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स्वतंत्रता दिवस विशेष: आत्मनिर्भर भारत से मिले नए अवसर (Independence Day: How to become independent)

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स्वतंत्र होने का मतलब सिर्फ जीना नहीं है बल्कि स्वतंत्र का असल मायने खुद को आत्मनिर्भर रूप से जीने का है। कोरोना काल में हर कोई त्रस्त हो चुका है, लेकिन इस आपदा को अवसर में बदलने के लिए पीएम मोदी ने देश के हर नागरिक को एक नई सीख दी। दअरसल हम बात कर रहे हैं आत्मनिर्भर योजना की जिसके बारे में पीएम मोदी ने अभी कुछ ही दिनों पहले लॉकडाउन के दौरान चर्चा की थी।

आत्मनिर्भर योजना ने दिलाई भारतीय प्रतिभा को असली स्वतंत्रता

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कोविड 19 के प्रकोप से उपजी वैश्विक परिस्थितियों के बीच अगर किसी चीज की सबसे बड़ी कमी महसूस की गई तो वह है लोकल प्रोडक्ट्स की क्योंकि इस दौरान अचानक यातायात के थम जाने से ग्लोबल विलेज के अरमान बिखर गए। आज हम स्वतंत्र तो थें लेकिन इसके बावजूद हमारे हांथ मानों बंधे हुए थें। लेकिन आत्मनिर्भर योजना के आने से ऐसा लग रहा है कि देश के हर नागरिक के अंदर जो प्रतिभाएं छिपी हुई थीं वो बाहर निकलकर आ रही है। और तो और इससे हमें अपनी क्षमता का भी पता चला।

यह सबकुछ ऐसे ही नहीं हुआ बल्कि एक सही सोच का नतीजा है जो इस आजाद देश के प्रधानमंत्री ने सुझाया। देखते ही देखते आने वाले महीनों में यह आइडिया फर्राटे भरेगा, तब दुनिया जान जाएगी कि आत्मनिर्भर भारत योजना में ही मानवता का कल्याण निहित है। देर सबेर शेष दुनिया भी इसी रास्ते पर चलेगी और चीनी उत्पाद पर खुद की निर्भरता को कमतर करेगी।

राष्ट्रीय लॉकडाउन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने इसी वर्ष गत 12 मई को राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक राहत पैकेज, आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत की है, जो कोविड-19 महामारी संकट से लड़ने में निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इतना ही नहीं यह स्वतंत्र भारत को एक आधुनिक भारत की पहचान भी देगा।

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आधुनकि भारत के सपने को पूरा करेगा ‘आत्मनिर्भर भारत योजना’

इस योजना में सबसे ज्यादा असर तकनीकी में देखा गया जो कि हमारे देश को आधुनकि भारत बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगा। दरअसल अगर आपने गौर किया होगा तो पिछले कुछ दिनों में सभी चाइनीज ऐप पर पाबंदी लगा दी गई। जिसके बाद भारतीय यूजर्स को जो काफी संख्या में इन ऐप का प्रयोग कर रहे थें वो सभी भारतीय ऐप की तलाश में लग गए इसी तलाश को देखते हुए कई भारतीय ऐप का निर्माण हुआ व जो पहले से बने हुए थें वो भी इस दौरान चर्चा में आ गए। ये सभी भारतीय ऐप ने चाइनीज ऐप को ऐसे पटखनी दी जिसकी उम्मीद चीन को भी नहीं होगी।

भारत में अपना इतना बड़ा व्यापार स्थापित करने के बावजूद लोग चीन के इस दुव्यवहार से तंग आ चुके थें ऐसे में यह फैसला करना सही था। बड़ी बात तो यह हुई की इन सबके बीच अपने भारतीय ऐप को एक नई पहचान मिली जो चाइनीज ऐप की दुनिया में कई कदम पीछे रह गए थें और इनके क्रेज की वजह से उन ऐप को अपना स्थान नहीं मिल पा रहा था।

