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रत्न-धारण करते वक्त भूल से भी न करें ये गलती, मिलता है अशुभ फल

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wearing gems stone

जब व्यक्ति अपनी समस्याओं से परेशान हो जाता है तो वो उसका समाधान खोजने के लिए हर उपाय को आजमाना चाहता है। पर आज हम बात करेंगे ज्योतिषिय समाधानों की। जिनमें से एक होता है रत्न-धारण करना। दरअसल ज्‍योतिषशास्‍त्र में रत्‍नों का विशेष महत्‍व बताया गया है कहा जाता है कि हर रत्‍न का जीवन पर अलग अलग प्रभाव पड़ता है। यही नहीं इसके पीछे कारण भी छिपा होता है, जैसा कि हम सभी जानते हैं कि शरीर का निर्माण कई प्रकार की धातुओं से मिलकर हुआ है इसलिए रत्नों का हमारे जीवन व शरीर दोनों पर गहरा ही प्रभाव पड़ता है। वैसे तो रत्नों को ग्रहों की शांति के लिए और उन्हें शक्तिशाली बनाने के लिए भी धारण किया जाता है।

लेकिन यह बात भी सच है कि रत्न-धारण करने से जीवन में न सिर्फ शुभ प्रभाव मिलते हैं बल्कि इसके साथ ही साथ यह ग्रहों के बुरे प्रभाव से भी हमारी रक्षा करता है। आपने अक्सर देखा भी होगा कि कई लोग रत्न को अंगूठी या लॉकेल में डालकर धारण करते हैं। ज्योतिषियों का कहना होता है कि रत्नों का धारण करना शुभ होता है क्योंकि इसे धारण करने से कई प्रकार की परेशानियां दूर हो जाती हैं।

लेकिन ये बात काफी कम लोग जानते हैं कि कई बार रत्नों के धारण करने से उनका अशुभ फल भी हमें प्राप्त होता है और तो और जीवन में परेशानियां और भी ज्यादा बढ़ जाती है। इसके पीछे भी वजह छिपा होता है, हमें अक्सर ही अपनी कुंडली के आधार पर ही रत्न को धारण करना चाहिए इसके अलावा रत्न-धारण करने से पहले इन बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। तो आइए जानते हैं कि रत्न के धारण करते समय किन बातों का रखना चाहिए ध्यान….

रत्न-धारण से पहले ध्यान रखें ये बात

रत्नों के कुल नौ प्रकार होते हैं जो कि सभी अलग अलग ग्रहों से जुड़ा होता है।

ध्यान रहे कि जब भी आप रत्न-धारण करने का मन बनाएं तो वो प्रात:काल का ही समय होना चाहिए।

किसी भी माह के 4, 9 और 14 तारीख को रत्न भूल से भी नहीं धारण करें क्योंकि यह तिथि रत्न-धारण के लिए अशुभ मानी जाती हैं, इसके अलावा हो सके तो अमावस्या, ग्रहण और संक्रान्ति के दिन रत्न-धारण न करें।

इस धातु में धारण करें रत्न 

ध्यान रहे कि जब भी आप रत्न-धारण करना चाहें तो उसे मोती, मूंगा और उपरत्न को चांदी की धातु में ही धारण करें। जबकि महंगे रत्नों को कोशिश करें की सोने की धातु में धारण करें। वहीं इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि जिस रत्न को धारण करने वाले हैं वो रत्न एकदम साफ होना चाहिए और कहीं से भी टूटा नहीं होना चाहिए।

कैसे करें रत्न धारण

यह बेहद ही महत्वपूर्ण सवाल है कि आखिर रत्न-धारण करने की सही प्रक्रिया क्या होनी चाहिए? इसके लिए आप सबसे पहले उस रत्न को गाय के कच्चे दूध में डाल दें। उसके बाद कुछ देर तक उसे दूध में ही रहने दें। दूध से रत्न को निकालकर उसे गंगा जल से साफ कर दें। इसके बाद अपने ईष्ट देवी की मूर्ति से पास रत्न को रख दें और कुछ देर बाद उसे धारण कर लें।

इसके अलावा इन बातों का ध्यान भी अवश्य रखें कि जिस ग्रह का रत्न आप धारण कर रहे हैं वो ग्रह कौन से दिन से जुड़ा हुआ है। उसी के अनुसार उस दिन रत्न को धारण करें। कहने का अर्थ है कि सूर्य ग्रह से जुड़े रत्न को रविवार के दिन धारण करें। बुध ग्रह से जुड़े रत्न को बुधवार को धारण करें और इत्यादि। रत्न-धारण करते समय सूर्य की ओर मुख होना चाहिए और रत्न को दोपहर से पहले ही धारण करना चाहिए।

ज्योतिष विद्या में पुलकित गुप्ता को गहरा अनुभव, अगर आप चाहे तो इनसे अपने जीवन में आ रही समस्याओं के लिए मदद ले सकते हैं। संपर्क करने के लिए यहां क्लिक करें

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