मयूरभंज छऊ नृत्यशैली

 Availability

Saturday and Sunday 10 am - 1pm, 4pm - 7pm

 Language

English

 Fee Structure

Rs 242.70 for 1 Hour Session

 Price

₹242.7 ₹350.0   30% off



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Program Description

क्या आप चाउ की तरह पारंपरिक भारतीय नृत्य रूपों को सीखना चाहते हैं?

मयूरभंज छऊ नृत्य शैली पश्चिम बंगाल, बिहार और उड़ीसा के पड़ोसी राज्यों में अपने पारंपरिक रूप में देखने को मिलती है. छाऊ या 'मयूरभंज छऊ' एक प्रकार की नृत्य नाटिका है जिसमें युद्ध भावनाओं को शक्ति और पौरुष की श्रेष्ठ पराकाष्ठा के साथ सौंदर्य के धागे में पिरोया जाता है. छऊ में रामायण और महाभारत तथा पुराणों में वर्णित अलग-अलग कहानियों को आधार बनाकर यह नृत्य किया जाता है. युद्ध जैसी चेष्टाओं, तेज़ लयबद्ध कथन, और स्थान का गतिशील प्रयोग छाऊ की विशिष्टता है.

1.भारतीय लोकनृत्य सीखने का मौका
2.मयूरभंज छाऊ नृत्य की बारीक़ियाँ सीखना
3.महाभारत, रामायण जैसे धर्मग्रंथो का नृत्य के माध्यम से दर्शन
4.नृत्य के भाव-भंगिमाओं द्वारा अभिनय सीखना
5.तांडव और लास्य जैसे अलौकिक नृत्य से रूबरू होना
6.नृत्य के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक धरोहर को समझना
7.प्राचीन नाट्यशास्त्र के बारे में जानकारी
8.व्यायाम के रूप में नृत्य को दिनचर्या में शामिल करना
9.शरीर को अरोग्य रखने के लिये नृत्यकला का प्रयोग
10.मैडिटेशन या ध्यान के रूप में नृत्य का प्रयोग

About Rajesh Dhhruve Sai Babu  

राजेश साई बाबू बॉलीवुड में भारतीय लोक नृत्य जैसे मयूरभंज छऊ, गरबा,कालबेलिया, डांडिया आदि के स्थापित कलाकार हैं.

राजेश साई बाबू एक नर्तक और कोरियोग्राफर हैं, जो मयूरभंज छऊ नृत्य के पारंपरिक लोकशैली को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का काम कर रहें हैं. मयूरभंज छऊ नृत्यशैली उन्हे विरासत में मिली हैं. वे संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित और मयूरभंज छऊ नृत्य के विख्यात गुरू अनंत चरण साई बाबू के पोते हैं. वे आज के समय बॉलीवुड में भारतीय लोक नृत्य जैसे गरबा,कालबेलिया, डांडिया के स्थापित कलाकार हैं. साथ ही मयूरभंज छऊ नृत्य कौशल के विरासत को आगे ले जाते हुए उन्होने अपने पिता और भाई के साथ मिलकर दिल्ली में 'गुरुकुल छऊ नृत्य संगम' नामक नृत्य संस्था से इस पारंपरिक लोक नृत्य को जीवित रखने का कार्य किया है.

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