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ये लक्षण बताते हैं, हमें मेंटल थैरेपी की है आवश्यकता (Do I Need Therapy?)

हमारे जीवन में कई तरह की समस्याएं आती हैं जिनका सामना कई बार तो हम अच्छे से करते हैं लेकिन कई बार ऐसा होता है कि अब हम उन समस्याओं को नहीं सुलझा सकते हैं। क्योंकि हर चीज हमारे बस में नहीं होती है, इन छोटी छोटी चीजों से ही व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान होता है और कब ये चीजें बड़ी बन जाती हैं किसी को भी पता नहीं चल पाता है। समय के साथ साथ ये छोटी चीजें ही मानसिक विकार का रूप ले लेती हैं। मेंटल थैरेपी के जरिए आप कई सारी समस्याओं से निजात पा सकते हैं।

वैसे जिस तरह हम अपनी शारीरिक समस्या के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं उसी तरह मनोवैज्ञानिक काउंसर की आवश्यकता भी हमें पड़ती ही रहती हैं। ये हमारे मानसिक स्थिति से जुड़ी समस्याओं के उपचार के लिए बेहतर माने जाते हैं। हालांकि आप चाहे तो किसी भी तरह की समस्या के लिए मेंटल हेल्थ थैरेपी ले सकते हैं।

ये थैरेपी आपको एक मनोवैज्ञानिक काउंसलर ही दे सकता है। जाहिर सी बात है कि आपके लिए ये शब्द बिल्कुल नया होगा लेकिन ये बेहद काम की थैरेपी है। सबसे पहले तो आपको ये बता दें कि आखिर मेंटल हेल्थ थैरेपी होता क्या है और इसकी जरूरत किसे पड़ती है ?

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आज आप ऐसे जमाने में जी रहे हैं जहां कुछ भी नामुमकिन नहीं है इसलिए आए दिन किसी तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं जो हमें अंदर ही अंदर परेशान कर रहा है तो हमें मनोवैज्ञानिक काउंसलर से मदद ले लेनी चाहिए। थैरेपी आज के समय में बेहद जरूरी बन चुका है, क्योंकि आजकल की इस भागदौड़ भरी लाइफ में तनाव व चिड़चिड़ापन को दूर करने का महज एक यही कारगर उपाय है।

लेकिन ये बात भी सच है कि लोग मेंटल थैरेपी को कई बार गलत तरीके से ले लेते हैं। इस थैरेपी की आवश्यकता किसी भी व्यक्ति को पड़ सकती है इसके लिए जरूरी नहीं है कि आप किसी मानसिक बीमारी से ग्रसित है। अगर आपको छोटी छोटी चीजों में समस्या आ रही है तो भी आपको थैरेपी लेना चाहिए।

कब लेनी चाहिए मेंटल थैरेपी

अगर आपको वर्क से संबंधित समस्या है तो भी आप थैरेपी ले सकते हैं या फिर आपके परिवार में , रिश्तों से जुड़ी समस्या हैं तो भी आप ये थैरेपी ले सकते हैं। कई बार ऐसा भी लगता है कि हम अपने लाइफ के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं तो ऐसे में भी आप थैरेपी ले सकते हैं क्योंकि यह आपके पर्सनल ग्रोथ में भी मदद करता है। थैरेपी आपके सारे तनाव को दूर करने में मदद करती है।

इसके अलावा भी अन्य कई कारण हैं जैसे मानसिक रूप से असंतुलन होना यानि की किसी भी बात से अगर आप बेहद ज्यादा परेशान हैं तो आप मनोवैज्ञानिक काउंसलर से मिलें।

अगर आपको सामान्यत: घबराहट सा लगा रहता है जैसे हांथ में पसीना होना या फिर बीपी बढ़ना जो कि एक तरह का तनाव का ही कारण होता है ऐसे में मनोवैज्ञानिक काउंसलर आपकी मदद कर सकता है।

कई बार ऐसा भी महसूस होता है कि हम दुविधाओं से घिरे होते हैं और उसमें हमारे परिवार या फिर दोस्त कोई भी मदद नहीं कर सकता है ऐसे में हम किसी प्रोफेशनल काउंसलर से मिल सकते हैं जो कि आपको मेंटल थैरेपी देते हैं।

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मनोवैज्ञानिक काउंसलर आपको सही रास्ता दिखाता है, वो एक अनुभवी इंसान होता है जो कि आपको आपकी समस्याओं से लड़ने के लिए तैयार करता है। इन समस्याओं से उबरने के लिए ही जो तरीके अपनाए जाते हैं उसे मेंटल हेल्थ थैरेपी कहा जाता है।

अगर आपको लगता है कि आप भी अपने लाइफ में किसी समस्या से परेशान है या फिर आपको एक सही सलाहकार की आवश्यकता है तो आप येशा झावेरी से मदद ले सकते हैं।

हद से ज्यादा बढ़ जाए मानसिक तनाव, तो यहां जानें क्या करें

एक व्यक्ति के अंदर तनाव होना आम बात है लेकिन जब यह हद से अधिक बढ़ जाता है तो यह बेहद ही खतरनाक हो जाता है। पर आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में ये अधिकतर लोगों में देखने व सुनने को मिल जाता है। वैसे आपको बता दें कि तनाव मन स्थिति से उत्पन्न हुआ एक मानसिक विकार है जो कि मन की स्थिति एवं परिस्थिति के बीच असंतुलन एवं असामंजस्य की वजह से जन्म लेता है।

मनोवैज्ञानिकों की मानें तो ये एक बहुत बड़ी ही बीमारी है, जो मन एवं भावनाओं में गहरी दरार पैदा करता है। स्ट्रेस में रहने की वजह से हमें कई सारी बीमारियों का सामना करना पड़ता है जिसमें डिप्रेशन या फिर माइग्रेन भी हो सकता है। कई बार ये तनाव हमारे व्यवहार पर भी असर करता है जैसे चिड़चिड़ापन या फिर ज्यादा गुस्सा आना। इसलिए अगर आप भी हमेशा तनाव में रहते हैं तो आपको सावधान रहना चाहिए क्योंकि ये आपकी जिंदगी में काफी कुछ बदल सकता है।

तनाव से दूर होना चाहते हैं तो आप कुछ टिप्स को फॉलोव कर सकते हैं या फिर आप चाहे तो किसी मनोवैज्ञानिक की सलाह भी ले सकते हैं जो आपके तनाव यानि की स्ट्रेस लेवल को कम करने में काफी मददगार साबित होंगे। तो आइए जानते हैं कुछ ऐसे उपाय के बारे में जिसे अपनाकर तनाव से आसानी से निपटा जा सकता है

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तनाव दूर करने के उपाय

मेडीटेशन

स्ट्रेस, तनाव या फिर किसी भी तरह की चिंता के लिए सबसे बेहतर उपाय है मेडिटेशन। पर ध्यान रहे कि आपका मेडिटेशन तभी सफल होगा जब आप इसे किसी शांत जगह पर बैठकर कर रहे हों, इस दौरान आप ओउम् का जाप कर सकत हैं। आप चाहें तो कुछ पॉजिटिव भी सोच सकते हैं। बता दें कि रोजाना मेडीटेशन करने से आप न सिर्फ स्ट्रेस से दूर रहेंगे बल्कि यह आपको स्वास्थ भी अच्छा रहता है।

खुद को समय दें

अपने स्ट्रेस लेवल को कम करने व खुद से दूर भगाने के लिए आपको अपने आप से पहले ये पूछना होगा कि ऐसे परेशान होने से क्‍या होगा? यही नहीं इसके अलावा अपने व्यवहार पर भी ध्यान देना होगा अगर आपको लगता है कि उसमें कोई समस्या है तो आपको उसे सुधारने की आवश्यकता है। आप चाहें तो तनाव को दूर करने के लिए अपना पसंदीदा खाना भी खा सकते हैं इससे अपने आप ही तनाव गायब हो जाएगा।

दोस्तों के साथ वक्त बिताएं

अकेले बैठकर बोर होने व सोचने से अच्छा है कि आप बाहर निकले व अक्सर स्ट्रेस होने पर आप अकेला रहना पसंद करते है लेकिन इससे आपकी समस्या और भी बढ़ सकती है इसलिए लोगों से बातचीत करें। अपनी फैमिली और फ्रैंड्स के साथ समय बिताएं। ऐसा करने से आपको हल्‍का महसूस होगा।

