Read Home » हिंदी लेख पढ़ें » जीवनशैली और रहन-सहन » कैसे पता करें कि हमारे बच्चे को है मानसिक परामर्श की आवश्यकता ?

कैसे पता करें कि हमारे बच्चे को है मानसिक परामर्श की आवश्यकता ?

  • द्वारा

भारत में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजगता शुरू से ही कम रही है, यही कारण है कि अब इस महामारी वाले दौर खत्म होने के बाद मनोचिकित्सक के मन में एक चिंता का विषय बन गया है जो है अवसाद का। जी हां मनोचिकित्सक का मानना है कि अगर कोरोना महामारी के बाद एक और महामारी होगी और वो है अवसाद। वैसे आज हम मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात तो करेंगे लेकिन विशेषरूप से बच्चों को लेकर जिन्हें अक्सर ही ये सोचकर छोड़ दिया जाता है कि उन्हें किसी तरह का तनाव नहीं है इसलिए वो मानसिक रूप से अस्वस्थ्य नहीं हो सकतें।

हालांकि पहले की अपेक्षा अब कुछ हद तक सुधार हो चुका है, क्योंकि एक दशक पहले तक भारत में किसी छोटे बच्चे या किशोर को परामर्श के लिए काउंसलर के पास ले जाने की स्थिति को बड़ी चिंता का विषय समझा जाता था और उनके माता-पिता के लिए यह बेहद ही शर्मिंदगी का कारण बन जाता था। हालांकि आज के समय में किसी थेरेपिस्ट से मिलना कुछ हद तक सामान्य हो गया है लेकिन फिर भी अधिकांश माता-पिता के लिए इस स्थिति को समझ पाना और इस राह पर आगे बढ़ना कठिन ही होता है। इसलिए हम आपको कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में बताएंगे जिसे देखकर आप समझ जाएंगे कि आपके बच्चे को मनोचिकित्सक की आवश्यकता है।

बच्चों में मानसिक स्वास्थ

मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं आजकल बच्चों में बहुत ही आम हो गई है, जो उनके सीखने, व्यवहार की भावनाओं को काफी हद तक प्रभावित करती हैं। वास्तव में, यह पाया गया है कि बच्चे और किशोर मानसिकस्वास्थ्य कठिनाइयों के लिए कुछ निश्चित परेशानियों से जूझते हैं और इसके लिए सहायता प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त बाधाओं का भी सामना करते हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में जिससे आपको बच्चों के अंदर मानसिक विकारों को समझने में मदद मिलेगी।

यह भी पढ़ें : मानसिक स्वास्थ्य का रखना है ख्याल तो जरूर फॉलो करें ये टिप्स

मानसिक विकारों के लिए लक्षण

बच्चों का एकाएक चुप हो जाना व छोटी छोटी से बात पर डर जाना या फिर अक्सर ही डरा हुआ महसूस करना।

सामान्यत: तो बच्चे बाते छिपाते हैं लेकिन जब उनके साथ कुछ भी हो और वो आपसे हर बात छिपाने लगे तो समझ जाएं कि मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है।

बच्चे का बात बात पर चिढ़ना।

अक्सर ही छोटी छोटी बातों पर रोना।

हमेशा अकेले रहना।

बात बात पर गुस्सा करना व गुस्से में चीजें तोड़ना।

जानबूझकर चीजों को फेंकना,पटकना या फिर दूसरे बच्चों को मारना।

दुसरों को जरूरत से ज्यादा परेशान करना।

जैसे कि अपनी सुरक्षा के लिए कम चिंता दिखाना या दूसरों को चोट पहुंचाने की इच्छा व्यक्त करना। ध्यान केंद्रित करने में समस्या आना व वजन का कम होने लगना।

मनोचिकित्सक से संपर्क करने के लिए यहां क्लिक करें

यदि आपका बच्चा इनमें से कोई भी बदलाव दिखा रहा है, खासकर यदि यह उनके दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है, तो आपको अपने बच्चे के डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श ले सकते हैं, जो यह निर्धारित करने में मदद कर सकता है कि आपके बच्चे के लिए सबसे अच्छा काम क्या हो सकता है। हमारे नेटवर्क पर मौजूद साइना जैन आपकी मदद कर सकती हैं, साइना जैन एक मनोचिकित्सक हैं। वैसे बता दें कि बच्चों, किशोरों और वयस्कों के लिए साइना जैन मानसिक परामर्श देती हैं।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *