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क्या बच्चे भी होते हैं अवसाद का शिकार ? क्या है इसकी वजह?

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बच्चों में अवसाद

आज के समय में यंग व बुजुर्ग लोगों की लाइफ में ही समस्या नहीं है बल्कि इसके अलावा बच्चों में भी अवसाद की समस्या उत्पन्न होने लगी हैं। हालांकि इन चीजों पर हम उतना ध्यान नहीं देते हैं जिसकी वजह से हमारे बच्चे हमसे काफी दूर हो जाते हैं। जैसा कि आप भी जानते हैं कि बच्चों पर पढ़ाई का कितना दबाव रहता है वो सही निर्णय लेने के चक्कर में कई बार काफी ज्यादा चिंता करने लगते हैं क्योंकि उन्हें कोई सही मार्गदर्शक नहीं मिल पाता है जिससे वो अपनी हर बात शेयर कर सके और उसके अनुरूप उसे मार्गदर्शन कर सके।

इसके लिए आपको एक बेहतरीन करियर काउंसलर से मिलना चाहिए जो अनुभवी हो और आपके बच्चे का सही मार्गदर्शन कर सके। देखा जाए तो चिंता व अवसाद की स्थिति उन बच्चों में ज्यादा देखने को मिलती है जो हॉस्टल में रहते हैं उदाहरण के तौर पर देखें तो कोटा में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे अवसाद का शिकार हो जाते हैं।

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आईआईटी व एनआईटी जैसी परीक्षाओं में सफल होने की होड़ में कई बार तो ये बच्चे नशे कि लत में भी पड़ जाते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी होते हैं जो हताश होकर आत्महत्या तक कर लेते हें। यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि आप खुद भी अखबारों व न्यूज चैनलों में ऐसी खबरें सुनते होंगे। हालांकि यह कहना गलत नहीं होगा कि कोटा हो या कोई और जगह हर जगह हर माता-पिता को उनके बच्चे प्रथम स्थान पर चाहिए। प्रवेशिका में सबको अच्छे रैंक चाहिए। भले बच्चा चाहे कुछ, उनको इससे मतलब नहीं। अगर पड़ोस का बच्चे एडमिशन आईआईटी में हो गया तो वो अपने बच्चे पर भी दबाव बनाने लगते हैं। ऐसे में बच्चे अवसाद की स्थिति में नहीं जाएंगे तो क्या होगा?

लंबे समय तक तनावग्रस्त रहने पर अवसाद की समस्या पैदा हो जाती है, जो एक गंभीर मानसिक बीमारी का रूप ले लेती है। बच्चे में अवसाद जैसी समस्या का उत्तपन्न होने का पहला कारण है उन पर पड़ने वाले तरह-तरह के दबाव। अक्सर अभिभावक भी बच्चों पर पढ़ाई और दूसरी बातों को लेकर ज्यादा दबाव डालने लगते हैं। बच्चों को परीक्षा में ज्यादा से ज्यादा मार्क्स लाने के साथ ही और भी कई तरह की चिंता होती है। कई बार उन्हें स्कूल में या दोस्तों के बीच बुलिंग की समस्या का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा कई बार तो यौन शोषण का शिकार होने पर भी बच्चे अवसाद में डूब जाते हैं इसलिए अभिभवकों को इसे लेकर सतर्क रहना चाहिए।

आज हम आपको कुछ लक्षण बताने जा रहे हैं जिससे आप पहचान सकते हैं कि आपका बच्चा अवसाद जैसी गंभीर मानसिक विकार से जूझ रहा है।

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बच्चों में अवसाद के लक्षण

अगर बच्चा तनाव या डिप्रेशन का शिकार हो तो उसे ठीक से नींद नहीं आती। वह देर तक जागता रहता है। जो बच्चा तनाव व डिप्रेशन से जूझता है उन बच्चों की नींद सुबह बहुत जल्दी खुल जाती है।

तनाव या फिर अवसाद से जूझ रहे बच्चों को छोटी छोटी बात पर गुस्सा आ जाता है। कई बार तो वो अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं कर पाते हैं।

तनाव और अवसाद से पीड़ित बच्चे ज्यादा समय अकेले बिताना पसंद करते हैं। अक्सर वे कमरे में बंद बिस्तर पर लेटे रहते हैं। वो अपने परिवार में भी जल्दी किसी से बात नहीं करते और ना ही टीवी देखते हैं। वे लोगों से दूरी बनाए रखते हैं।

तनाव की समस्या से जूझ रहे बच्चे खाना पीना कम कर देते हैं, सही ढंग से भोजन नहीं करने से वे कमजोर हो जाते हैं।

करियर काउंसलर से करें संपर्क

अगर आप एक बेहतर अभिभावक हैं व अपने बच्चे को उज्जवल भविष्य देना चाहते हैं तो सबसे पहले जरूरत है की आप खुद को बदलें। बच्चे पर दबाव बनाने के बदले उसकी परेशानियों को समझें इसके लिए करियर काउंसलर एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है, जो आपके बच्चे का सही मार्गदर्शन करेगा। हमारे नेटवर्क पर मौजूद अनुभवी करियर काउंसल व मेंटर के रूप में मौजूद हैं शांतनु सिंह। जो न कि आपके बच्चे को पढ़ाई को लेकर सही मार्गदर्शन देंगे बल्कि उसकी रूचियों के अनुसार उसे सही विषय चुनने का निर्णय भी प्रदान करेंगे। शांतनु सिंह बीटेक करने के साथ कोटा में कोचिंग कक्षाओं में शिक्षकों के रूप में भी काम कर चुके हैं।

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