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डांस करें

कई लोग अपने स्ट्रेस को दूर करने के लिए डांस करते हैं, वैसे देखा जाए तो ये सबसे सबसे बेस्ट आइडिया है। आप चाहे तो ट्राई कर सकते हैं जब आप तनाव में हो तो उसे दूर करने के लिए अपने किसी फेवरेट गाने पर खुलकर डांस करें। ऐसा करने से आपका मूड फ्रेश हो जाएगा और आपको हल्का महसूस होगा।

तनाव में खुलकर हंसे

खुलकर हंसना भी स्ट्रेस दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है इसके अलावा ये आपकी सेहत के लिए भी अच्छा होता है। शोध में यह भी कहा गया है कि खुलकर हंसने से तनाव दूर होता है। इससे कॉर्टिसोल लोअर होता है, जिससे दिमाग में एंडोमॉर्फिन कैमिकल रिलीज होते हैं। इससे आपका तनाव दूर होता है। इससे लिए आप कोई कॉमेडी शो देख सकते हैं या फिर अपने किसी हंसमुख दोस्त से बात कर सकते हैं।

अगर आप भी तनाव या फिर किसी मानसिक विकार से जूझ रहे हैं तो आप प्रमाणित नैदानिक ​​मनोवैज्ञानिक रीमा साह से मदद ले सकते हैं।

ये हैं मशहूर २५ ज्योतिषी (Top 25 Astrologers)

ज्योतिष का क्षेत्र काफी व्यापक है, इसमें हमारे जीवन से जुड़ी तमाम समस्याओं का समाधान मिल जाता है। यही वजह है कि दिन प्रतिदिन लोगों की दिलचस्पी इसमें बढ़ते ही जा रही है। देशभर में कई सारे ज्योतिषी हैं, इसलिए आज हम आपको कुछ ऐसे जाने-माने मशहूर ज्योतिषाचार्य के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी भविष्यवाणियां एकदम सटीक और सही साबित होती हैं। आइए जाने देशभर के टॉप २५ ज्योतिषाचार्यों के बारे में , जिनकी ज्योतिष सेवाएं विश्व प्रसिद्ध हैं। हालांकि आजकल लोगों के पास इतना वक्त नहीं है कि किसी ज्योतिषी के पास बैठकर समस्याओं का ब्यौरा दें इसलिए लोग चाहते हैं कि वो उनसे ऑनलाइन संपर्क कर परामर्श ले सकें।

ये हैं २५ मशहूर ज्योतिषी

१. एस. गणेश (S. ganesh)
भाषा : हिंदी, अंग्रेजी

देश के महान ज्योतिषाचार्यों में एस गणेश का नाम आता है ये पारंपरिक रूप से हिंदू तमिल परिवार से हैं। बचपन से ही ज्योतिष में आगे बढ़ने की रुचि थी। गणेश अचार्य को ज्योतिष के क्षेत्र में पारंपरिक और आधुनिक दोनों ज्ञान है। यह ज्योतिष के शिक्षक भी रह चुके हैं। अभी तक ये हजारों छात्रों को ज्योतिष का ज्ञान दे चुके हैं। करीब ४२ वर्षों से अधिक समय से ज्योतिष के क्षेत्र में काम करते आ रहे हैं।

२. सोनल वर्मा (Sonal Verma)
भाषा: अंग्रेजी व हिंदी

ज्योतिषि सोनल वर्मा आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। ज्योतिष के क्षेत्र में ३२ वर्षों का अनुभव होने के साथ ही साथ भारत के मशहूर चैनल पर इनका दैनिक पूर्वानुमान शो ‘TEZ TAARE’ में ये करीब 8 साल से नजर आती है। ज्योतिष क्षेत्र में ये टैरो, एस्ट्रो-न्यूमरोलॉजी, ऑरा रीडिंग, क्रिस्टल थेरेपी, मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शन, परामर्श, वास्तु सुधार की विशेषरूप से जानकारी रखती है।

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३. सुभाजीत बैनर्जी (Subhajit Banerjee)
भाषा : बांग्ला

ज्योतिषाचार्य सुभाजीत बैनर्जी जानी मानी ज्योतिषियों में से मशहूर हैं। आप इनसे विशेष रूप से घर में अशांति, विवाह में बाधाएं, कामकाजी जीवन में बाधाएं, वैवाहिक समस्याएं, भाग्य बताने और विवाह संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए संपर्क कर सकते हैं।

४. विष्णु शास्त्री (Vishnu Shastri)
भाषा : बांग्ला, अंग्रेजी, हिंदी

दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषी में से एक है ज्योतिष विष्णु शास्त्री जी। इनके पास देश विदेश से हजारों की संख्या में छात्र आते हैं। करीब २७ वर्षों में लाखों लोग इनके ज्योतिषीय विद्या के मार्गदर्शन से लाभान्वित हुए हैं। ये विशेष रूप से भारतीय राजनीतिज्ञों और उद्योगपतियों के बीच अपनी सटीक भविष्यवाणी और जादुई उपाय के लिए बहुत लोकप्रिय है।

५ . एस्ट्रो कुमार (Astro Kumar)
भाषा: तमिल

ज्योतिष के क्षेत्र में एस्ट्रो कुमार को कई वर्षों का अनुभव है ये विशेषरूप से करियर, विवाह, रोजगार, शिक्षा, बच्चों के भविष्य, घर और पैसे से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए जाने जाते हैं। आप इन सभी समस्याओं से जुड़े प्रश्न इनसे पूछ सकते हैं।

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६. दिव्यश्री ज्योतिषी (Divyashree Jyotishi)
भाषा: कन्नड़

ज्योतिष विषय में पीएचडी करने के अलावा दिव्यश्री ने ऑनलाइन और ऑफलाइन कई मेडिटेशन कार्यशालाएं भी आयोजित की है। दुनियाभर में इनके ब्लॉग चर्चित हैं, इन्होने करीब ८००० से भी अधिक कुंडली और जन्म चार्ट का अध्ययन किया है। कुंडली और जन्म चार्ट संबंधित जानकारी के लिए आप इनसे संपर्क कर सकते हैं।

७. आचार्य जिज्ञासु (Acharya Jigyasu)
भाषा : हिंदी, अंग्रेजी

आचार्य जिज्ञासु को ज्योतिष के क्षेत्र में २० सालों का अनुभव है। इन्होने लखनऊ विश्वविद्यालय से ‘ज्योति विज्ञान’ में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की और गुरुकुल विश्व विद्यापीठ, लखनऊ – भारत से ज्योतिष में अपना “शास्त्री” और “आचार्य” उपाधि प्राप्त की। उन्हें ज्योतिष, होरी, वास्तु टैरो, सगुन, शास्त्री आदि के क्षेत्र में कई डिग्री और सजावट से सम्मानित किया गया है। वहीं ये विशेषरूप से वैदिक ज्योतिष, टैरो कार्ड रीडर, वासु, न्यूमेरोलॉजी के जानकार है।

८. अरुलमुरुगन (Arul Murugan)
भाषा: अंग्रेजी

अरुलमुरुगन एक जाने माने अंकशास्त्री होने के साथ ही साथ मशहूर हस्ती भी है। अंक ज्योतिष के क्षेत्र में इन्हें २५ वर्षों का अनुभव प्राप्त है। वैसे आपने इन्हें कई प्रमुख टेलीविजन चैनलों में भी देखा होगा, इन्होने कई सारे लाइव कार्यक्रम भी किए है जिसमें स्टार विजय, टाइम्स नाउ, एशियानेट, ज़ी टीवी, बैंगलोर, सी बैंगलोर, आईसीई टीवी, सीसीसी इंडिया, ४ एम चैनल शामिल हैं। आप इनसे अंक ज्योतिष से जुड़ी जानकारी के लिए संपर्क कर सकते हैं।

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९. सुल्ताना चटर्जी (Sulata’S Open Window)
भाषा : बांग्ला

सुल्ताना चटर्जी का नाम भी इस लिस्ट में आता है ये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक जानी मानी व अनुभवी ज्योतिषी और रेकी चिकित्सक हैं। आध्यात्मिकता पर उनकी प्रेरणादायक बातें लोग न सिर्फ भारत में सुनते हैं बल्कि विदेशों में भी इन्हें पसंद करते हैं। वह एक अनुभवी ज्योतिषी के साथ ही एक रेकी चिकित्सक भी हैं। सुल्ताना चटर्जी ने तिरुपति के मशहूर ज्योतिषी पंडित जॉयस से ज्योतिष ज्ञान प्राप्त किया है। अगर आपको जन्म प्रमाण पत्र या वैवाहिक समस्या या करियर से संबंधित किसी भी तरह की समस्या है तो आप इनसे मदद ले सकते हैं।

