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तनाव, चिंता व क्रोध से निपटने के लिए बेहद ही कारगर है ब्रीदिंग एक्सरसाइज

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Breathing Exercises To Deal With Stress

ये दौर कोविड-19 का चल रहा है और धीरे धीरे सरकार भी लॉकडाउन में रियायतें दे रही है। ऐसे में अब हमें घर से बाहर आवश्यकता पड़ने पर तो निकलना ही होगा और खास बात तो यह है कि इसके साथ ही साथ हमें इस कोरोना काल में जीने की आदत भी डालनी होगी। ऐसे में खुद को कोरोना वायरस से सुरक्षित रहने के लिए अभी से ही तैयार होना होगा। इस कोरोना काल में जीने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है खुद को अंदर से मजबूत बनाना जो संभव है एक्सरसाइज से।

जैसा कि आप सभी जानते ही हैं कि इस वायरस में सामान्य फ्लू जैसे लक्षण नजर आ रहे हैं जिसकी वजह से लोगों के समझ से परे हो जा रहा है कि उन्हें सामान्य फ्लू (सर्दी-ज़ुकाम, बुखार, छींक) है या कोरोना हुआ है। वहीं, बात करें अधिक उम्र वाले लोगों की तो डायबिटीज और अस्थमा या हायपरटेंशन से पीड़ित लोगों के लिए कोरोना बेहद बड़ा खतरा है। इसलिए आज हम आपको ब्रीदिंग एक्सरसाइज के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि आपको कोरोना काल में जीने के लिए काफी मदद करेगा। इस महज एक एक्सरसाइज के शरीर को कई सारे फायदे होते हैं।

हम ये तो जानते ही हैं कि पचास से ज्यादा उम्र वाले लोगों में अक्सर ही एनर्जी लेवल कम होने लगता है जिसके कारण उनको कमजोरी व थकान महसूस होने लगता है। यही कारण है कि उम्र बढ़ने के साथ ही साथ लोगों को एक्सरसाइज करने की सलाह देती है पर इस उम्र के लोग एक्सरसाइज करने में कतराते हैं।

हालांकि इसके पीछे तमाम लोगों के अन्य कई कारण होते हैं जैसे बिजी शेड्यूल का होना या फिर समय का अभाव होना। लेकिन इसकी वजह से कई सारी बीमारियां इनके शरीर में घर कर जाती है। ऐसे में अगर ये लोग थोड़ा सा वक्त निकालकर ब्रीदिंग एक्सरसाइज करते हैं तो ये अपनी उम्र बढ़ने के साथ ही साथ हेल्दी भी रह सकते हैं। ब्रीदिंग एक्सरसाइज न सिर्फ उम्रदराज लोगों के लिए हैं बल्कि युवाओं के लिए भी काफी फायदेमंद साबित होता है।

ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने की प्रक्रिया

किसी भी एक्सरसाइज को शुरू करने से पहले आपको उसकी सही तरीके का ज्ञान होता अति आवश्यक है। इस एक्सरसाइज को करने के लिए आपको सबसे पहले ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। इसके बाद आप इसकी शुरुआत आप कई बार सांस लेने से कर सकते हैं।

वहीं इस बात का अवश्य रखें कि तब तक सांस लें, जब तक आपको ऐसा लगे कि आपके फेफड़े पूरी तरह से भर गए हैं। यही नहीं, ऐसा महसूस हो जैसे आपके पेट में एक गुब्बारे की तरह हवा भर गई है। इसके बाद अब आपको चार गिनने तक आपको सांस रोककर रखना है फिर उसके बाद आठ गिनने पर सांस को बाहर निकाले दें। जब आप चिंता या तनाव महसूस करें और शरीर में ऊर्जा का संचार करना चाहते हैं, आप चाहें तो इस प्रक्रिया को 12 बार यानि की तीन सेट में कर सकते हैं।

इस ब्रीदिंग तकनीक को आप दिन में कम से कम दो बार करें। इसे करते समय यह जरूर ध्यान रखें कि आप इसे बार-बार नहीं कर सकते और पहली बार में एक बार में चार से ज्यादा सांस न लें। एक माह के बाद अगर आपको लग रहा है कि जब आप थोड़ा हल्का महसूस कर रहे हैं तो इसको करते रहें।

हालांकि इस एक्सरसाइज को करने से शुरूआत में थोड़ी सी समस्या जरूर उत्पन्न होगी लेकिन कुछ समय बाद आपको इसका अभ्यास हो जाएगा। सांस लेने की इन तकनीकों में जब आप सांस लेते हैं, तो इसका मतलब है कि आप अपने जीवन शक्ति और सेहत अपने अंदर ले जा रहे हैं।

जब आप सांस रोकते हैं, तो यह अच्छी सेहत और एनर्जी का प्रतीक है, जबकि सांस को बाहर छोड़ने से आप अपनी हर पीड़ा, थकान, चिंता और तनाव को अपने शरीर से बाहर निकाल देंगे। यानी पूरे शरीर के स्वास्थ्य के लिए सांस की यह तकनीकें बहुत ही लाभदायक हैं। इसलिए ये एक्सरसाइज आपके सभी तरह की चिंता, थकान व तनाव को दूर करने के साथ ही साथ मानसिक रूप से शांति भी प्रदान करता है।

अगर आप चाहे तो इसके लिए मनोवैज्ञानिक विनीता एम. हरिया से मदद ले सकते हैं, ये एक प्रमाणित मनोवैज्ञानिक है। इनके बारे में विस्तृत जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।

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