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अर्धकुमारी गुफा का क्या है रहस्य (Mystery of Ardhkumari Cave)

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अर्धकुमारी गुफा

हिंदू धर्म में विश्वास रखने वाले लोगों को ये तो पता ही होगा कि यहां इस धरती पर कुछ ऐसे चमत्कारी मंदिर है जिसका रहस्य आजतक कोई नहीं जान पाया। हालांकि भारत में आपको काफी धार्मिक स्थल देखने को मिल जाएंगे। लेकिन आज हम बात करेंगे एक विशेष मंदिर की, वो है माता वैष्णो देवी, यह आपको भी पता होगा कि वैष्णो देवी का ये प्राचीन गुफा हमेशा से ही चर्चा का विषय बना रहा है। इस अर्धकुमारी गुफा के प्रति लोगों की आस्था कुछ ऐसी है कि हर साल भक्त माता के दर्शन करने हजारों की संख्या में पहुंचते हैं।

हालांकि समय के साथ यहां माता के चरणों में आने वाले भक्तों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। भक्तों की सुरक्षा को देखते हुए माता की प्राचीन गुफा को आमतौर पर बंद रखा जाता है। इसकी जगह एक नई कृत्रिम गुफा बनाई गई है। इस गुफा का महात्तम बेहद ज्यादा है, क्योंकि इसमें कई सारे रहस्य भी छिपे हुए हैं। आज हम आपको इस गुफा के रहस्यों से रूबरू कराने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं…

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अर्धकुमारी गुफा का रहस्य

कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण कराने वाले करीब 700 साल पहले पंडित श्रीधर को बच्‍ची के रूप में प्रकट हुई माता ने स्‍वयं इस गुफा के बारे में बताया था। लेकिन कुछ किस्‍मत वालों को इस गुफा में प्रवेश का सौभाग्‍य मिल जाता है। श्रद्धालुओं की संख्‍या जब भी 10 हजार से कम होती है तो इस गुफा को खोल दिया जाता है।

वैसे इस गुफा को गर्भजून या अर्धकुमारी गुफा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि माता ने इस गुफा में नौ महीने बिताए थे, आप इसे वैसे ही समझ सकते हैं जैसे कोई शिशु जन्म से पहले मां के गर्भ में 9 माह तक रहता है यही कारण है कि इस गुफा को गर्भजून कहते हैं। गुफा का आकार एक माता के गर्भ के आकार जैसा ही है।

छोटी-सी इस गुफा में से बड़े से बड़े आकार का व्यक्ति बड़ी ही आसानी से निकल जाता है। हालांकि इस गुफा की एक और मान्यता है कि कोई भी व्यक्ति इस गुफा में केवल एक बार ही जा सकता है क्योंकि यदि कोई शिशु अपने मां के गर्भ से बाहर निकल जाता हैं तो वह दोबारा गर्भ में नहीं जा सकता हैं।

भक्‍तों को इस गुफा के दर्शन करने की ललक रहती है। पर हर किसी को नहीं बल्कि कुछ क‌िस्मत वाले भक्तों को प्राचीन गुफा से आज भी माता के भवन में प्रवेश का सौभाग्य म‌िल जाता है। दरअसल यह न‌ियम है क‌ि जब कभी भी दस हजार के कम श्रद्धालु होते हैं तब प्राचीन गुफा का द्वार खोल द‌िया जाता है। आमतौर पर ऐसा शीत काल में द‌िसंबर और जनवरी महीने में होता है। कहते हैं कि इस गुफा में आज भी भैरो का शरीर मौजूद है।

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कहा जाता है कि जब माता वैष्णो देवी भैरों को वरदान दिया था कि कि मेरे दर्शन तब तक पूरे नहीं माने जाएंगे, जब तक कोई भक्त, मेरे बाद तुम्हारे दर्शन नहीं करेगा। प्राचीन गुफा के समक्ष भैरो का शरीर मौजूद है और उसका सिर उडक़र तीन किलोमीटर दूर भैरो घाटी में चला गया और शरीर यहां रह गया। जिस स्थान पर सिर गिरा, आज उस स्थान को ‘भैरोनाथ के मंदिर’ के नाम से जाना जाता है यही कारण है कि लोगों को इस मंदिर के दर्शन करने की ललक भी रहती है।

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