१०. मेघराज भारद्वाज (Meghraj Bharadwaj) 
भाषा : हिंदी

मेघराज भारद्वाज को ज्योतिष में १५ साल का अनुभव प्राप्त है, ये एक मशहूर धर्मशास्त्री और ज्योतिषी भी हैं। ये अंतराष्ट्रीय एस्ट्रोलॉजी फाउंडेशन, अमेरिका के सदस्य हैं। यह वैदिक ज्योतिष विषय में विशेष जानकारी रखते हैं। अगर आपको वैदिक ज्योतिष से संबंधित कोई भी जानकारी चाहिए तो आप इनसे संपर्क कर सकते हैं।

११. अरूण शर्मा गुरूजी (Arun sharma Guruji)
भाषा : अंग्रेजी, कन्नड़

अरूण शर्मा गुरूजी ने श्री मोकांबिका एस्ट्रो सेंटर की स्थापना की है। अरूण शर्मा दक्षिण भारत के जाने माने ज्योतिष में से एक है। ज्योतिष के क्षेत्र में ये लंबे समय से अनुभव प्राप्त है। जीवन में आ रही समस्याओं तथा स्वास्थ संबंधित व खुशियों में आ रही बाधाओं से संबंधित विषयों पर आप इनसे सलाह प्राप्त कर सकते हैं। इनके पास हस्तरेखा का विशेष ज्ञान भी है।

१२. पुलकित गुप्ता (Pulkit Gupta) 
भाषा : हिंदी

महज १२ साल की उम्र से ज्योतिष विद्या सीखने वाले पुलकित गुप्ता को सप्तऋषि ज्योतिष से भी प्रमाण पत्र प्राप्त है। बचपन से, वह ग्रहों में रूचि रखना शुरू कर चुके थें। वह ज्योतिषीय समाधानों के साथ-साथ कर्म संतुलन पर लोगों का मार्गदर्शन करते रहे हैं। उनका मिशन ज्योतिष का ज्ञान फैलाना है ताकि सभी को इससे लाभ हो।

१३. श्री राघवेंद्र एस्ट्रो सेंटर (Sree Raghavendra Astro Center)
भाषा : हिंदी, अंग्रेजी

श्री राघवेंद्र एस्ट्रो सेंटर का नाम देशभर में विख्यात है, ये जाने माने ज्योतिष संस्था में से एक है। यदि आप किसी भी प्रकार की ज्योतिष समस्याओं से पीड़ित हैं तो ये आपकी मदद कर सकते हैं। इन्हें काला जादू व प्रेम संबंधी समस्याओं को हल करने के लिए अद्भुत और अच्छा अनुभव प्राप्त है।

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१४. क्लिप एस्ट्रो (cliip Astro)
भाषा : हिंदी, अंग्रेजी

क्लिप एस्ट्रो एक संस्था है जिसे ज्योतिष दीपक शर्मा ने स्थापित किया है। दीपक शर्मा को ज्योतिष के क्षेत्र में ८ वर्षों से भी ज्यादा का अनुभव है। यह एक पेशेवर ज्योतिषी हैं, इनका परिवार कई पीढ़ियों से इस क्षेत्र में जुड़ा हुआ है। अंकशास्त्र के साथ-साथ वह ज्योतिष, हस्तरेखा और वास्तु के भी विशेषज्ञ हैं। यह मुख्य रूप से तलाक के मामलों से निपटने में लगे हुए हैं, और वे तनाव या अवसाद की समस्याओं का समाधान करते हैं।

१५. आचार्य रजनीश (Acharya Rajneesh)
भाषा : हिंदी

ब्राह्मण परिवार में जन्मे आचार्य रजनीश को ज्योतिष के क्षेत्र में ३० सालों से अधिक का अनुभव है। ये विशेषरूप से वैदिक ज्योतिष फलित, एस्ट्रो साइकोलॉजी, रिलेशनशिप समस्या, वैवाहिक समस्या, आर्थिक समस्या, स्वास्थ समस्या, रत्न सलाहकार, आध्यात्मिक, लाल किताब, वास्तु सलाहकार, ग्रह रेडिएशन और ग्रह इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फोर्स के जानकार है। इससे जुड़ी किसी भी तरह की समस्या के समाधान आप इनसे पा सकते हैं।

१६. पंडित श्री टी.आर. शास्त्री (Pandit Sri T.R. Shastri)  
भाषा: अंग्रेजी व हिंदी

मशहूर ज्योतिषियों की इस लिस्ट में पंडित श्री टी.आर. शास्त्री का नाम भी शामिल है, इन्हें वैदिक ज्योतिष में कुल ४५ वर्षों का अनुभव है। ये २५ वर्षों से ज्योतिष का अभ्यास कर रहे हैं। व्यक्ति की हाथों की रेखाएं व चेहरे देखकर भविष्य बताने में ये विशेष रूप से माहिर है। इसके अलावा ये जन्म कुंडली पढ़ने के विशेषज्ञ भी हैं।

१७. ब्रजेश करेशा (Brajesh Karesha)
भाषा : हिंदी, अंग्रेजी

ज्योतिषी व जन्म कुंडली विशेषज्ञ ब्रजेश करेशा को ३० वर्षों से भी अधिक का अनुभव है और वह आपको व आपके परिवार के स्वास्थ्य से लेकर, माता-पिता और ससुराल वालों के साथ झगड़े, कैरियर के रास्ते और आपके द्वारा लिए जाने वाले व्यवसाय से संबंधित सभी मुद्दों पर सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा ये बुरी नजर के प्रभाव को खत्म करने में मदद करते हैं।

१८. एस्ट्रो कुम्मासानी (Astro Kummasani)
भाषा : हिंदी, अंग्रेजी व तेलुगू

वैदिक ज्योतिष में १० से अधिक वर्षों के अनुभव प्राप्त किए ये ज्योतिष विशेषज्ञ हैं। वह कुंडली को देखकर ग्रह नक्षत्रों की चाल और उनके प्रभाव का अध्ययन करने में माहिर हैं। ये रोजमर्रा की जिंदगी से संबंधित समस्याओं जैसे शादी, बच्चों, करियर, प्यार और रिश्तों, स्वास्थ्य, धन, समृद्धि, शिक्षा और वित्त से संबंधित मुद्दों पर परामर्श प्रदान करते हैं। लोग इनकी सटीक भविष्यवाणियों से काफी प्रसन्न रहते हैं।

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१९. आचार्य के.एन.जोशी (Acharya KN Joshi)
भाषा : हिंदी

ज्योतिष के क्षेत्र में आचार्य के.एन.जोशी एक मशहूर और जाना पहचाना नाम है। इन्हें ज्योतिष विद्या में २० वर्षों का अनुभव प्राप्त है। फेस रीडिंग और हस्तशास्त्र में ये विशेष जानकारी रखते हैं। इन्होने अबतक हजारों से ज्यादा जन्म पत्रिकाओ का विवरण किया है और कई लोंगो के जीवन की असफलता के रहस्य कारणों का पता भी लगाया है और साथ ही उनका समाधान भी बताया।

२०. दिनेश राणा ( Dinesh Rana)
भाषा : हिंदी, अंग्रेजी

वैदिक और पाश्चात ज्योतिष के क्षेत्र में दिनेश राणा एक जाना-माना नाम है। वैदिक ज्योतिष के साथ-साथ इन्होंने पाश्चात ज्योतिष, हस्त रेखा विज्ञान तथा वास्तु विज्ञान का अध्ययन AHSAS, दिल्ली से किये। दिनेश ज्योतिष ज्ञान और अपनी विशेषता के अनुसार -प्यार और रिश्ते, विवाह, करियर, धन लाभ, व्यापार एवं विदेश-गमन आदि की सटीक भविष्यवाणी और समाधान प्रदान करने की अद्भुत क्षमता रकते हैं।

२१. आचार्य श्रीकांत रवस (Srikant Rawas)
भाषा : हिंदी, अंग्रेजी, मराठी

आचार्य श्रीकांत रवस जी ने ज्योतिष के क्षेत्र में काफी प्रचलित हैं। वैदिक ज्योतिष में आपकी गहन रूचि व विरासत में मिले ज्ञान ने आपको इस ओर अग्रसर किया। ये पिछले २० वर्षों से लगातार अपनी सेवाओं से लोगों को लाभान्वित कर रहे हैं। जातक की जन्मतिथि, समय व स्थान आदि के साथ वैदिक कुंडली बनाकर उसी के अनुसार जातक के भविष्य का आकलन करते हैं व उन्हें लाइफ के किसी भी पहलू पर बेहतर सुझाव देते हैं।