ऐप इनोवेशन चैलेंज ने दिलाई नई पहचान

भारतीय ऐप को पहचान दिलाने के लिए सरकार ने एक नई रणनीति बनाई आत्मनिर्भर ऐप भारत इनोवेशन चैलेंज जो कि हमारे देश में छिपी प्रतिभाओं को निखारने का काम किया। इसके लिए लोगों में उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया देखने को मिली। इसमें देश भर के टेक उद्यमियों और स्टाटर्अप की बहुत उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली थी। इस चैलेंज में Spark.live नेटवर्क भी भागीदार रहा और विजेता के रूप में उभरकर सामने आया। Spark.Live भारतीय ऐप है जिसमें कई सारी खासियत हैं जो इसे विजेता बनाने के लिए बेहद है।

यह बहुभाषी भारतीय ऐप है, यहां आपको कई सारे लघु वीडियो साझा करने और ऑनलाइन लाइव वीडियो परामर्श का ऑप्शन मिलता है। Spark.Live पर 1.5 मिलियन डाउनलोड, 100 हजार डेली विजिटर्स और हर माह इसपर 70 मिलियन वीडियो देखा जा चुका है। यह मंच कोरोना काल में बेहद उपयोगी साबित हो रहा है क्योंकि इसपर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य सलाह, आहार और पोषण मार्गदर्शन प्राप्त करना, नियमित फिटनेस, योग कक्षाएं या नृत्य/ संगीत सीखने में भाग लेना, ज्योतिष, रेकी, ध्यान मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं वो भी घर बैठे बेहद कम कीमत पर।

यहां मिलेगी आत्मनिर्भर भारत अभियान की सम्पूर्ण जानकारी

आत्मनिर्भर भारत अभियान से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी देश के प्रत्येक पात्र नागरिक को ऑफिशियल वेबसाइट पर मिलेगी। दरअसल कोरोना वायरस के कारण पूरे देश के लॉकडाउन की स्थिति का सबसे ज्यादा बुरा असर देश के सुक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योगों, श्रमिकों, मजदूरों और किसानों पर पड़ा है। इन सभी नागरिकों को लाभ पहुंचाने के लिए पीएम ने देश के सुक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योगों, श्रमिकों, मजदूरों और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी आर्थिक पैकेज का ऐलान कर दिया है।

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आत्मनिर्भर कैसे बनें?

इन सभी बातों के साथ एक जरूरी बात यह भी है कि आखिर आत्मनिर्भर कैसे बना जा सकता हैं? ये सवाल उन सभी लोगों के मन में आ रहा जो इस योजना के बारे में सुन रहे, सोच रहे या समझ रहे। तो इसके लिए सबसे जरूरी है खुद पर विश्वास होना। व्यक्ति आत्मनिर्भर एक साथ नहीं बन जाता है उसको थोड़ा टाइम जरूर लगता है, यही नहीं अपने शरीर, अपने व्यक्तित्व, अपने विचार, अपनी रूचि और अपने जीवन की कहानी को स्वीकार करें।

हमारे नेटवर्क पर मौजूद मोटिवेशनल स्पीकर से संपर्क करने के लिए यहां क्लिक करें

ये कभी न कहें की परिस्थितियां आपके अनुकूल नहीं हैं। ये सभी चीजें व्यक्ति के अंदर अगर नहीं है तो उसको घबराने की आवश्यकता नहीं है आप किसी मोटिवेशनल स्पीकर से मिल सकते हैं जो आपकी मदद कर सकता है। आप उनके परामर्श के जरिए खुद को आत्मनिर्भर बनाने की राह पर चलने में सक्षम पाएंगे। हमारे नेटवर्क पर मौजूद रवीकांत जो कि एक प्रेरक वक्ता हैं आपकी मदद कर सकते हैं।

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