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प्यार और सेक्स

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उनके लिए प्‍यार सिर्फ कैज़ुअल डेटिंग या फिर केवल हुक अप्‍स से बढ़कर नहीं होता। ये किसी एक के साथ बंधकर नहीं रह सकते। इन लोगों के लिए रिलेशनशिप का मतलब सेक्‍स होता है। प्यार और सेक्स – युक्तियाँ और सलाह डेटिंग आप अपने पार्टनर से प्यार करते हैं तो सेक्स से परहेज ना करें, बल्कि सोचिए कि सेक्स लाइफ में ‍आप कितने और कैसे-कैसे रंग भर सकते हैं।

छोटी-छोट‍ी बातें आपको लाइफ का चरम आनंद दे सकती हैं, बस अपने पार्टनर से कोमलता से पेश आइए, फिर देखिए सेक्स का असली मजा : डांस करें – स्वयं डांस करें या पार्टनर के साथ। चाहे नाचना आता है या नहीं, पर नाचें जरूर। क्योंकि नाचना क्रिएट करता है सेक्स अपील। यह आसान जरिया है लोगों से मिलने का। डांसिंग कॉन्फिडेंस बिल्ड करता है, जो आसान तरीका है लोगों से मिलने का। वर्क आउट – डेली वर्क आउट से सेक्सी बॉडी बनती है।

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इससे ज्यादा देर सेक्स करने की शक्ति मिलती है। इससे शरीर लचीला हो जाता है और आप ऐसे आसनों का भी आनंद उठा सकती हैं जिनके बारे में सिर्फ ख्वाब देखती हैं। म्यूजिक – हर प्रकार का म्यूजिक सेक्स ‍की क्रिया में आनंददायक साबित होता है। सेक्स क्रिया के दौरान म्यूजिक की रिदिम हेल्प करती है उसे इंजॉय करने में। म्यूजिक से सेक्स के लिए मूड क्रिएट होता है। गानों के बोल भावनाओं में तूफान ला सकते हैं। शेयर फैंटेसी – एक दूसरे को कम से कम अपनी एक फैंटेसी जरूर बताएँ।

यदि शेयर करने के बाद उसे एक्सपेरीमेंट कर सकें, तो इससे बेहतर कुछ नहीं। संवाद – अपने पार्टनर को समझाएँ कि आपको हर संभव सैक्सुअल प्लेजर दें। कम्यूनिकेशन कीजिए, बिना टच किए हुए। आपको पता है सेक्स एक बेहतरीन एक्सरसाइज है इसे कुशलता से निभाना आना चाहिए। प्यार और सेक्स – सेक्स और प्यार के मुद्दों के लिए युवाओं में प्यार और सेक्स को लेकर अलग-अलग भ्रांतियां है। एक वर्ग ऐसा है जो प्यार और सेक्स को एक ही मानता है तो एक वर्ग ऐसा है जो संभोग का मतलब प्यार मानता है और जबकि एक वर्ग ऐसा है जो प्यार में सेक्स और सेक्स से पहले प्यार को जरूरी मानता है।

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प्यार और सेक्स इन दोनों शब्दों के अर्थों में कोई गहन अंतर नहीं है। लेकिन गहनता से देखा जाए तो दोनों एक दूसरे के पूरक है। प्यार और सेक्स को लेकर हर वर्ग की अपनी-अपनी राय है। आइए जानें क्या सेक्स का मतलब प्यार है या कुछ और। प्यार और सेक्स एक ऐसा विषय हैं, जिस पर हर कोई बात करना न तो अच्छा मानता है न ही जरूरी। कुछ लोगों को मानना है कि पहली बार सेक्स करने के लिए या पहली बार सेक्स का अनुभव प्राप्त करने के लिए जरूरी नहीं कि प्यार के चक्कर में पड़ा जाए। एक वर्ग में कुछ लोग ऐसे हैं, जो ये मानते है कि यदि वह किसी से प्यार नहीं करता तो उसके साथ सेक्स संबंध कैसे स्थापित कर सकता है। यानी रिश्ते के साथ-साथ सेक्स होना भी कोई बुराई नहीं।

कुछ वर्ग में लोग ऐसे भी है, जो संभोग का मतलब सिर्फ सेक्स मानते हैं यानी उन्हें प्या‍र से मतलब नहीं बल्कि देह से मतलब है और अपनी शारीरिक भूख शांत करने से। कुछ एक वर्ग ऐसे है जिसे संवेदनशील या भावनात्मीक लोगों में जोड़ा जा सकता है, उनका मानना है कि जब तक किसी से प्यार न हो दैहिक रूप से जुड़ना संभव नहीं। वहीं यही वर्ग ये भी मानता है कि यदि वह किसी से दैहिक रूप जुड़ गये हैं तो उसमें प्यार की भावना होना बेहद जरूरी है। साथ ही अगर भावनात्मक जुड़ाव है, तो इस स्थिति में रूप से आप जुड़ गए तो शारीरिक रूप से जुड़ना भी जरूरी नहीं। इन सबके बावजूद ये समझना भी जरूरी है कि क्या प्यार का मतलब सेक्स है? क्या सेक्स का मतलब प्यार है?

क्या प्यार के दौरान सेक्स कुछ होता है? अक्सर कहा जाता है कि जहां दो प्रेमी एक-दूसरे से भावनात्मेक रूप से जुड़ गए हैं उनके लिए शारीरिक रूप से जुड़ना मात्र एक औपचारिकता रह जाती है। लेकिन ठीक इसके विपरीत ये भी माना जाता है कि सेक्स प्यार को बढ़ाने और करीब लाने में मदद करता है। ये सिर्फ एक बहस का मुद्दा भर है कि क्या प्यार सेक्स को बढ़ाता है या फिर सेक्स प्यार को बढ़ाने में सहायक है। कुछ लोग प्यार और सेक्स दोनों को बिल्कु्ल अलग-अलग मानते हुए प्यार को जहां एक प्यारा या मधुर अनुभव मानते हैं वहीं सेक्स को शारीरिक जरूरत मानते हैं।

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