२२. श्री साई कृष्णा ज्योतिषालय (Sri sai krishna Jyotishylaya)
भाषा :अंग्रेजी, कन्नड़

पंडित डी एस ज्योतिष के पास १८ वर्षों का अनुभव है। पति पत्नी समस्या, नकारात्मक उर्जा दूर करने, प्रेम संबंधी व पारिवारिक समस्याओं को निवारण करने में मदद करते हैं।

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२३. आचार्य पौरव (Acharya pauraw)
भाषा : अंग्रेजी, गुजराती, हिंदी

आचार्य पौरव एक मशहूर ज्योतिषी हैं, जो गहराई के साथ किसी के जीवन के मुद्दों को समझने और उनके लिए सर्वोत्तम सलाह और प्रभावी उपाय प्रदान करने की क्षमता रखते हैं। ये वैदिक ज्योतिष में विशेष जानकारी रखते हैं और लोगों की मदद करने एवं आध्यात्मिकता की मदद से उनकी समस्याओं को कम करने में विश्वास रखते हैं।

२४. एस्ट्रो अनन्या (Astro Ananya)
भाषा: बांग्ला, इंग्लिश, हिंदी

एस्ट्रो अनन्या एक प्रमाणित वैदिक ज्योतिष होने के साथ साथ टैरो कार्ड रीडर, अंकशास्त्री, रेकी ग्रैंडमास्टर और NLP प्रैक्टिशनर भी हैं। वैसे ये रैमेडी, एंजेल हीलिंग, क्रिस्टल टीचिंग में माहिर हैं। ये लोगों के जीवन से संबंधित समस्याएं शादी, रिश्ते, प्रेम, व्यवसाय, करियर, शिक्षा, स्वास्थ्य, मैच-मेकिंग आदि के लिए उपाय बताती हैं।

२५. ए. बाला सुब्रमण्यम (Thapasi a. bala subramaniyam)
भाषा : इंग्लिश, हिंदी

ज्योतिष के क्षेत्र में ए. बाला सुब्रमण्यम काफी जाना माना नाम है। ज्योतिष क्षेत्र में २५ साल से भी ज्यादा का अनुभव रखते हैं। इन्हें अंकशास्त्र, वास्तुशास्त्र, रत्नशास्त्र, वास्तुशास्त्र, प्रेम संबंध समस्याएं, जन्म कुंडली आदि से संबंधित विषयों में इनसे आप जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

रिश्तों में भावनात्मक दुर्व्यवहार के क्या हैं संकेत, कैसे पाएं छुटकारा ?

रिश्ता कोई भी हो मगर जब तक उसमे भावनात्मक रूप से जुड़ाव ना हो उस रिश्ते में ज्यादा आवश्यक होता है क्योंकि अगर किसी रिश्ते में भावनात्मक रूप से जुड़ाव नहीं होता है तो वो रिश्ता महज दिखावे मात्र के लिए होता हैं। वैसे भी आज के समय में रिश्तों की अहमियत काफी कम होते जा रही है जो कि सभी पाटनर्स के बीच देखने को मिल रहा है।

आज हम बात करेंगे रिश्ते में होने वाले शोषण की, जाहिर सी बात है कि शोषण के बारे में बात करते समय हमारे ज़ेहन में सिर्फ शारीरिक शोषण का ख्याल ही आता है लेकिन शारीरिक शोषण के अलावा भावनात्मक शोषण भी कुछ चीज होती है जिसे इमोशनल एब्यूज कहा जाता है। यह तब होता है जब कोई अपने शब्दों से या गुस्सा दिखाकर, धोका देकर या बुरे व्यवहार से आपको तकलीफ पहुंचाता है, या आप पर आपना नियंत्रित करने की कोशिश करता है।

इमोशनल एब्यूज सबसे ज्यादा खतरनाक होता है क्योंकि यह आपके मन की गहराई तक असर डालता है। वैसे यह सिर्फ रिश्तों में ही नहीं बल्कि बच्चों के साथ भी होता है, जिसमें बच्चे को कई बार डराकर या धमकाकर ब्लैकमेल किया जाता है और भावुक होकर बच्चे चुप रह जाते है।

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हालाँकि यह कतई आवश्यक नहीं है कि इमोशनल एब्यूज सिर्फ पुरुष ही कर सकता है यह महिला साथी द्वारा भी किया जा सकता है। आज हम आपको कुछ ऐसे संकेत के बारे में बताने जा रहे हैं जो यह जानने में आपकी मदद करेंगे कि आपके साथ इमोशनल एब्यूज हो रहा है और अगर हो रहा है तो मतलब वक्त रहते आपको सतर्क हो जाना चाहिए।

रिश्तों में इमोशनल एब्यूज के संकेत

गुस्‍सा होना 

पार्टनर का आपस में प्यार करना आम बात है और ऐसा होना भी चाहिए मगर प्यार करते करते अचानक से किसी बात पर नाराज हो जाना या गुस्सा करना और फिर कुछ ही पल बाद जब सामने वाला एकदम सहम जाये तो शांत हो जाना। यह एक तरह से इमोशनल एब्यूज का संकेत हैं। आमतौर पर लोग ऐसा सामने वाले पर अपना भय दिखने के लिए और आप पर काबू पाने के लिए करते हैं।

गोपनीयता पर आक्रमक होना

कोई इंसान जब आपको भावनात्मक रूप से ठेस पहुँचाना चाहता है तो वो कभी भी आपकी निजता का सम्मान नही करता है। ऐसे लोग हमेशा आपके गोपनीयता के पीछे पड़े रहते हैं जैसे अपना पासवर्ड बताओ, पिन बताओ, अपना पर्स दिखाओ, आदि। लगातार इस तरह की हरकतें कर के आपका साथी आपके ऊपर एक तरह का दबाव बनाना चाहता है। कहाँ जा रहे है किस्से मिल रहे हैं इस तरह की तमाम जानकारी रखना इमोशनल एब्यूज का सख्त उदाहरण है।

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बेवजह मजाक उड़ाना

हंसी मजाक तो हर एक पार्टनर के बिच होता है और यह जरूरी भी है क्योंकि किसी भी रिश्ते में सिर्फ कम और जिम्मेदारी का होना मतलब तनाव और हंसी मजाक ही एक मात्र रास्ता है इस तनाव से बचे रहने का। मगर जब आपका साथी बिना किसी खास वजह के आपका मजाक उडाये और कई बार ऐसा करे तो समझ लीजिये कि वो आपके साथ भावनात्मक खिलवाड़ कर रहा है यानी कि एक तरह से इमोशनल एब्यूज।

रिश्तों में नियंत्रण

इमोशनल एब्यूज की एक वजह पार्टनर को अपने नियंत्रण में रखने की इच्छा भी होती है। जी हां कई बार ऐसे लोग अपने साथी के साथ समानता का व्यवहार नहीं करते हैं। वे खुद को कहीं ज्यादा अहमियत देते हैं। ऐसे लोगों की मानसिकता प्रभुत्व जमाने वाली होती है। ऐसे लोग अपनी फैमिली के लोगों के साथ-साथ दोस्तों के साथ भी अच्छा व्यवहार नहीं करते।

रिश्तों में किसी भी तरह की समस्या क्यों न हो, आप चाहे तो मनोवैज्ञानिक प्रिया सिंह से संपर्क कर सकते हैं। ये एक रिलेशनशिप काउंसर हैं जो रिश्तों में आई समस्या को बखूबी सुलझा सकती हैं। ज्यादा जानकारी के लिए यहां क्लिक करेंं

क्या है बर्नआउट, यहां जानें इसके लक्षण व दूर करने के उपाय

हम बात करें अगर बीमारियों की तो कई बार आप ऐसी बीमारियों का नाम सुनते होंगे जिनके बारे में न आपने कभी सुना होगा और न ही समझा होगा। आजकल कोरोना काल में जैसा माहौल बना हुआ है उसमें तमाम तरह की बीमारियां लोगों के शरीर के अंदर घर कर रही हैं। इनमें से कुछ बीमारी मानसिक होती है जिनमें से एक है बर्नआउट। जिसका मतलब कई लोगों की समझ से परे हैं।

