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संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है पुत्रदा एकादशी का व्रत ( Putrada Ekadashi fast for children)

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पुत्रदा एकादशी

हमारे हिन्दू धर्म में देवी देवताओं और पूजा पाठ आदि को काफी महत्त्व दिया जाता है और यह सिर्फ शौक या दिखावे के लिए नहीं बल्कि इसके पीछे कई सारी मान्यताएं भी होती है। बता दें कि हिंदू पंचांग की एकादशी तिथि चाहे वह कृष्ण पक्ष की हो या शुक्ल पक्ष की, हिंदू धर्म में उसका महत्व अधिक होता है। प्रत्येक माह की कृष्ण और शुक्ल एकादशी अपने आप में खास होती हैं। हर माह की तरह इस माह पुत्रदा एकादशी व्रत आज 30 जुलाई को है। यह व्रत हर साल श्रावण माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन रखा जाता है।

मान्यता के अनुसार, पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति एवं संतान से जुड़ी अन्य समस्याओं के निवारण के लिए रखा जाता है। इसके अलावा पुत्रदा एकादशी व्रत से धन और आरोग्य की प्राप्ति होती है। यह एकादशी बहुत ही फलदायी होती है। यह व्रत निर्जल और जलीय अथवा फलाहार सहित दोनों प्रकार से रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुछ चीजों को करने की मनाही है।

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पुत्रदा एकादशी व्रत का महत्‍व

इस व्रत को संतान की कामना करने वाने वाले संतान प्राप्‍त कर चुके दोनों लोग ही कर सकते हैं। व्रत के फलस्‍वरूप भगवान श्रीहरि आपको संतान सुख देते हैं और जो पहले से ही माता-पिता बन चुके हैं, उनकी संतान की सेहत अच्‍छी रखते हैं और दीर्घायु का आशीर्वाद देते हैं। धार्मिक मान्‍यता है कि इस व्रत को करने से कई गायों को दान करने के बराबर पुण्‍य की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने वाले भगवान विष्‍णु के साथ ही पीपल के पेड़ की पूजा भी करते हैं।

ऐसे करें शुरुआत

अब बात करते हैं कि आखिर इस व्रत की शुरूआत कैसे करें, ये उन लोगों को सबसे लिए मुश्किल लग रहा होगा जो पहली बार ये व्रत कर रहे हैं। तो बताते चलें कि जो भी जातक पुत्रदा एकादशी का व्रत करता है, उसे सदाचार का पालन करना होता है। इस व्रत में वैष्णव धर्म का पालन करना होता है। इस दिन प्याज, बैंगन, पान-सुपारी, लहसुन, मांस-मदिरा आदि चीजों से दूर रहना चाहिए। दशमी तिथि से पति-पत्नी को भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए और मूली, मसूर दाल से परहेज रखना चाहिए। व्रत में नमक से दूर रहना चाहिए। साथ ही कांसे के बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिए।

व्रत की पूजा विधि

अब बारी आती है इस व्रत की पूजा विधि की, जैसा कि आपको पता ही होगा कि हर व्रत में पूजा का एक निमय व विधि होता है जिसे फॉलोव करके करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। पुत्रदा एकादशी के लिए कहा गया है कि अगर पति और पत्‍नी दोनों जोड़े से करें तो विशेष फल की प्राप्ति होती है। सुबह स्‍नान के बाद घर या मंदिर में भगवान का एक साथ पूजन करें। पूजन के दौरान सबसे पहले भगवान के विग्रह को गंगाजल से स्नान कराएं या उस पर गंगाजल के छींटे दें, साथ ही पवित्रीकरण का मंत्र बोलते हुए खुद पर भी गंगाजल छिड़कें। इसके बाद दीप-धूप जलाएं और भगवान को टीका लगाते हुए अक्षत अर्पित करें। फिर भोग लगाएं। व्रत कथा का पाठ करें और विष्णु-लक्ष्मीजी की आरती करें। संतान प्राप्ति और संतान की दीर्घायु की कामना के साथ व्रत रखें और पारण के बाद जरूरतमंदों को दान जरूर करें।

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