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आखिर क्यों कोरोना वायरस की वजह से बढ़ने लगें मानसिक रोगी?

कोरोना वायरस

मानसिक स्वास्थ्य एक ऐसा शब्द है, जिसे सुनते ही हम सभी भारतीय परेशान हो जाते हैं। जैसे हमारे सामने कोई विकट समस्या आ गई हो, मगर ऐसा बिल्कुल नहीं है। एक इंसान को पूर्णतः स्वस्थ रहने के लिए उसका मानसिक स्वास्थ्य का अच्छा होना भी काफी जरूरी है। फिर भी हम मानसिक स्वास्थ्य के बारे में कभी घर पर बैठकर बात नहीं करते हैं, यही वजह है कि दिन ब दिन लोग इसकी चपेट में आते जा रहे हैं, लेकिन फिर भी हम अपने मुंह पर ताला लगाए हुए हैं। दरअसल, हमारे समाज में सिर्फ शारीरिक रुप से ठीक न होने को ही बीमारी माना जाता है,  लेकिन सच्चाई तो यही है कि शारीरिक स्वास्थ्य से भी ज्यादा जरूरी है मानसिक स्वास्थ्य। इसका असर हमारी जिंदगी पर पड़ता है। ऐसे में, कोरोना वायरस के दौर में  यह ज़रूरी हो चुका है कि हमें इस बारे में खुलकर बातचीत करनी चाहिए।

कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए दुनियाभर में लॉकडाउन घोषित किया गया, जिसका सबसे ज्यादा असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा। भारत की बात करें, तो 25 मार्च से लागू हुए लॉकडाउन ने घरेलू हिंसा के साथ साथ मानसिक बीमारी को भी बढ़ावा दिया। एक रिपोर्ट की मानें तो लॉकडाउन के दौरान मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित लोगों की संख्या में भारी इज़ाफा हुआ है, जो बेहद चौंकाने वाला है। दरअसल, लॉकडाउन होने की वजह से लोगों के दिमाग पर तनाव बढ़ता गया, जिसका असर न सिर्फ उनके कामकाज पर हुआ, बल्कि उनके रिश्तों पर भी इसका असर देखने को मिला। 

आपदाएं डालती हैं मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर

कोरोना वायरस

इतिहास के पन्नों को पलटें, तो पता चलता है कि जब जब बड़े पैमाने पर आपदाएं आई हैं, तब तब अवसाद से ग्रसित लोगों की संख्या में भी इज़ाफा हुआ है। फिर चाहे, कृत्रिम आपदा हो  (वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हमले या बड़े पैमाने पर गोलीबारी) या प्राकृतिक आपदा हो (जैसे, तूफान, बाढ़ या महामारी), इसका असर लोगों के दिमाग पर बहुत गहरा पड़ता है। उदाहरण के लिए, 2008 में तूफान से प्रभावित जनसंख्या के तकरीबन 5% लोग अवसाद के शिकार हो गए थे। इसके अलावा, 9/11 हमले के बाद 10 वयस्कों में से हर 1 व्यक्ति अवसाद से ग्रसित था। कुल मिलाकर, जब भी बड़े पैमाने पर कुछ घटता है, तो वह दिमाग पर गहरा असर डालता है। और ठीक इसी तरह से कोरोना वैश्विक महामारी ने भी भारी संख्या में लोगों को मानसिक अवसाद की तरफ ढकेला है। 

दरअसल जब भी कोई आपदा आती है, तो उसकी वजह से मानव प्रजाति को बड़ा नुकसान होता है। जिसका असर सालों साल तक देखने को मिलता है। लोग उस नज़ारे को भुलाने में सफल नहीं हो पाते हैं, क्योंकि उनसे बहुत कुछ छीन चुका होता है। ऐसा ही कुछ कोरोना वायरस की वजह से भी हुआ है। एक शोध में कहा गया है कि कोरोना वायरस की वजह से आर्थिक तौर पर भारी नुकसान हुआ और कई देशों की तो अर्थव्यवस्था ही पटरी से उतर गई। ऐसे में भारी संख्या में लोग बेरोजगार हुए, जिसकी वजह से उनके दिमाग पर गहरा असर पड़ा और उनका मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ गया।

मानसिक स्वास्थ्य पर क्यों भारी पड़ा कोरोना वायरस?

कोरोना वायरस

तमाम शोधों में ये खुलासा हो चुका है कि कोरोना वायरस की वजह से मानसिक बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या में भारी इज़ाफा हुआ है, ऐसे में अब सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर क्यों? शोध में उन कारणों का भी ज़िक्र किया गया है, जिसकी वजह से कोरोना वायरस का प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा पड़ा। तो चलिए जानते हैं कि आखिर क्या है वे कारण?

· बिगड़ती अर्थव्यवस्था।

· बेरोज़गारी दर में बढ़ोत्तरी।

· घरेलू हिंसा में बढ़ोत्तरी।

· सामाजिक दूरी।

· घरों में कैद रहना।

· कोरोना वायरस का खौफ।

जी हां, उपरोक्त कारणों की वजह से मानसिक रोगों में बढ़ोत्तरी हुई है, जिसकी वजह से कई लोग अवसाद के शिकार हो गए हैं। इतना ही नहीं, लोगों को इस बात की भी चिंता सता रही है कि आखिर उनका भविष्य क्या होगा? क्या आने वाले समय में कोरोना वायरस ठीक होगा या फिर उनकी ज़िंदगी ऐसे ही चलेगी? आपको जानकर हैरानी होगी कि कोरोना वायरस का असर बच्चों के दिमाग पर भी पड़ा है, क्योंकि उन्हें अब अपना भविष्य अंधेरे में नजर आ रहा है। कुल मिलाकर, कोरोना वायरस ने लोगों के दिमाग और दिल में एक अजीब सा ख़ौफ़ पैदा कर दिया है, जिसकी वजह से वे अवसाद ग्रसित हो रहे हैं।

कैसे खुद को मानसिक तौर पर रख सकते हैं तंदुरुस्त?

कोरोना वायरस

मानसिक तौर पर खुद को ठीक रखने के लिए आपको हैल्दी खान पान अपनाना चाहिए। इसके अलावा आप निम्नलिखित बातों को अपना कर खुद को दिमागी तौर पर ठीक रख सकते हैं- 

  • अपने दोस्तों या प्रियजनों से खुलकर बातचीत करें।
  • समस्या कितनी भी ज्यादा बड़ी क्यों न हो, उसे अपनों के साथ साझा ज़रूर करें।
  • अपनी पसंदीदा चीज़ें करें।
  • सुबह उठकर घूमें।
  • सकारात्मक रहने की कोशिश करें।
  • माहौल बदलने के लिए घर की बालकनी या छत पर जाएं।
  • सूरज की रोशनी लें।
  • यदि दोस्त और परिवार वाले दूर हैं, तो उनसे वीडियो कॉल पर संपर्क करें।

अगर आप भी खुद को अकेला या फिर मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से परेशान हैं, तो हमारे विशेषज्ञ नीतिन मेहरा से घर बैठे संपर्क कर सकते हैं।

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