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आंतरिक शांति व चिकित्सा के रूप में कैसे काम करता है भारतीय शास्त्रीय संगीत

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भारतीय शास्त्रीय संगीत

संगीत को जानना व समझना इतना आसान नहीं है, यह किसी के लिए साधन है तो किसी के लिए साधना। कोई इसके जरिए आनंद प्राप्त करता है तो किसी के लिए ये पूरा जीवन है। हालांकि कई बार संगीत जीवन के कठिन समय में साथ देता है जीने का हौसला, बुरे दौर में हिम्मत भी संगीत से ही प्राप्त होती है। कुल मिलाकर हम ये समझ सकते हैं कि भारतीय शास्त्रीय संगीत एक ऐसा माध्यम है, जो हमारे जीवन में कई मोड़ पर हमारी जरूरतें पूरी करता है। यह हमारी आत्मा का उन्नयन करता है और शरीर की कई बीमारियों का इलाज भी करता है। ये सब सुनने में बिल्कुल कहावत लग रहा होगा लेकिन ये सच है और इसे वहीं अनुभव कर सकता है जो संगीत को अच्छे से जानता है। 

ये बात तो सच है कि इस आधुनिक जीवनशैली में मानसिक दबाव से दिमाग पर काफी बुरा असर पड़ रहा है। यही कारण है कि हम खुद को अकेला महसूस करते हैं, इसके बाद हम खुद में एकाकी महसूस कर मानसिक विकारों के गिरफ्त में आते जा रहे हैं। वैसे अगर आप दिमाग को चुस्त रखने के लिए निश्चित समय पर विश्राम के साथ मनोरंजन भी मानसिक स्वस्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होता है। वहीं आपको बता दें कि बढ़ती उम्र का दबाव हो या किशोरावस्था का प्रतिबल, प्रत्येक प्रकार की चिंता को कम करके संगीत मस्तिष्क में कंपन कर शांति प्रदान करता है।

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भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति

भारतीय शास्त्रीय संगीत के बारे में हर किसी को पता नहीं है लेकिन इसकी परंपरा भरत मुनि के नाट्यशास्त्र और उससे पहले सामवेद के गायन तक जाती है। भरत मुनि द्वारा रचित भरत नाट्य शास्त्र, भारतीय संगीत के इतिहास का प्रथम लिखित प्रमाण माना जाता है। आज के भारतीय शास्त्रीय संगीत के कई पहलुओं का उल्लेख इस प्राचीन ग्रंथ में मिलता है।

चिकित्सा के रूप में काम करता है शास्त्रीय संगीत

भारतीय शास्त्रीय संगीत में ध्वनि की प्राथमिकता ज्यादा होती है ध्वनि यानि की सा, रे, ग, म, प, ध, नी, सा। सरगम की ध्वनि तीनों सप्तक कोमल तीव्र स्वरों की तुलना आप झरनें, पवन, कोयल, मोर, पेड़-पौधे, पशु-पक्षियों के प्राकृतिक मधुर संगीत आदर के साथ कर सकते हैं। यही कारण है कि भारतीय संगीत चाहे वो गायन हो या, नृत्य हो या फिर प्राकृतिक संगीत सभी में सात सुरों के सरगम का समावेश होता है।

अगर बात करें राग चिकित्सा, नाद योग की तो इन सभी का प्रयोग प्राचीन समय से लेकर आज भी किया जाता है। ये आत्मा को उच्च जीवन शक्ति प्रदान कर के कैंसर जैसी लाइलाज रोग को भी मात देने में काफी हद तक सफल है। वहीं बात करें अगर नाद योग द्वारा लयबद्ध श्वांस लेने की एक निश्चित आवृत्ति वाद्य यंत्र की तो यह ध्वनि उत्पन्न करती है, जिसका निरंतर प्रयोग मानव शरीर के मेरुदंड में सातों चक्रों के प्रबंध तक पहुंचती है।

यही कारण है कि संगीत जीवन की शारीरिक व मानसिक समस्याओं का सामना करने की नीतिगत विचार तकनीक को सिखाता है। अक्सर हमने देखा है कि रोते हुए बच्चे मधुर संगीत सुनकर सो जाते हैं, जिससे हम सभी जानते हैं कि संगीत मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि संगीत व्यक्ति के मन:स्थिति को ठीक करके जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार करता है। नकारात्मक विचारों को साफ करके संगीत नई सकारात्मक ऊर्जा द्वारा उमंग के साथ जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है।

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संगीत मनोचिकित्सा द्वारा आज क्रोध, ईर्ष्या, शोक आदि संज्ञानात्मक संवेगों को परिवर्तित करता है। शारीरिक व मानसिक समस्याओं से संगीत द्वारा जीवन जीने की इच्छा बढ़ जाती है। अगर आप संगीत के बारे में विस्तृत जानकारी चाहते हैं और संगीत से अपने जीवन को बदलना चाहते हैं तो आपको एक सही प्रशिक्षक की आवश्यकता है, Spark.live पर मौजूद बकुला हेगड़े आपकी मदद  कर सकती है। ये जानी मानी विद्वत में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत पूरी की है। वह एक अखिल भारतीय रेडियो कलाकार हैं। 

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