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चिंता और डिप्रेशन: क्या है इनके बीच का अंतर, कैसे बचें इससे?

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stress and depresion

आज के समय में हर कोई किसी न किसी तरह के मानसिक विकारों से जूझ रहा है, जिसमें कोई चिंता, तनाव व डिप्रेशन से जूझ रहा है। खासकर बात करें कोरोना काल की तो इस समय हर किसी को मानसिक व शारीरिक रूप से अस्वस्थ है। इस समय हर दूसरा व्यक्ति चिंताओं से घिरा रहता है। हालांकि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, लोग दिन-रात काम में रहते हैं जिसकी वजह से तनाव होता है या फिर कई बार तो लोग चिंता के अलावा लोग डिप्रेशन का भी शिकार हो जाते हैं। लेकिन सामान्य लोग चिंता व डिप्रेशन में अंतर नहीं समझ पाते हैं और इसे एक समझ लेते हैं। पर इन दोनों में काफी अंतर होता है। आज हम आपको इस लेख के जरिए बताएंगे चिंता और डिप्रेशन में क्या अंतर है?

चिंता क्या है ?

चिंता को बीमारी नहीं कह सकते हैं लेकिन हां ये एक ऐसी भावना है जो व्यक्ति को मानसिक रूप से प्रभावित करती है। ऐसी हालत में हर कोई मानसिक व भावनात्मक रूप से दबा हुआ होता है। इंसान को चिंता कई वजहों से घेरती हैं जब उनकी उम्मीदें पूरी नहीं होती, या किसी की कोई अपेक्षा पूरी नहीं होती, या फिर किसी अपने के दूर होने के कारण भी होती है। हालांकि आज के लाइफस्टाइल में तनाव, टेंशन, चिंता, फ्रिक जैसें शब्द सामान्य हो गए है क्योंकि आधे से ज्यादा लोग इन समस्याओं से घिरे हुए हैं।

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डिप्रेशन क्या है ?

डिप्रेशन व तनाव को एक समझना सही नहीं है हालांकि लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं पर डिप्रेशन तब होता है जब व्यक्ति लंबे समय से तनाव से ग्रस्त होता है। इसमें व्यक्ति खुद को काफी ज्यादा डिप्रेशन में चला जाता है और दबा दबा महसूस होता है। वैसे देखा जाए तो चिंता और डिप्रेशन दोनों ही मानसिक पीड़ा है। इनके लक्षण भी लगभग एक ही जैसे हैं जिसकी वजह से इन दोनों को लोग सामान्य समझ लेते हैं।

चिंता और डिप्रेशन दोनों के ही उचित उपाय के लिए इनके बीच का अंतर मालूम होना आवश्यक हैं। अपने रोजमर्रा के कामों को लेकर जीवन में थोड़ी-बहुत चिंता, एंजायटी हर इंसान को होती है। लेकिन, यदि कोई व्यक्ति अधिक चिंतित रहने लगे और हर छोटी बात पर गहनता से विचार करें, जिससे तनाव होने लगे, तो यह सोच का विषय है।

चिंता और डिप्रेशन में अंतर

इन दोनों को सामान्य समझना गलत होगा ऐसे में हम कोशिश करेंगे कि इन दोनों में अंतर को समझा सकें।

सबसे पहले तो ये बता दें कि चिंता या तनाव आपके जीवन में चल रही समस्याओं से उत्पन्न होती हैं लेकिन वहीं डिप्रेशन किसी भी ऐसे कारण से हो सकती है, जो पहले घटित हुआ है।

अगर कोई व्यक्ति चिंता से पीड़ित है तो वो कुछ समय में ठीक हो सकती है लेकिन वहीं डिप्रेशन बहुत ही लंबे समय तक रहता है, इसका समय एक साल या फिर उससे ज्यादा भी हो सकता है।

चिंता या तनाव के कारण एड्रेनालाइन का स्तर बढ़ जाता है लेकिन, अवसाद या डिप्रेशन में मस्तिष्क में थकान बढ़ जाती है।

चिंता यदि कम हो, तो वो लाभदायक भी साबित हो सकती है लेकिन, डिप्रेशन से सिर्फ नुकसान ही होता है। चिंता के कारण स्पष्ट होते हैं लेकिन, अवसाद का कोई भी कारण हो सकता है।

चिंता को समाज सहज नजरिए से देखता है लेकिन, डिप्रेशन को आज भी सामाजिक रूप से अपमानजनक माना जाता है।

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार चिंता करते रहने से व्यक्ति एंजाइटी का भी शिकार हो जाता है। एंजाइटी का शिकार हो चुका इंसान बहुत ज्यादा चिंता करता है। अगर कोई शख्स कम से कम 6 महीनों के समय में अधिकांश दिन, या अपने स्वास्थ्य, काम, सामाजिक बातचीत, रोजमर्रा की परिस्थितियों के बारे हद से ज्यादा सोचता है और परेशान रहता है तो यह एक बहुत ही गंभीर लक्षण है कि वो चिंताग्रस्त है।

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चिंता और डिप्रेशन की में उपचार:

इन समस्याओं को निपटाने के लिए आप किसी मनोवैज्ञानिक से संपर्क कर सकते हैं, आपको वो इससे निपटने के लिए साइकोलॉजिकल मदद कर सकते हैं। मेडिटेशन भी इसका एक उपाय है।

साइकोलॉजिकल मदद एक ऐसा तरीका है, जो चिंता और डिप्रेशन से जूझ रहे लोगों की मदद कर सकता है। साइकोलॉजिकल मदद से लोगों में सकारातमक सोच, चिंता में कमी आती है। वहीं बात करें मेडिकेशन की तो चिंता और डिप्रेशन से पूरी तरह से निजात पाने के लिए सही तरीका नहीं है। मेडिकेशन से केवल इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है। लेकिन यह भी सच है कि चिंता और डिप्रेशन को जड़ से खत्म नहीं कर सकता है।

परामर्श के लिए करें बेहतर मनोवैज्ञानिक की खोज

अगर आप चाहे तो चिंता, अवसाद व तनाव विकार के लिए मनोचिकित्सक निशा जॉन से संपर्क कर रहे हैं यह एक नैदानिक मनोवैज्ञानिक हैं। Spark.live नेटवर्क पर मौजूद निशा जॉन आपकी इन समस्याओं से निपटने में बेहतर मदद कर सकती हैं।

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