दरअसल इसमें व्यक्ति को खुद के अंदर मोटिवेशन की कमी के कारण अपने आप को पराजित और किसी काम को पूरा करने में असमर्थ महसूस करता है। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि ये उन लोगों में होती है पेशेवर होते हैं। मनोवैज्ञानिकों की मानें तो ये एक तरह का सिंड्रोम है, जो काम के अधिक दबाव की वजह से होता है। कई बार लोगों को तो समझ में ही नहीं आता है कि वो इस गंभीर बीमारी की चपेट में हैं और देखते ही देखते वो अपना सबकुछ खो देते हैं।

इसलिए यह बात हमें समझना बेहद जरूरी है कि हमारे जीवन में मनोवैज्ञानिक के सलाह की आवश्यकता उतनी ही जरूरी है जितनी की बीमार होने पर एक डॉक्टर की। शारीरिक समस्याएं तो सामने दिख जाती हैं लेकिन मानसिक समस्याओं के बारे में जब तक हमें ज्ञात होता है बहुत देर हो जाती है। आज हम आपको इस बर्नआउट सिंड्रोम के लक्षण के बारे में बताएंगे ताकि आप भी इसे आसानी से समझ सकें

बर्नआउट के लक्षण

जब कोई व्यक्ति बर्नआउट सिंड्रोम का शिकार हो जाता है तो उसे अक्सर ही थकान महसूस होने लगता है और चिड़चिड़ापन भी महसूस होता है।

कई बार ऐसा भी होता है कि आप अपने काम को लेकर हमेशा संदेह में रहते हैं, यह भी इसी सिंड्रोम का लक्षण है।

इस दौरान आप ऑफ़िस में तो होते हैं लेकिन आपका ध्यान काम पर नहीं लग पाता है।

इस सिंड्रोम के दौरान व्यक्ति को कई बार भूख भी नहीं लगता है।

कई बार इस समस्या से गुजर रहे व्यक्ति को ड्रग या एल्कोहल लेने की भी इच्छा होने लगती है।

किसी भी काम में बार बार नकारात्मकता का महसूस होना।

यही नहीं लोग इस दौरान अकेला रहना चाहते हैं, इतना ही नहीं वो अपने दोस्तों और परिवार वालों से बात तक नहीं करना चाहते हैं।

ये तो हो गए बर्नआउट सिंड्रोम के लक्षण की बात, अब आप ये सोच रहे होंगे कि आखिर इससे बचा कैसे जाए। हालांकि इससे बचना काफी आसान है।

बर्नआउट सिंड्रोम से बचने के उपाय

शारीरिक स्वास्थ है जरूरी: सबसे पहले तो ध्यान रहे कि इस दौरान आपको शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है, ऐसे में आपको ज्यादा मीठा नहीं खाना चाहिए, इसके साथ ही साथ व्यायाम करना चाहिए। हो सके तो आप 7-8 घंटे की नींद लें, और स्ट्रेस फ्री रहें।

पसंदीदा काम करें: दिन में कुछ घंटे अपनी हॉबी पूरी करने के लिए निकालें, चाहें वो डांस हो, सिंगिग हो या कुछ और। जो लोग ऐसा करते हैं वो काम में भी फोकस कर पाते हैं और काम करते समय आई परेशानियों का उपाय भी जल्दी ढूंढ लेते हैं।

सोशल होकर रहे: कोशिश करें कि बर्नआउट से छुटकारा पाने के लिए दोस्तों व रिश्तेदारों से मिलें। इन सबसे आपको इमोशनली अच्छा लगेगा और आप इस सिंड्रोम से भी बाहर आएंगे।

करियर को लेकर करें प्लानिंग: अक्सर ऐसा होता है कि काम में दिल ना लगने से आपको थकान महसूस हो सकती है व इससे अनप्रोडक्टिविटी बढ़ सकती है। इसलिए आप सोचें कि आपको क्या बदलाव चाहिए, और उसकी तरफ कदम बढ़ाएं।

सुबह उठते ही बना लें एक रूटीन: इस भागदौड़ भरी लाइफ में किसी को समय ही नहीं मिल पाता है ऐसे में सुबह से दिनभर थकान रहती है। इसलिए सुबह समय से उठें, खुद को रिलैक्स करें, चाय पिए, मेडिटेशन करें या कुछ भी करें जिससे आप रिलैक्स हों।

आप चाहे तो इस समस्या से निपटने के लिए मनोवैज्ञानिक रीमा शाह से भी मदद ले सकते हैं वो आपको इससे बचने में काफी मदद करेंगे।

तनाव, चिंता व क्रोध से निपटने के लिए बेहद ही कारगर है ब्रीदिंग एक्सरसाइज

ये दौर कोविड-19 का चल रहा है और धीरे धीरे सरकार भी लॉकडाउन में रियायतें दे रही है। ऐसे में अब हमें घर से बाहर आवश्यकता पड़ने पर तो निकलना ही होगा और खास बात तो यह है कि इसके साथ ही साथ हमें इस कोरोना काल में जीने की आदत भी डालनी होगी। ऐसे में खुद को कोरोना वायरस से सुरक्षित रहने के लिए अभी से ही तैयार होना होगा। इस कोरोना काल में जीने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है खुद को अंदर से मजबूत बनाना जो संभव है एक्सरसाइज से।

जैसा कि आप सभी जानते ही हैं कि इस वायरस में सामान्य फ्लू जैसे लक्षण नजर आ रहे हैं जिसकी वजह से लोगों के समझ से परे हो जा रहा है कि उन्हें सामान्य फ्लू (सर्दी-ज़ुकाम, बुखार, छींक) है या कोरोना हुआ है। वहीं, बात करें अधिक उम्र वाले लोगों की तो डायबिटीज और अस्थमा या हायपरटेंशन से पीड़ित लोगों के लिए कोरोना बेहद बड़ा खतरा है। इसलिए आज हम आपको ब्रीदिंग एक्सरसाइज के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि आपको कोरोना काल में जीने के लिए काफी मदद करेगा। इस महज एक एक्सरसाइज के शरीर को कई सारे फायदे होते हैं।

हम ये तो जानते ही हैं कि पचास से ज्यादा उम्र वाले लोगों में अक्सर ही एनर्जी लेवल कम होने लगता है जिसके कारण उनको कमजोरी व थकान महसूस होने लगता है। यही कारण है कि उम्र बढ़ने के साथ ही साथ लोगों को एक्सरसाइज करने की सलाह देती है पर इस उम्र के लोग एक्सरसाइज करने में कतराते हैं।

हालांकि इसके पीछे तमाम लोगों के अन्य कई कारण होते हैं जैसे बिजी शेड्यूल का होना या फिर समय का अभाव होना। लेकिन इसकी वजह से कई सारी बीमारियां इनके शरीर में घर कर जाती है। ऐसे में अगर ये लोग थोड़ा सा वक्त निकालकर ब्रीदिंग एक्सरसाइज करते हैं तो ये अपनी उम्र बढ़ने के साथ ही साथ हेल्दी भी रह सकते हैं। ब्रीदिंग एक्सरसाइज न सिर्फ उम्रदराज लोगों के लिए हैं बल्कि युवाओं के लिए भी काफी फायदेमंद साबित होता है।

ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने की प्रक्रिया

किसी भी एक्सरसाइज को शुरू करने से पहले आपको उसकी सही तरीके का ज्ञान होता अति आवश्यक है। इस एक्सरसाइज को करने के लिए आपको सबसे पहले ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। इसके बाद आप इसकी शुरुआत आप कई बार सांस लेने से कर सकते हैं।

वहीं इस बात का अवश्य रखें कि तब तक सांस लें, जब तक आपको ऐसा लगे कि आपके फेफड़े पूरी तरह से भर गए हैं। यही नहीं, ऐसा महसूस हो जैसे आपके पेट में एक गुब्बारे की तरह हवा भर गई है। इसके बाद अब आपको चार गिनने तक आपको सांस रोककर रखना है फिर उसके बाद आठ गिनने पर सांस को बाहर निकाले दें। जब आप चिंता या तनाव महसूस करें और शरीर में ऊर्जा का संचार करना चाहते हैं, आप चाहें तो इस प्रक्रिया को 12 बार यानि की तीन सेट में कर सकते हैं।

इस ब्रीदिंग तकनीक को आप दिन में कम से कम दो बार करें। इसे करते समय यह जरूर ध्यान रखें कि आप इसे बार-बार नहीं कर सकते और पहली बार में एक बार में चार से ज्यादा सांस न लें। एक माह के बाद अगर आपको लग रहा है कि जब आप थोड़ा हल्का महसूस कर रहे हैं तो इसको करते रहें।

