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शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए क्यों जरूरी है योग ?

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शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य

जब भी हमारे स्वास्थ की व फिट रहने की बात आती है तो सबसे पहले हमारे दिमाग में शारीरिक स्वास्थ ही आता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि योग करने से सिर्फ शारीरिक लाभ ही होता है बल्कि मानसिक लाभ भी प्राप्त होता है। जीवन में खुश रहने के लिए एक व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक दोनों ही तरह से फिट होना जरूरी है। वैसे तो योग जीवन के कई पहलूओं पर काम करता है, पर आज हम विशेषरूप से बात करेंगे योग के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव की, जिसके बारे में काफी कम लोग ही जानते हैं।

उससे पहले ये बता दें कि पुरे विश्व में २१ जून को अंतर्राष्ट्रीय विश्व योग दिवस के रूप में मनाया जाता है। जो कि अभी हाल में ही आने वाला है। हालांकि योग आंशिक नहीं अपितु पूर्ण रूप से स्वस्थ जीवन शैली है इसलिए यह व्यक्ति के जीवन में मानसिक और शारीरिक स्तर पर काम कर उसे स्वस्थ रखता है। लेकिन आज हम विशेषकर शारीरिक व मानसिक स्वास्थ के पहलू पर विस्तार से चर्चा करेंगे। किस तरह से योग शारीरिक व मानसिक स्वास्थ को प्रभावित करता है?

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शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर योग का प्रभाव

शारीरिक स्वास्थ्य व योग

शारीरिक स्वास्थ्य तो हर किसी के लिए जरूरी है, ऐसे में चाहे बच्चा हो, युवा हो या फिर बुढ़ा ये हर उम्र के व्यक्ति के लिए उतना ही जरूरी है। इसलिए जरूरी है कि आप चाहे किसी भी उम्र के हों अपनी दिनचर्या में योग को आवश्यक शामिल करें। अगर आप योग की शुरूआत करना चाहते हैं तो इसके लिए आप कुछ शुरूआती दिनों में योग प्रशिक्षक की सहायता लें क्योंकि ऐसा करने से आपको योगासन करने का सही तरीके का ज्ञान होगा।

देखा जाए तो योग का शाब्दिक अर्थ ही है तन और मन को प्रसन्न रखना है। आज के इस समय में कई सारे रोगों का उपचार योगासनों व प्राणायामों के जरिए संभव हो गया है इस बात को वैज्ञानिकों ने भी स्वीकारा है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, अवसाद के लिए प्रमुख रूप से योग का सहारा लिया जा रहा है। कहते हैं कि नियमित रूप से अगर कोई व्यक्ति योग करता है तो वो इन सभी रोगों से बच सकता है।

शारीरिक स्वास्थ्य रक्षण के लिए जहाँ एक ओर आसनों को प्रचालन बढ़ रहा है वहीँ प्राणायाम के माध्यम से भी शरीर को स्वस्थ बनाये रखने के लिए प्रयास हो रहे हैं। योग के माध्यम से लोगों के अंदर प्रातःकाल उठने की अच्छी आदत लग रही जिसकी वजह से उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन भी आ रहे हैं।

आज इसके लाभ को देखते हुए दुनिया भर के अनगिनत लोगों ने योग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाया है। यह कहना गलत नहीं होगा कि योग और प्राणायाम भारतीय संस्कृति और जीवन शैली के प्राण हैं, हमारे यहां तो योग व प्राणायाम ऋषि मुनियों की देन मानी जाती है। शारीरिक स्वास्थ्य के लिए योग को वरदान माना गया है क्योंकि योग साधना के आठ अंग हैं। इनमें क्रमश: यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि शामिल हैं।

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मानसिक स्वास्थ्य व योग

अब बात करते हैं मानसिक स्वास्थ्य की, वो कहावत आपने जरूर सुनी होगी कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है। इसलिए मन का स्वस्थ होना शरीर के स्वस्थ होने पर ही निर्भर करता है। नियमित रूप से योग किए बिना एक स्वस्थ मन की कल्पना करना बेकार है। योग जिस तरह से आपके शरीर के हर स्तर पर काम करता है ठीक उसी तरह से वो मन की गहराईयों में भी प्रभाव डालता है। तभी तो महज प्राणायाम करने मात्र से ही मन का शांत होना शुरू हो जाता है क्योंकि मन का सीधा सम्बन्ध हमारे प्राणों से होता है।

प्राणों में स्थिरता आते ही मन भी संयमित होना शुरू कर देता है। जहां योगासन के जरिए हमारा शरीर स्वस्थ होता है वहीं प्राणायाम हमारे मन पर काम करता है। प्राणायाम का अर्थ ही है की श्वास के विभिन्न आयामों पर कार्य करना जिससे हमारे जीवन में छुपे जीवन के आयाम प्रकट हो सकें। प्राणायाम के अभ्यास से शरीर और मन अपने शुद्धतम स्वरुप को प्राप्त हो जाना शुरू कर देता है।

यह कहना गलत नहीं होगा कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों एक दुसरे के पूरक होते हैं इसलिए बिना किसी एक के अस्वस्थ होने पर उतनी ही समस्या होती है यही कारण है कि दोनों को स्वस्थ होना बेहद जरूरी है। तभी हम एक स्वस्थ जिंदगी जी सकते हैं यानि की हमें दोनों स्तर पर आरोग्य के लिए प्रयास करना करना चाहिए। मानसिक स्वास्थ लाभ के लिए योग में जप का भी महत्व बताया गया है। जप करने से मानसिक शांति मिलती है इसलिए मानसिक शांति ही मानसिक स्वास्थ भी देती है।

योग के हर पहलू पर विस्तृत रूप से जानकारी चाहते हैं तो आप हमारे नेटवर्क पर मौजूद योग विशेषज्ञ विभोर गौड़ से संपर्क कर सकते हैं, जो आपको इस लॉकडाउन में भी फिट रहने में मदद करेंगे

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