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दशहरा पर बनता है अबूझ मुहूर्त, ऑनलाइन पंडित से जानें शुभ कार्य के लिए उचित समय| Dussehra: learn from online pundit the subh muhurt for auspicious work

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दशहरा

जैसा कि आप सभी जानते ही होंगे कि इस बार दशहरा 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा। हर साल की तरह इस बार भी यह त्योहार आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन मनाया जाएगा। दशहरा पर्व मनाने के पीछे सांस्कृतिक व समाजिक पहलू दोनों ही छिपा हुआ है। समाजिक पहलू की बात करें तो व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है।

वहीं सांस्कृतिक पहलू के अनुसार यह पर्व अधर्म पर धर्म की, असत्य पर सत्य की और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। मां दुर्गा ने इसी दिन महिषासुर को मारकर देवताओं को उसके आतंक से मुक्त कराया था। इतना ही नहीं इस दिन प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार कर लंका पर विजय पाई थी इसलिए इस त्योहार को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है। कई शुभ कार्यों के लिए यह बेहद ही शुभ दिन माना जाता है।

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किसी भी धार्मिक अनुष्ठान व शुभ कार्य के लिए लोग मुहूर्त देखते हैं लेकिन इस कोरोना काल ने हर चीज ठप्प कर दिया है, दशहरा का पर्व आने वाला है कई लोग इस दिन में शुभ कार्य करते हैं लेकिन लॉकडाउन होने के कारण सब जैसे इतर बित्तर हो गया है। आपको बता दें कि Spark.live के पास आपकी हर तरह के समस्या का समाधान है, यहां मौजूद पंडित व ज्योतिष से संपर्क कर आप घर बैठे सही जानकारी व परामर्श पा सकते हैं।

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तो ऐसे में दशहरे के रंग को फीका न पड़ने दें सभी तरह के अनुष्ठान को करें। आप चाहे तो ऑनलाइन भी पूजा करवा सकते हैं। अगर आप पूजा पाठ या ज्योतिष संबंधित कोई भी जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो spark.live पर मौजूद मशहूर ज्योतिष व कुंडली विशेषज्ञ पंडित दीपक जी से संपर्क कर सकते हैं। ज्योतिष के क्षेत्र में इन्हें १५ सालों का अनुभव प्राप्त है।

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क्या होता है अबूझ मुहूर्त ?

शुभ मुहूर्त के बारे में आपने काफी कुछ सुना होगा लेकिन अबूझ मुहूर्त के बारे में काफी कम लोग जानते हैं इसलिए सबसे पहले तो हम आपको बताएंगे कि अबूझ मुहूर्त होता क्या है ? मुहूर्त यानि की किसी भी कार्य को करने का श्रेष्ठतम समय। शास्त्रानुसार मास श्रेष्ठ होने पर वर्ष का, दिन श्रेष्ठ होने पर मास का, लग्न श्रेष्ठ होने पर दिन का एवं मुहूर्त श्रेष्ठ होने पर लग्न सहित समस्त दोष दूर हो जाते हैं। शास्त्रों की मानें तो शुभ मुहूर्त्त का विशेष महत्त्व बताया गया है किन्तु कुछ ऐसी तिथियां होती हैं जब मुहूर्त देखने की कोई आवश्यकता नहीं रहती ऐसी तिथियों को अबूझ मुहूर्त या ‘स्वयं सिद्ध मुहूर्त’ कहते हैं।

दशहरा पर क्यों बनता है अबूझ मुहूर्त ?

दशहरा को सर्वसिद्धिदायक तिथि माना जाता है इसलिए ये है इसलिए इस दिन को सभी शुभ कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। ज्योतिष का कहना है कि इस दिन बच्चों का अक्षर लेखन, दुकान या घर का निर्माण, गृह प्रवेश, मुंडन, अन्न प्राशन, नामकरण, कर्ण छेदन, यज्ञोपवीत संस्कार, भूमि पूजन आदि शुभ कार्य किया जा सकता है, लेकिन गौर करने वाली बात तो यह है कि इन सभी शुभ कार्यों के बावजूद विजयादशमी पर विवाह संस्कार की मनाही है।

जी हां भले ही ये कहा जाता है कि इस दिन जो कार्य शुरू किया जाता है उसमें सफलता अवश्य मिलती है पर विवाह के लिए साफ साफ मना किया गया है। यही वजह है कि प्राचीन काल में राजा इसी दिन विजय की कामना से रण यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं, रामलीला का आयोजन होता है और रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे बुराई के प्रतीक के रूप में जलाया जाता है।

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