हालांकि इस एक्सरसाइज को करने से शुरूआत में थोड़ी सी समस्या जरूर उत्पन्न होगी लेकिन कुछ समय बाद आपको इसका अभ्यास हो जाएगा। सांस लेने की इन तकनीकों में जब आप सांस लेते हैं, तो इसका मतलब है कि आप अपने जीवन शक्ति और सेहत अपने अंदर ले जा रहे हैं।

जब आप सांस रोकते हैं, तो यह अच्छी सेहत और एनर्जी का प्रतीक है, जबकि सांस को बाहर छोड़ने से आप अपनी हर पीड़ा, थकान, चिंता और तनाव को अपने शरीर से बाहर निकाल देंगे। यानी पूरे शरीर के स्वास्थ्य के लिए सांस की यह तकनीकें बहुत ही लाभदायक हैं। इसलिए ये एक्सरसाइज आपके सभी तरह की चिंता, थकान व तनाव को दूर करने के साथ ही साथ मानसिक रूप से शांति भी प्रदान करता है।

अगर आप चाहे तो इसके लिए मनोवैज्ञानिक विनीता एम. हरिया से मदद ले सकते हैं, ये एक प्रमाणित मनोवैज्ञानिक है। इनके बारे में विस्तृत जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।

टॉक्सिक रिलेशनशिप के होते हैं ये लक्षण, गलती से भी न करें अनदेखा

रिलेशनशिप चाहे कोई भी हो उसमें प्यार होना बेहद जरूरी है, लेकिन वहीं बात करें पति पत्नी या फिर लव पार्टनर की तो ये रिश्ता प्रेम पर ही टिका होता है। यह भी सच है कि एक अच्छे रिलेशनशिप में होते हैं तो आप खुश होते हैं और आपके अंदर हमेशा सकारात्मक भावनाएं रहती हैं जिसके कारण आपका रिश्ता गहरा होता है। लेकिन आज के समय में ऐसा कम ही देखने को मिलता है। आज हम आपको रिलेशनशिप के एक ऐसे पहलू से रूबरू कराने जा रहे हैं जो आपको सुनकर कड़वा तो लगेगा ही लेकिन यह पूरी तरह से सच भी है।

कई बार ऐसा होता है कि हम रिलेशनशिप होकर भी खुद को अकेला, निराश और दुखी महसूस करते हैं क्योंकि हम गलत लोगों से संबंध बना लेते हैं ऐसे में ये संबंध हमारे जीवन में जहर का काम करता है। ये रिश्ता इतना बुरा हो जाता है कि इसका असर हमारे मन मस्तिष्क पर भी इसका बेहद बुरा असर पड़ता है। धीरे धीरे समय के साथ ही ये रिश्ते आपको बोझ महसूस होने लगते हैं और आप इससे दूर भागने की कोशिश करते हैं ऐसे रिलेशनशिप को मनोवैज्ञानिकों ने टॉक्सिक रिलेशनशिप का नाम दिया है, इसे हिंदी में विषाक्त रिश्ता कहा जाता है।

सामान्य रिलेशनशिप में दो लोगों के बीच ऐसा बंधन दिखता है जो जीवन के हर सफर में एक दूसरे का साथ देते हैं, एक दूसरे की खुशी के बारे में सोचते है लेकिन टॉक्सिक रिलेशनशिप में ठीक इसके विपरीत होता है। इसमें लोग सिर्फ अपनी खुशी के बारे में ही सोचते हैं। उन्हें अपने साथी की भावनाओं से कोई मतलब नहीं होता है। इस रिलेशनशिप में रह रहे लोगों के अंदर अक्सर अपने रिश्ते को लेकर संदेह रहता है।

टॉक्सिक रिलेशनशिप आपके अंदर की भावनाओं को पूरी तरह खत्म कर देता है जिसके कारण आप अपने साथी से दूर भागने लगते हैं। इसलिए अगर आपको भी लगता है कि अपना रिश्ता एक टॉक्सिक रिलेशनशिप की तरफ मुड़ रहा है या फिर आपको भी अपने रिश्ते में कुछ ऐसा महसूस हो रहा है तो आपको एक रिलेशनशिप काउंसलर की जरूरत है जो आपके रिश्ते को बचाने में और आपको इन अवसाद से उबरने में काफी हद तक मदद करेंगी।

अब हम जान लेते हैं उन लक्षणों के बारे में जिनसे पता चल सकता है कि कौन सी चीजें आपके रिलेशनशिप को टॉक्सिक बनाती हैं।

टॉक्सिक रिलेशनशिप के लक्षण

सबसे पहले तो यह जान लें कि ऐसे रिलेशनशिप में होते हैं तो आप अपने साथी से खुलकर बात नहीं कर पाते हैं। आपको हमेशा ही अपने साथी के सामने दिखावा करना पड़ता है। यही नहीं आप अक्सर ये कोशिश करते हैं कि आप अपने पार्टनर को छोटी से छोटी बातों पर नीचा दिखा सके। कई बार तो किसी अच्छी चीज में भी आपको उसके अंदर बुराईयां ही नजर आती है।

अगर कभी आपके और आपके पार्टनर के बीच कोई बहस हो जाती है तो आपको हमेशा ही उस दौरान जीतना होता है चाहे वो बहस आपके रिश्ते को खत्म करने की ही क्यों न हो लेकिन उस समय भी आपकी जीत ही मायने रखती है। अक्सर ही खुद को ऊंचा व सर्वश्रेष्ठ दिखाना कभी न झुकना, टॉक्सिक रिलेशनशिप की पहचान है।

भले ही इस रिश्ते में लोग साथ रह रहे होते हैं लेकिन इसमें कभी भी अपने पार्टनर की समस्याओं को सुनने की या उसका समाधान निकालने की कोशिश नहीं करते हैं। बल्कि कई जगहों पर तो वो एक दूसरे की समस्याओं को अनदेखा भी कर देते हैं। इस दौरान भी इनके बात करने का तरीका बिल्कुल अलग होता है जिसकी वजह से ऐसी परिस्थिति में आप नहीं चाहते हुए भी आप अपने पार्टनर को दुख पहुंचा देते हैं।

Couple after a fight sitting on bench

टॉक्सिक रिलेशनशिप में एक चीज और अक्सर ही देखने को मिलती है और वो है एक-दूसरे के प्रति जलन भी भावना होती है। आपका पार्टनर हमेशा आपको शक कि निगाहों से देखता है और हर बात के लिए आपको गलत ठहराता है। यह रिलेशनशिप में प्यार व चिंता होता तो है लेकिन बस दिखावा मात्र के लिए क्योंकि ये इन दोनों के बीच विश्वास के अभाव को भी दर्शाता है, जो एक अच्छे रिश्ते में दूरी बढ़ाता है।

टॉक्सिक रिलेशनशिप या अन्य कोई भी रिश्तों से संबंधित समस्या, आपकी मदद कर सकती हैं रिलेशनशिप काउंसलर प्रिया सिंह। यह एक प्रोफेशनल रिलेशनशिप काउंसलर हैं और इन्होने अभी तक कई रिश्तों की समस्याओं को सुलझाया है।

जानें, नकारात्मक विचारों को कैसे करें नियंत्रित (How to Control Negative Thoughts)

हम सभी के जीवन में सुख और दुख दोनों ही आते हैं, अगर लाइफ में केवल खुशियां ही रहेंगी तो उसका महत्व नहीं पता चल पाएगा क्योंकि सुख की अनुभुती भी दुख के अंत होने पर ही होती है। सही मायने में देखा जाए तो आप कह सकते हैं कि सुख और दुख की तरह ही सकारात्मक और नकारात्मक विचार भी एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं।

यह एक दूसरे के पूरक माने जाते हैं लेकिन इसका ये मतलब बिलकुल भी नहीं है कि इस बात को सोच कर एक व्यक्ति को निराशावादी होना चाहिए। क्योंकि अगर हमें अपने जीवन में सुखी और सफल होना है तो उसके लिए सकारात्मक सोच का होना बेहद आवश्यक है। पर कई बार ऐसा भी होता है कि लोगों के साथ कुछ ऐसी घटनाएं घटती हैं जिसकी वजह से उनके मन में नकारात्मक विचार जन्म लेने लगते हैं, उस समय ऐसा लगता है कि सबकुछ खत्म सा हो गया है, हर चीज व्यर्थ लगने लगता है।

आपको बता दें कि जीवन में अक्सर नकारात्मक सोच को लेकर नहीं चलना चाहिए क्योंकि वो कहते हैं न कि सुबह होने से पहले चारों और काला अंधेरा छाया होता है जीवन भी कुछ ऐसा ही है। इसलिए आज हम कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे हैं जिनको अपनाकर आप खुश तो रहेंगे कि इसके साथ ही साथ नकारात्मकता को छोड़ सकारात्मक सोच में कदम रखेंगे।

नकारात्मक सोच को खुद से ऐसे करें दूर

१. मेडिटेशन करें

मेडिटेशन एक बेहद ही अच्छा विकल्प है जो कि हर रोज करना चाहिए, इसे करने से आपके दिमाग़ से जो नकारात्मकता भरी हुई हैं उनको बाहर निकालने में मदद मिलता है। शुरूआत में आपको मेडिटेशन १० मिनट करना चाहिए उसके बाद धीरे धीरे आप चाहे तो इसे ३० मिनट तक भी कर सकते हैं।

२. सुबह जल्दी उठें

सुबह जल्दी उठना भी बेहद फायदेमंद होता है, यह आपके शरीर को ऊर्जावान और बुद्धिमान बनाता है। इसलिए अगर आप सुबह उठकर ये प्लान कर लेते हैं कि आपको पूरा दिन क्या करना है तो आपको अच्छा महसूस होगा और नकारात्मक विचार भी नहीं आयेंगे।

३. दूसरों की सहायता करें

कोशिश करें कि आप समय मिलने पर दूसरों की मदद करें, हां पर इस बात का ध्यान भी अवश्य रखें कि उनकी मदद कर आप उनसे कोई अपेक्षा न रखें। क्योंकि किसी से अपेक्षा रखने पर अगर पूरा नहीं होता तो भी मन में नकारात्मकता उत्पन्न होती है।

४. नकारात्मक सोच वालों से ना करें दोस्ती

अगर आप अपने अंदर की नकारात्मकता को दूर करना चाहते हैं तो ये जरूर जान लें कि आपके आस पास जो लोग हैं यानि की जिनके साथ आप ज्यादा वक्त बिताते हैं वो सकारात्मक सोच वाले हों क्योंकि नकारात्मक विचार वालों के साथ रहकर आप कभी अपने अंदर ये बदलाव नहीं ला पाएंगे।

५. अच्छे एवं बुरे दोनों की जिम्मेवारी ले

जीवन में अच्छा भी परिणाम मिलता है व बुरा भी ऐसे में हमें ये जरूर ध्यान रखना चाहिए कि बुरे परिणाम को लेकर बैठ नहीं जाना चाहिए बल्कि जिस तरह हम अच्छे परिणाम को अपनाते हैं वैसे बुरे परिणामों को अपनाकर आगे बढ़ना चाहिए।

६. सकारात्मक संवेदनाओं को दें जगह

नेगेटिव ऊर्जा यानी की नकारात्मक विचारों से निजात पाने के लिए हमें अपने अंदर सकारात्मक संवेदनाओं को जगह देनी पड़ेगी। पुरानी परस्थितियों के बारे में सोचना छोड़ना होगा एवं नए विचारों को परख कर अपने व्यवहार में लाना होगा।

७. डायरी लिखने की आदत

कहते हैं कि अगर मन की भावनाओं को कागज़ के पन्ने पर उतारा जाए तो बहुत तसल्ली मिलती है। इसलिए अगर आप भी परेशान हैं,तो जो कुछ भी मन में चल रहा है उसे डायरी में लिख डालें क्योंकि ऐसा करने से भी आपके मन के अंदर की नकारात्मकता दूर होती है।

८. म्युज़िक सुनना

जब भी आप नेगेटिव फ़ील करें, तो अपना पसंदीदा म्युज़िक सुनें। कई शोध में भी इस बात का खुलासा किया गया है कि जब आप अवसादग्रस्त या फिर नकारात्मकता से भरे होते हैं, तो अच्छा म्युज़िक आपके मूड को जल्दी ठीक करता है।

९. ख़ुद में आत्मविश्वास जगाएं और नकारात्मक सोच से रहे दूर

कई बार ऐसा होता है कि लोग आत्मविश्वास की कमी के कारण नकारात्मकता का शिकार होते हैं। हो सकता है कभी आपसे कुछ ग़लती हो गई हो, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आप हमेशा ग़लत ही होंगे। और ये मानकर नहीं बैठ सकते हैं कि आप हमेशा के लिए नकारात्मक सोच रख लें।

१०. आज के बारे में सोचें

हममें से ज़्यादातर लोग पुरानी बातों और ग़लतियों के कारण नेगेटिव सोच का शिकार होते हैं। लेकिन अगर आप आज के बारे में सोचेंगे और आज को तो आप ख़ुश रहेंगे।

आप चाहे तो इसके लिए किसी मनोवैज्ञानिक की भी सलाह ले सकते हैं जो आपको इन आदतों को अपनाने में मदद करेंगे। एक बेहतरीन व अनुभवी मनोवैज्ञानिक से संपर्क करने के लिए यहां क्लिक करें।

क्या आप भी हैं डिप्रेशन में? इससे निकलने में हम कर सकते हैं आपकी मदद

आज की इस दुनिया में भले ही आधुनिक हो चुकी है और आजादी की बात करती है लेकिन हर कोई अपने आप में ही कैद होते जा रहा है। ये एक ऐसी आजादी है जिसे पाकर लोग अपने आप में ही सिकुड़ते जा रहे है, अंतत: परिणाम ये देखने को मिल रहा है कि लोग डिप्रेशन में जा रहे हैं जिसे मनोवैज्ञानिक भाषा में अवसाद भी कहा जाता है। ये मानसिक विकारों में से एक होता है, कई बार तो लोग इसे समझ नहीं पाते हैं लेकिन अगर कोई व्यक्ति डिप्रेशन या अवसाद से पीड़ित होता है तो उसकी रोज की दिनचर्या भी प्रभावित होने लगती है।

कुछ सर्वे के अनुसार पता चला है कि अवसाद को दुनियाभर में होने वाला चौथा सबसे बड़ा रोग माना जाता था पर इस साल इसकी संख्या में ऐसी बढ़ोत्तरी हुई है कि अनुमान है कि बेहद जल्द ही यह अब दूसरे नंबर पर आने वाला है। WHO के अनुसार, भारत के लोग आज दुनिया में सबसे अधिक अवसाद से पीड़ित है।

अब इन बातों को सुनने के बाद आपके मन में एक सवाल अवश्य आ रहा होगा कि आखिर अवसाद कैसे होता है ? तो बता दें कि अभी तक इसका स्पष्ट रूप से मिल नहीं पाया है, क्योंकि किसी व्यक्ति को चिंता होना सामान्य है और वो किसी भी वजह से हो सकती है। लेकिन यही चिंता जब लंबे समय तक आपको घेरे रहती है तो व्यक्ति डिप्रेशन में चला जाता है।

आज हम आपको अपने इस लेख के जरिए ये बताएंगे कि डिप्रेशन से बचने के उपाय क्या हैं और इस गंभीर मानसिक बीमारी में जाने से खुद को कैसे रोक सकते हैं? इसके लिए आप चाहे तो किसी मनोवैज्ञानिक से सलाह ले सकते हैं जो आपको इससे उभरने में मदद करेंगी। इसके अलावा उनके सुझाव के साथ आपको रोजमर्रा की जिंदगी में इन आदतों को अपनाना चाहिए जो कि आपके लिए काफी मददगार साबित होगी।

डिप्रेशन से बाहर आने के लिए करें ये काम

योग है बेहतर विकल्प

अगर आपको लगता है कि आप डिप्रेशन में जा रहे हैं या फिर आप लंबे समय से किसी तनाव से गुजर रहे हैं तो इसके लिए व्यायाम आपकी काफी मदद कर सकता है। क्योंकि व्यायाम न सिर्फ आपको शारीरिक रूप से ही स्वस्थ रखता, बल्कि यह आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर माना जाता है। मनोवैज्ञानिकों का भी कहना है कि व्यायाम करने से शरीर में तो ऊर्जा का संचार के साथ ही साथ मस्तिष्क में हैप्पी हार्मोन्स भी रिलीज होते हैं, जो कि लोगों को अवसाद से बाहर आने में काफी मदद करते हैं।

फैमिली को दे समय

आज के समय में किसी के पास वक्त नहीं है हर कोई अपने अपने काम में इतना ब्यस्त हो गया है कि वो अपने रिश्तों के लिए भी वक्त नहीं निकाल पाता है। जिसकी वजह से कुछ ही समय में व्यक्ति को अकेलापन महसूस होने लगता है और देखते ही देखते वो अवसादग्रस्त हो जाता है। कोशिश करें कि अगर आप कितने भी ब्यस्त क्यों न हो पर किसी भी तरह से अपने परिवार, दोस्तों व करीबियों के लिए कुछ समय जरूर निकालें। ऐसा करने से आप इस मानसिक तनाव का शिकार होने से बच सकते हैं।

डिप्रेशन से निकलना तो काम को दें ब्रेक

हममें से कई लोग काम में इतने बिजी हो जाते हैं कि वह खुद को आराम देना जरूरी ही नहीं समझते। इतना ही नहीं कई बार तो इन्हें छुट्टी के दिन भी काम करने की आदत पड़ जाती है। ऐसे में जब धीरे धीरे इनपर वर्क प्रेशर बढ़ता है तो वो मानसिक दबाव में आने लगते हैं और देखते ही देखते व्यक्ति डिप्रेशन की गिरफ्त में आ जाता है। ऐसे में आप खुद को पंद्रह दिन या महीने में एक छुट्टी का दिन अवश्य लें क्योंकि इससे आपको मेंटली रिलैक्स महसूस करेंगे। 

खाने का रखें ख्याल

अब बारी आती है आपके डाइट की, आपको लग रहा होगा कि डिप्रेशन में खाने से क्या मतलब ? लेकिन ये सच है कि खाना सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं होता, बल्कि यह आपको शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ बनाता है। आपने वो कहावत तो सुनी ही होगी कि जैसा खाओगे अन्न, वैसा होगा मन। इसलिए अपने खाने का खास ख्याल रखें। कोशिश करें कि अपनी डाइट में हेल्दी फूड ही शामिल करें। जितना हो सके, मौसमी फल व सब्जियां खाएं। इसमें मौजूद विटामिन व मिनरल्स सिर्फ आपके तन को ही नहीं, मन को भी तंदरूस्त रखते हैं।

मानसिक विकारों से ग्रसित लोगों के लिए विनीता एम. हरिया एक प्रमाणित मनोवैज्ञानिक हैं, जो कि इन समस्याओं के लिए एक बेहतर मनोवैज्ञानिक काउंसलर साबित हो सकती है।

लॉकडाउन अकेलेपन व निराशा से जूझ रहे हैं, तो करें ये काम

जीवन में कई समस्याएं आती हैं जिनमें से कुछ ऐसी होती हैं जो सभी को नजर आती है लेकिन कुछ ऐसी होती है जो इंसान को मन ही मन परेशान करते रहती हैं। ये बेहद ही कठिन समय चल रहा है लोग अपनी दिनचर्या को लेकर काफी ज्यादा चिंतित हो गए है। लॉकडाउन ने हम सभी की जिंदगी बदलकर रख दी है।

लॉकडाउन का ये समय लगातार बढ़ता ही जा रहा है और यही वजह है कि लोगों के अंदर मानसिक विकार भी घर कर रहा है। ये मानसिक विकार अलग अलग तरह के हो सकते हैं। पर आज हम बात करेंगे खासकर अकेलापन व निराशा महसूस करने वाले लोगों के बारे में, हालांकि ये दोनों ही चीजें जब अत्यधिक हो जाती हैं तो व्यक्ति डिप्रेशन में चला जाता है।

अकेलापन

लॉकडाउन में घरों में लोग एकाएक बंद हो गए है, ऐसे में बाहर निकलना रिश्तेदारों व दोस्तों से मिलना सबकुछ बंद हो गया है। जाहिर सी बात है कि इस समय अधिकतर लोगों को अकेलापन अंदर ही अंदर खाए जा रहा। लेकिन इसके अलावा सामान्य दिनों में भी ये समस्या लोगों में देखने को मिलती हैं, मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि अकेलापन एक ऐसी भावना है जिसमें लोग बहुत तीव्रता से खालीपन और एकांत का अनुभव करते हैं।

अकेले व्यक्ति को मजबूत पारस्परिक सम्बन्ध बनाने में कठिनाई होती है। वैसे यह भी सच है कि अकेलेपन का अर्थ अकेले रहना नहीं है बल्कि हज़ारों लोगों के बीच में अकेला महसूस करना है। यह समस्या किसी भी कारणवश, जिंदगी के किसी भी पल व किसी के भी साथ हो सकती है।

लॉकडाउन में अकेलापन से कैसे निकले बाहर

१़. अपने आप से प्यार करना अकेलेपन को अपने से दूर करने का सबसे आसान और अच्‍छा तरीका होता है। ये तो सच है कि स्वयं को खुद से ज्यादा ना तो कोई जानता है और ना ही समझता सकता है।

२. अकेले होने की भावना आने पर कोशिश करें ख़ुद पर ध्‍यान केंद्रित करने की, अपने गुणों को पहचाने और कुछ नया करने की सोचें। हो सके तो वही काम करें जिसे करके आपको खुशी मिलती हो।

३. लॉकडाउन में अकेलेपन की भावना को दूर रखने के लिए सबसे अच्छा तरीका है दूसरों को ख़ुशी देने की कोशिश करना। कोई सामाजिक काम करना ऐसे लोगों के साथ रहकर आपको अच्छा महसूस होगा।

४. वैसे आपने ये कई बार सुना होगा कि हंसी स्वास्थ्य के लिए दवाई का काम करती है। हंसी-मज़ाक और खुश रहने से शरीर में एंडोर्फिन नाम का हॉर्मोन निकलता है जिससे क्रोध और दुःख कम होता है।

५. संगीत हमारे शरीर और मन के लिए एक टॉनिक की तरह काम करता है। यह अकेलेपन से निकलने में आपकी मदद करता है।

६. वैसे तो आजकल सोशल मीडिया को समय की बर्बादी के रूप में देखा जाने लगा है लेकिन इसके कुछ फ़ायदे भी हैं, लोग इससे जुड़कर दोस्त बनाते हैं और अकेलापन को दूर भगाने में ये काफी अच्छा विकल्प साबित होता है।

निराशा

इस समय कई लोगों की नौकरी चली गई, जो लोग बिजनेस करते थें उनको घाटा हो रहा है जिसकी वजह से लोगों के मन में निराशा आना वाजिब है। इसके अलावा कई बार ऐसा भी होता है कि कुछ लोग परीक्षाओं में असफलता मिलने पर व्यक्ति निराशा से भर जाता है। उसकी सोच भी नकारात्मक हो जाती है और धीरे-धीरे उसका मनोबल भी बैठ जाता है।

कुछ लोग अपनी आर्थिक स्थिति के कारण निराश होते हैं तो कई लोग परीक्षा में अच्छे नंबर ना लाने से या किसी प्रवेश परीक्षा में असफल होने, मनपसंद नौकरी न मिलने, अधुरे प्यार, पारिवारिक समस्याओं से निराश हो जाते हैं। पर हर निराश व्यक्ति को यह अवश्य पता करना चाहिए कि उसकी निराशा का मुख्य कारण क्या है। जीवन में व्यक्ति बहुत से अवसर पर निराश हो सकता है।

लॉकडाउन में निराशा से कैसे निकले बाहर

१. सबसे पहले तो आपको निराशा से बाहर निकलने के लिए अपनी सोच में बदलाव करना पड़ेगा। क्योंकि ये आपके दिमाग में बार बार नकारात्मक विचारों को लाता है जो आपके अंदर मौजूद प्रतिभा को भी खत्म कर देता है।

२. ध्यान रहे कि जिस बात से निराशा हो उसे बिल्कुल याद न करें, क्श्सेंकि जब हम सकारात्मक होकर सोचते हैं तो देखते हैं कि उन बातों का कोई मतलब ही नहीं था। उन बातों को भूलने से हमारे दिमाग से एक बोझ सा उतर जाता है, जिससे हम रिलैक्स महसूस करते हैं।

३. कोशिश करें कि लोगों को माफ करने की आदत अपने अंदर लाएं। यानि अगर आपके साथ कोई धोखा, नुकसान , भरोसे तोड़ता है तो आप उस बात को लेकर दुखी होने की बजाय उसे माफ कर दें।

४. इसके अलावा निराशा से बाहर निकलने के लिए अपनी पसंद के गाने सुनें, अपनी पसंद की मूवी देखें, कॉमेडी मूवी देखें।

५. जितना हो सके खुद को बीजी रखें ऐसा करने से आप अकेले नहीं रहेंगे क्योंकि अकेले में सबसे ज्यादा नकारात्मक विचार आते हैं।

अगर आप किसी भी तरह की मानसिक समस्या से जूझ रहे हैं तो आप विनीता एम. हरिया से मदद ले सकते हैं, ये एक प्रमाणित मनोवैज्ञानिक है। इनके बारे में विस्तृत जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।

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