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कोजागरी लक्ष्मी पूजा: मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय | Kojagari Lakshmi Puja: Do These Upay To Glad Lakshmi

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त्योहारों का मौसम चल रहा है ऐसे में हर किसी के घर में पूजा पाठ संबंधी खूब सारी तैयारियां चल रही है। दिवाली का समय नजदीक है लेकिन इससे ठीक 15 दिन पहले कोजागरी लक्ष्मी पूजा मनाया जाता है। कुछ लोग तो इस पूजा के बारे में जानते हैं लेकिन कई लोग ऐसे हैं जो इसकी महत्तवता को नहीं जानते हैं। तो आइए जानते हैं कि कोजागरी लक्ष्मी पूजा के बारे में सबकुछ …

लक्ष्मी पूजा धन प्राप्ति का प्रतीक है, हर कोई माता लक्ष्मी की पूजा धन पाने की इच्छा से करता है व माता को प्रसन्न करने के लिए सबकुछ लगा देता है। Spark.Live वर्तमान में देश के अपने ऐप्स में से एक है, जिसपर संबंधी विशेषज्ञ मौजूद हैं और वो आप सभी के लिए ऑनलाइन परामर्श प्रदान कर रहे हैं।

कोजागरी लक्ष्मी पूजा| Kojagari Lakshmi Puja

सबसे पहले तो ये बता दें कि इस साल यह पूजा 30 अक्टूबर शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा क्योंकि इस दिन आश्विन मास की पूर्णिया तिथि है, जिसे शरद पूर्णिमा भी कहा जाता है। जी हां शरद पूर्णिमा के दिन ही कोजागरी लक्ष्मी पूजा का पर्व मनाया जाता है। इसे दिवाली के ठीक 15 दिन पहले मनाया जाता है।

इस पूजा को लेकर मान्यता है कि कोजागरी लक्ष्मी पूजा दिवाली से पूर्व माता लक्ष्मी की पूजा करने का शुभ अवसर होता है यही कारण है कि बंगाल में लोग इसे लक्ष्मी पूजा के नाम से भी जानते हैं।

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कोजागरी लक्ष्मी पूजा का धार्मिक महत्व |Importance Of Kojagari Lakshmi Puja

शरद पूर्णिमा या कोजागरी पूर्णिमा के दिन चंद्रमा 16 कलाओं से पूर्ण होता है। उसकी किरणों में अमृत के गुण होते हैं। इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होती है। उस दिन आसमान से अमृत बरसता है, इसलिए रात में खीर बनाकर खुले में रखा जाता है। जब उसमें चंद्रमा की किरणें पड़ती हैं, तो वह भी अमृत के समान हो जाता है। उसका सेवन करना सेहत के लिए अच्छा माना जाता है।

अगर शास्त्रों व पौराणिक मान्यताओं की बात करें तो बताया गया है कि माता लक्ष्मी का अवतरण शरद पूर्णिमा के दिन ही हुआ था। इस दिन माता लक्ष्मी देर रात में पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। इस दौरान माता ‘को जाग्रति’ शब्द का उच्चारण करती हैं। इसका अर्थ होता है कौन जाग रहा है। वो देखती हैं कि रात्रि में पृथ्वी पर कौन जाग रहा है, जो लोग माता लक्ष्मी की पूरी श्रद्धा से पूजा करते हैं, उनके घर मां लक्ष्मी जरुर जाती हैं।

मान्यता है कि अगर इस रात जो भी व्यक्ति सोता हुआ मिलता है माता लक्ष्मी उनके घर पर प्रवेश नहीं करती हैं ऐसे में देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने और हर मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए कुछ उपाय किए जाते हैं

हर वर्ष मनाया जाने वाला ये त्योहार लक्ष्मीजी को संतुष्ट करने वाला है। मान्यता है कि इससे प्रसन्न हुईं माँ लक्ष्मी इस लोक में तो समृद्धि तो देती ही है इसके साथ ही साथ शरीर का अंत होने पर परलोक में भी सद्गति प्रदान करती हैं।

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कहा जाता है कि इस रात खीर बनाना चाहिए और उसे पूरी रात खुले आसमान के नीचे रखना चाहिए क्योंकि मान्यता है कि शरद पूर्णिमा पर चांद की किरणें अमृत बरसाती हैं और खीर में अमृत का अंश मिल जाता है।

शरद पूर्णिमा की रात देर तक जगने के बाद बिना भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का नाम लिए नहीं सोना चाहिए। रात में जगने की वजह से इसको कोजागरी पूर्णिमा यानी जागने वाली रात भी कहते हैं।

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