Read Home » हिंदी लेख पढ़ें » Featured » क्या सच में करियर तय करने में मदद करता है साइकोमेट्रिक टेस्ट?

क्या सच में करियर तय करने में मदद करता है साइकोमेट्रिक टेस्ट?

  • द्वारा
साइकोमेट्रिक टेस्ट

हममें से ज्यादातर ऐसे होते हैं जो 10वीं या 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक सवाल हर किसी के मन में आता है कि आगे भविष्य के लिए उसे किस विषय का चुनाव करना चाहिए व आगे चलकर किस विषय में हमारा भविष्य उज्जवल होगा। ऐसे में एक बेहतरीन करियर परामर्श किसी के करियर में मदद कर सकता है। आज हम बात करेंगे विशेषरूप से साइकोमेट्रिक टेस्ट की। सबसे पहले, एक स्ट्रीम और विषय संयोजन तय करने के लिए, स्नातक पाठ्यक्रम और फिर पोस्ट ग्रेजुएशन और करियर विकल्प तय करने के लिए ।

करियर काउंसलिंग में वैज्ञानिक रूप से विकसित योग्यता परीक्षण और व्यक्तित्व परीक्षण शामिल हैं जो एक कैरियर परामर्शदाता को उसकी योग्यता और व्यक्तित्व की रिपोर्ट के आधार पर छात्र को सर्वोत्तम अनुकूल करियर सलाह देने में मदद करता है। मानव क्षमता अनंत है और इसे कभी भी मापा नहीं जा सकता है और न ही हम यह आंक सकते हैं कि कोई क्या कर सकता है। हर व्यक्ति के अंदर कोई न कोई विशेषताएं जरूर होती है इसकी पहचान करने के लिए ही साइकोमेट्रिक टेस्ट और करियर काउंसलिंग का प्रयोग किया जाता है।

यह भी पढ़ें : जीवन के हर क्षेत्र में लक्ष्य प्राप्ति के लिए क्यों जरूरी है व्यक्तित्व का विकास

क्या हैं साइकोमेट्रिक टेस्ट ?

ऐसे में एक बड़ा सवाल मन में आ रहा होगा कि आखिर ये साइकोमेट्रिक टेस्ट है क्या तो बताते चलें कि आज के समय में विभिन्न निजी और कुछ सरकारी संगठनों में भर्ती प्रक्रिया में यह एक नियमित मापदंड के रूप में अपनाया जा रहा है। वैसे तो विभिन्न प्रकार के साइकोमेट्रिक टेस्ट हैं, जिनका उपयोग रिक्रूटर्स और एचआर पेशेवरों द्वारा उनके व्यक्तित्व, कौशल, बुद्धि और भावनात्मक चीजों के विभिन्न पहलुओं का परीक्षण करने के लिए किया जाता है। यही नहीं साइकोमेट्रिक टेस्ट के आधार पर उम्मीदवार को भर्ती के बारे में सूचित किया जाता है।

क्यों किया जाता है साइकोमेट्रिक टेस्ट का प्रयोग

आपको बता दें कि आज के समय में साइकोमेट्रिकटेस्ट का प्रयोग ज्यादातर कॉर्पोरेट नियोक्ताओं द्वारा अपने उम्मीदवारों का सेलेक्शन करने के लिए किया जा रहा है। इन कंपनियों के पास ऐसे कई कारण है जिनको इस टेस्ट को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, साइकोमेट्रिक टेस्ट खुद को ऐसे सरल मूल्यांकन तक ही सीमित नहीं करते हैं। इस टेस्ट के माध्यम से टेस्ट किए जाने वाले कारकों की एक विविध सारणी हैं और मुख्य विशेषताएं हैं:

क्षमता: साइकोमेट्रिक टेस्ट के जरिए कौशल और गुणों के संदर्भ में नौकरी तलाशने वालों की व्यक्ति की क्षमताओं का मूल्यांकन किया जा सकता है।

योग्यता: यह टेस्ट नौकरी के लिए उम्मीद्वार की योग्यता की जांच भी करते हैं जो उनकी रोज़ की जिम्मेदारियों को पूरा करने की क्षमता का पता लगाने के लिए जरूरी हैं। यह टेस्ट्स यह भी जांच करते हैं कि उम्मीदवार एक टीम में अच्छी तरह से भाग ले कर काम करने में सक्षम है या वह तनाव या उच्च दबाव की स्थितियों को नियंत्रित करने में सक्षम हैं।

व्यक्तित्व: साइकोमेट्रिकटेस्ट का एक अन्य पहलू भी है जिसके जरिए व्यक्ति के व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है जिसमें उम्मीदवार की प्रकृति का सामान्य आकलन शामिल है, जैसे कि अंतर्मुखी/बहिर्मुखी प्रकृति या उम्मीदवार के भावनात्मक पक्ष और पेशेवर परिपक्वता का भी परीक्षण करना।

करियर काउंसलर से लें परामर्श

अगर आप साइकोमेट्रिकटेस्ट के बारे में और कुछ जानना चाहते हैं, या फिर ये जानना चाहता है कि यह आपके करियर के लिए कैसे सहायक होगा तो हमारे नेटवर्क पर मौजूद करियर काउंसलर व प्रशिक्षक निकिता कुक्कड़ आपकी मदद कर सकती हैं। वह एक प्रतिष्ठित व जानी मानी काउंसलर है जो शिक्षा परामर्श, जीवन कौशल, प्रोफाइल निर्माण और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन में गहन अनुभव रखती हैं।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *