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शास्त्रीय संगीत में है भावों व रागों के बीच की खूबसूरती का सरगम

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शास्त्रीय संगीत

शास्त्रीय संगीत का अपना एक अलग ही महत्व है, इसके बगैर मानव जीवन खाली सा लगने लगता है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि मानव शरीर और मन को ध्वनि गहराई तक प्रभावित करता है। कई बार तो संगीत हमें इस तरह की भावनाओं से निपटने में मदद करता है और इस तरह शक्ति प्रदान करता है जो हमारे जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है और हमारे नियंत्रण की भावना को बढ़ा सकता है। यह स्वस्थ भावनाओं का समर्थन करता है और इसलिए विभिन्न शारीरिक के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की संभावना को बढ़ाता है। आज हम आपको इस लेख के जरिए विशेष रूप से शास्त्रीय संगीत के बारे में बताएंगे जिसका भारत देश में काफी महत्व भी है।

भारत में शास्त्रीय संगीत का उदय

भारत में शास्त्रीय संगीत का इतिहास वैदिक काल से शुरू होता है। सामवेद संगीत पर आधारित दुनिया कि पहली पुस्तक है। इसके बाद भरतमुनि के नाट्यशास्त्र में भी शास्त्रीय संगीत का वर्णन है। हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत उत्तर भारत में प्रचलित हुआ। यह संगीत हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्मों में प्रचलित हुआ। इसमें हिन्दू संगीतकारों को पंडित जबकि मुस्लिम संगीतकारों को उस्ताद कहा जाता है। यह मंदिरों और राजाओं के दरबारों में काफी प्रचलित हुआ। भक्ति आंदोलन और सूफी आंदोलन के समय काफी प्रसिद्ध हुआ। संगीत सुनने के कई फायदे होते हैं।

यह बात तो सभी को मालूम है पर कोई आपसे पूछ बैठे कि जरा बताइए कि क्या इन फायदों के पीछे कोई वैज्ञानिक आधार है तो आप सोच में पड़ जाएँगे। दरअसल हर तरह के संगीत को सुनने से आप पर अच्छा प्रभाव पड़े यह भी कतई जरूरी नहीं है। आजकल का जीवन मानसिक तनाव से भरा हुआ है हमें तरह-तरह की तनाव रहते हैं और इस प्रकार हम कोई भी काम मन लगाकर नहीं कर पाते हैं अतः जरूरी है कि हम संगीत को अपने जीवन में लाएं संगीत ही है कैसा है जो हमें भीतरी खुशी देता है और आज के समय में हर व्यक्ति संगीत सुन सकता है क्योंकि सभी के पास मोबाइल होता है

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भारतीय शास्त्रीय संगीत

भारतीय शास्त्रीय संगीत की दो मूल शाखाएं हैं- कर्नाटक संगीत, जिसका संबंध दक्षिण भारत से है तो दूसरा हिंदुस्तानी संगीत जो उत्तर भारत में प्रचलित है। इन दोनों में कुछ अंतर है जो इन्हें एक दूसरे से भिन्न बनाते हैं। कर्नाटक संगीत का संबंध दक्षिण भारत से है जबकि हिंदुस्तानी संगीत का उत्तर भारत से है। हिंदुस्तानी संगीत में ध्वनि का महत्व ज्यादा है, जबकि कर्नाटक संगीत में भावों का।

हम ऐसा बिल्कुल नहीं कह रहे हैं कि कर्नाटक संगीतकारों का ध्वनि का ज्ञान नहीं है बल्कि इनके संगीत में भाव की प्राथमिकता होती है। क्योंकि चार सौ साल के दौरान कर्नाटक संगीत में ध्वनि की जगह भाव मुख्य हो गए हैं। ऐसा भक्ति आंदोलन के कारण हुआ है जो दक्षिण भारत में चलाया गया था। वहीं बात करें हिंदुस्तानी संगीत की तो इसमें ध्वनी की प्राथमिकता दी गई है। यही कारण है कि यह मन और शरीर पर एक ख़ास प्रभाव डालता है। हिंदुस्तानी संगीत के तहत संगीत के कई अनुभाग हैं। जिससे रूबरू होने के लिए आपको किसी अनुभवी संगीतकार से ट्रेनिंग लेनी होगी। 

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मिलें शास्त्रीय संगीतकार से

इसकी खूबी को समझने के लिए Spark.live पर मौजूद शास्त्रीय गायिका सुमिता दत्ता आपकी मदद कर सकती हैं। यह ग़ज़ल और सूफी गायिका हैं। अगर आप शास्त्रीय संगीत को ग्रहण करने के लिए तैयार हैं तो आप इनके सत्र में भाग ले सकते हैं। सुमिता दत्ता अपने इस सत्र में सेमी क्लासिक म्यूजिक-जैसे दात्रा, गजल, सूफी, डिवोशनल म्यूजिक भजन, कबीर दोहा, मंत्र के गायन कला का सही तरीका बताएंगी। यह संगीत पाठ्यक्रम आपको हिंदुस्तानी क्लासिकल वोकल म्यूजिक की बुनियादी बातों को सिखाएगा और यह बताएगा कि कैसे अपने श्रोता में भावनाओं की एक श्रृंखला को प्रेरित करने के लिए संगीत के अपने ज्ञान का उपयोग करें। 

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