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ज्योतिष समस्याओं को दूर करने में कैसे मददगार होते हैं रत्न

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How gemstones can help solve your astrological issues

इंसान का जीवन सुख व दुख दोनों से भरा होता है, लेकिन मनुष्य की प्रवृति कुछ ऐसी होती है कि वो हमेशा सुख की लालसा ही करता है। लेकिन क्या यह संभव है? चाहे इस दुनिया में कोई कितना भी पैसे वाले क्यों न हो उसको भी सुख और दुख दोनों समय का सामना करना पड़ता है। पर कई बार ऐसा होता है कि हमारे जीवन में जो दुख आते हैं वो बिल्कुल पहाड़ की तरह लगने लगते हैं और ऐसा लगता है कि हम इनका सामना नहीं कर पाएंगे। ऐसे में हम इससे मुक्ति पाने के लिए कई सारे उपाय खोजने लगते हैं। इन उपायों को खोजने के लिए हम अक्सर ही ज्योतिष का सहारा लेते हैं। ज्योतिष की सलाह से कुंडली दिखवाते है, हवन तथा पूजा पाठ करवाते हैं, ग्रह शांति करवाते हैं इन सबके अलावा रत्न भी धारण करते हैं।

जैसा कि आपको भी बता दें कि ज्योतिष की दुनिया में रत्नों का भी अपना अलग ही महत्व होता है। ग्रहों के शुभ- अशुभ प्रभाव से व्यक्ति का जीवन प्रभावित होता है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रह अशुभ फल दे रहे हैं तो संबंधित ग्रह का रत्न धारण करने से उस ग्रह के दोष दूर हो जाते हैं। जी हां रत्नों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि हमारी कुंडली में कुछ दोष तो ऐसे होते हैं कि वो सिर्फ रत्न के धारण करने से ही खत्म हो जाते हैं।

कई बार अपने ऐसा भी महसूस किया होगा कि रत्न धारण करने के बावजूद भी आपकी समस्याएं खत्म नहीं होती हैं। ऐसे में आपके मन में ये भी आता है कि ज्योतिष ने कहीं ग़लत रत्न तो नहीं पहनने को कह दिया लेकिन आपको बता दे कि ऐसा भी हो सकता है कि आपका रत्न सही न हो। रत्नों की बात करें तो ये सभी रत्न या उपरत्न है किसी न किसी प्रकार के पत्थर ही होते है। ये सभी रत्नों में जिन पत्थरों का प्रयोग किया गया होता है वो किसी न किसी रासायनिक पदार्थों के किसी आनुपातिक संयोग से बने हैं। 

हालांकि रत्नों की एक और खासियत बताई जाती है जिसमें कहा गया है कि अगर आपकी कुंडली में ग्रहों की दशा खराब है और तोको पता है कि इसकी वजह से आपको बुरा परिणाम भुगतना पड़ सकता है तो आप रत्न को धारण कर उस प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि ज्योतिष में रत्नों को धारण करने के कुछ नियम होते हैं जिनका पालन करना जरूरी होता है तभी आप उन ग्रह दोषों के प्रभाव को कम करने में सफल रहेंगे।

अगर आपकी कुंडली में सूर्य की महादशा चल रही है तो इज़के लिए रत्नशास्त्री आपको रविवार के दिन रिंग फिंगर में माणिक्य रत्न को धारण करने को कहते हैं। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि रत्न पहनने के लिए सूर्योदय का समय सबसे सही समय रहता है।

अगर आपकी कुंडली मे चंद्रमा की महादशा चल रही है तो ऐसे लोगों की मोती धारण करने की सलाह दी जाती है। बता दें कि मोती धारण करने का सबसे शुभ समय सोमवार का दिन होता है। इसलिए सोमवार की शाम अनामिका या कनष्ठिका उंगली में मोती पहन सकते हैं।

यदि कुंडली में मंगल की महादशा चल रही है तो व्यक्ति को मूंगा रत्न धारण करना चाहिए। बताया जाता है कि मूंगा पहनने के लिए मंगलवार का दिन शुभ माना गया है। मंगल के दिन शाम पांच के बाद इसे रिंग फिंगर में पहनना सही रहता है।

अगर कुंडली में बुध की महादशा चल रही है तो ऐसे लोगों को पन्ना पहनने की सलाह ज्योतिष देते हैं। बुधवार का दिन पन्ना धारण करने का विशेष महत्व है। दोपहर के वक्त आप अपनी कनिष्ठिका में पन्ना पहन सकते हैं।

यदि कुंडली में बृहस्पति की महादशा चल रही है तो आप पुखराज रत्न धारण कर सकते हैं। इसके लिए कहा जाता है कि गुरुवार के दिन सुबह १०-१२ बजे के बीच तर्जनी अंगुली में पुखराज पहनना चाहिए।

अगर आपकी कुंडली में शुक्र की महादशा चल रही है तो आपको हीरा रत्न धारण करना चाहिए। ध्यान रहे कि इसे मध्यमा या मिडल उंगली में ही धारण करें।

अगर कुंडली में शनि की महादशा चल रही है तो आपको नीलम रत्न पहनने का सुझाव दिया जाता है। पर ध्यान रहे कि इसे शाम के समय में मध्यमा अंगुली में इसे धारण करना चाहिए। शनिवार का दिन उत्तम रहता है।

अब बात करते है राहु-केतु की महादशा की जिसका नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं ,आगे आपकी कुंडली में राहु-केतु की महादशा का प्रकोप है तो शनिवार के दिन अपनी मध्यमा अंगुली में गोमेद धारण करना चाहिए ये बेहद ही उत्तम समय माना जाता है।

वैदिक ज्योतिष में मेघराज भारद्वाज को विशेष अनुभव प्राप्त है। 15 सालों से ज्योतिष के क्षेत्र में कार्यरत मेघराज भारद्वाज से आप अपनी समस्याओं पर परामर्श लेने के लिए संपर्क कर सकते हैं।

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