें उपवास यानि की व्रत रखने की परंपरा होती है। अब तक आप ये तो समझ ही गए होंगे कि मानव अस्तित्व के लिए आहार कितना महत्वपूर्ण है।

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मानव के लिए जरूरी पोषण

जैसा कि आपको बताते चलें कि हम सभी मनुष्यों को स्वस्थ शारीरिक विकास के लिए मिश्रित पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है जैसे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, वसा, विटामिन्स और खनिज और ये सभी हम अपने रोज में लिए गए आहार से प्राप्त करते रहते हैं। इन सभी पोषक तत्वों का हमारे शरीर में अलग अलग काम होता है जैसे कि प्रोटीन का काम हमारे मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखना है, वहीं इसके साथ ही साथ त्वचा और रक्त संबंधी समस्याओं मे भी मदद करता है। बात करें कार्बोहाइड्रेट्स और वसा की तो यह शरीर को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करते हैं।

इसके अलावा विटामिन और खनिज हर किसी को थोड़ी मात्रा में ही चाहिए होती है जो कि शरीर में विशिष्ट अंगों के सही काम करने और हड्डी के ऊतक व रक्त निर्माण में सहायक होते हैं। कुछ खनिज जैसे लौह, कैल्शियम, आयोडीन और जस्ता और विटामिन जैसे ए, बी से हमें शरीर में संक्रमण से बचने में मदद करते है। विटामिन सी से हमें लौह को अवशोषित करने में और विटामिन डी हमें कैल्शियम को अवशोषित करने में मदद करता है जो कि हमारी हड्डियों और पेशियों के निर्माण में मदद करता है।

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पोषण मानसिक स्वास्थ्य को कैसे करता है प्रभावित ?

शरीर में पोषण की महत्तवता को न सिर्फ डाइटिशियन ने बताया है बल्कि शास्त्रों में भी बताया गया है कहा गया है कि पोषण की कमी का शक्तिशाली संबंध शरीर से और मस्तिष्क से है। हमारे शरीर में 20 प्रतिशत मस्तिष्क आवश्यक फैटी एसिड्स और अमीनो एसिड्स से बना होता है जैसे ओमेगा 3 और 6। हालांकि शरीर इसे खुद से बना नहीं सकता क्योंकि इसे आहार से ही प्राप्त किया जाता है।

अब सवाल यह उठता है कि आखिर आहार मस्तिष्क पर कैसे असर करता है, तो इसके बारे में एक अध्ययन में पता चला कि हम जो आहार हर रोज लेते हैं उसमें अत्यधिक शक्कर, कैलोरी और पोषक तत्वों की कमी वाले आहार के कारण उनमें थकान, नींद नही आना, नाखुशी, दुख, अवसाद, निराशा, तनाव और परेशानी का कारण बनता है।

ऐसा इसलिए होता है कि क्योंकि आहार और उसके घटक जैसे शक्कर, इसमें कोई पोषक पदार्थ नही होते है जिसकी आवश्यकता शारीरिक पोषण के लिये होती है और ये फ्री रेडिकल्स बनाते हैं जिनके कारण शरीर को क्षति पहुंच सकती है। ये फ्री रेडिकल्स मस्तिष्क की कोशिकाओं को प्रभावित कर सकते हैं और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों का कारण भी बनते हैं।

मानसिक स्वास्थ को नियंत्रित करने वाले पोषण आहार ?

विशेषज्ञों की मानें तो हमारे शरीर में बहुत सारे न्यूरोट्रांसमीटर होते हैं, जिनमें से सेरोटोनिन भी एक न्यूरोट्रांसमीटर ही है, जो कि प्रचुर मात्रा में जठरांत्र पथ में उत्पादित होता है। यह निद्रा, भूख, मनोदशा व दर्द के निषेध के लिए जिम्मेदार होता है। वहीं जिंक, कैलशियम, क्रोमियम, फोलेट या फोलिकएसिड/विटामिन बी9, लौह/आयरन, मैग्नीशियम, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन बी6, विटामिन बी12 व विटामिन डी मानव के मानसिक स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार एवं आवश्यक होते हैं। इसलिए अपने आहार में इन तत्वों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है।

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हालांकि यह भी सच है कि इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारी मनोदशाओं, भावनाओं व विचारों को समझने के लिए मानसिक स्वास्थ को संतुलित रखना बेहद कठिन काम है। इसके लिए आपको किसी न्यूट्रिशनल साइकियेट्री से संपर्क करना पड़ सकता है जो आपको वैज्ञानिक रूप से आहाररूपी उपचार भी प्रदान करता है। इसलिए व्यक्ति को अपनी मनोदशाओं, भावनाओं, विचारों व मानसिक स्वास्थ्य के अनुरूप अपना आहार-विहार रखना चाहिए ताकि वह पूर्ण रूप से एक स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सके।

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संंदर्भ लेख : आहार और मानसिक स्वास्थ्य

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